नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को हिला दिया है. रासुवा इलाके में ग्लेशियर और चट्टानों के अचानक टूटने से नदी में पानी और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि कई बस्तियां, सड़कें और पुल तबाह हो गए. इस घटना का असर नेपालतिब्बत सीमा से निकलने वाली नदियों के जरिए भारत तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई.

सवाल यह है कि क्या नेपाल की इस तबाही के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बड़ी बाढ़ आने वाली है? फिलहाल नदियों जलस्तर के आंकड़े बताते हैं कि बड़े खतरे के संकेत नहीं दिख रहे हैं, लेकिन दोनों राज्यों में निगरानी बेहद जरूरी है.

गंडक नदी की क्या स्थिति है?

नेपाल की नारायणी नदी भारत में आने के बाद गंडक कहलाती है. इसलिए नेपाल में भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ का सबसे पहले असर गंडक के बहाव पर पड़ सकता है. यही वजह है कि बिहार और यूपी के लिए गंडक सबसे अहम नदियों में से एक है.

  • 27 अगस्त की सुबह बिहार के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गंडक का जलस्तर हाजीपुर में 49.43 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 50.32 मीटर है.
  • रेवाघाट में यह 53.27 मीटर था, जहां खतरे का स्तर 54.41 मीटर है. बगहा में जलस्तर 89.10 मीटर था, जो 89.40 मीटर के खतरे के निशान से सिर्फ 30 सेंटीमीटर नीचे है.
  • फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन बगहा जैसे इलाकों में निगरानी बेहद जरूरी है.वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज भी महत्वपूर्ण है.
  • 27 अगस्त की सुबह इसका डिस्चार्ज करीब 1.04 लाख क्यूसेक था, यह पिछली रात के करीब 1.50 लाख क्यूसेक से कम हुआ है.

कोसी की स्थिति क्या बता रही है?

  • नेपाल से निकलने वाली कोसी नदी बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. नेपाल के चैटारा स्टेशन पर 27 अगस्त को सप्तकोसी का जलस्तर 3.79 मीटर दर्ज किया गया.
  • जबकि वहां खतरे का स्तर 7 मीटर है. यानी इस स्टेशन पर नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है.
  • इसके अलावा कोसी बेसिन की अरुण नदी पर तुर्केघाट में जलस्तर 3.49 मीटर था और सुन्कोसी पर टोक्शेलघाट में 4.24 मीटर.
  • इन आंकड़ों से फिलहाल यह संकेत नहीं मिलता कि नेपाल से आने वाला पानी तत्काल बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ की स्थिति पैदा कर रहा है.

बागमती नदी की क्या स्थिति है?

  • बागमती नदी के सुंदरिजल स्टेशन पर जलस्तर 1.03 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 2.80 मीटर है.
  • खोखना में यह 1.28 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 4 मीटर है.
  • इसी तरह पश्चिमी राप्ती के बागासोती स्टेशन पर जलस्तर 3.15 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 6.20 मीटर है.
  • नारायणी के देवघाट स्टेशन पर जलस्तर 4.91 मीटर था, जबकि खतरे का स्तर 9 मीटर है.

फिर नेपाल की बाढ़ का यूपीबिहार पर असर क्यों पड़ सकता है?

दरअसल, हिमालय से निकलने वाली नदियों का पूरा सिस्टम आपस में जुड़ा हुआ है. नेपाल में अचानक बहुत ज्यादा पानी आने पर उसका एक हिस्सा तेजी से नीचे की ओर बढ़ता है. गंडक का पानी बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुंचता है, जबकि कोसी और बागमती मुख्य रूप से बिहार की ओर आती है. लेकिन नेपाल में आई हर फ्लैश फ्लड का मतलब यह नहीं है कि उसका पूरा पानी सीधे यूपीबिहार में बाढ़ पैदा कर देगा. पानी की मात्रा, बारिश की अवधि, नदी की मौजूदा स्थिति, बैराज का संचालन और नीचे के इलाकों में पहले से मौजूद जलस्तर, इन सभी चीजों पर असर निर्भर करता है.

फिलहाल यूपीबिहार में बाढ़ का खतरा नहीं?

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर यूपीबिहार में तत्काल बड़ी बाढ़ को लेकर घबराने की जरूरत नहीं दिखती, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है.खासकर गंडक के बगहा जैसे इलाकों में जलस्तर खतरे के निशान के काफी करीब है. नेपाल में अगर दोबारा भारी बारिश होती है, नई फ्लैश फ्लड आती है या ऊपर से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे आता है तो स्थिति तेजी से बदल सकती है.

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