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Telangana News: तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. घर के सामने मौज-मस्ती से खेल रही एक महज चार साल की मासूम बच्ची के लिए उसके ही घर के बाहर खड़ी कार ‘मौत का पिंजरा’ साबित हुई. कार में बैठने के बाद ऑटोमैटिक लॉक लगने और भीषण गर्मी में ऑक्सीजन की कमी (दम घुटने) के कारण बच्ची की जान चली गई.

इस दुखद हादसे ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है, बल्कि पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है. यह दुखद घटना कोठागुडेम जिले के जुलुरुपाडु मंडल स्थित विनोबानगर गांव की है. विनोबानगर के सरपंच गंगावती नवीन और उनकी पत्नी ऐश्वर्या की दो बेटियां हैं, तनविता श्री (4) और सुरक्षा. 4 वर्षीय तनविता श्री पास के ही एनुकुरु स्थित एक प्राइवेट स्कूल में LKG की छात्रा थी. रविवार की छुट्टी होने के कारण वह घर पर ही मौजूद थी.

रविवार सुबह करीब 11 बजे जब उसकी मां घर के अंदर कामकाज में व्यस्त थीं, तब तनविता खेलते-खेलते घर से बाहर आ गई. वह खुशी-खुशी घर के सामने खड़ी अपनी कार के अंदर जाकर बैठ गई.

दरवाजा ऑटो-लॉक हुआ, अंदर घुट गया दम

जैसे ही मासूम कार के अंदर बैठी, अचानक कार का दरवाजा अपने आप लॉक हो गया. 4 साल की छोटी बच्ची कार का लॉक नहीं खोल पाई और अंदर ही फंसकर रह गई. बंद कार के भीतर भीषण गर्मी, घुटन और ऑक्सीजन की कमी के कारण उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. मदद के लिए चीखते-चिल्लाते हुए वह बेहोश होकर कार की अगली सीट के नीचे गिर पड़ी.

पूरे गांव में ढूंढते रहे, कार के अंदर से मिली अचेत

काफी देर तक जब तनविता दिखाई नहीं दी, तो चिंतित मां ने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ उसकी तलाश शुरू की. ग्रामीणों ने गांव की हर गली-मोहल्ले में बच्ची को ढूंढा, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला.

आखिरकार संदेह होने पर जब परिजनों ने घर के बाहर खड़ी कार के शीशों से अंदर झांका, तो उनके होश उड़ गए. तनविता कार की अगली सीट के नीचे बेसुध पड़ी थी. आनन-फानन में दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला गया और तुरंत जुलुरुपाडु के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक स्थिति गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उसे कोथागुडेम रेफर कर दिया. हालांकि, वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की कि बच्ची की काफी पहले ही मौत हो चुकी है.

गांव में छाया सन्नाटा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

मासूम तनविता श्री की अचानक हुई इस दुखद मौत से पूरे विनोबानगर गांव में शोक और सन्नाटा पसर गया है. माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय प्रशासन ने छोटे बच्चों वाले अभिभावकों से अपील की है कि वे खड़े वाहनों और उनके लॉकिंग सिस्टम को लेकर विशेष सतर्कता बरतें ताकि इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो.

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