अयोध्या में प्रस्तावित मंदिर संग्रहालय निर्माण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस संग्रहालय के निर्माण को मंजूरी दी थी और 650 करोड़ की लागत से इसका निर्माण होना था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा संस ने CSR फंड्स से निर्माण करवाने की पेशकश की थी और इसके लिए सरकार ने जमीन उपलब्ध करवाई थी. अयोध्या के मांझा जामथारा में 52 एकड़ भूमि पर मंदिर संग्रहालय बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसपर रोक लगाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया है.

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश 27 जुलाई 2026 को पारित किया. यह मामला कीर्ति भान पांडेय और छह अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वो अयोध्या के मांझा जामथारा के गाटा संख्या1 और गाटा संख्या57 के वैध भूमिधर हैं. याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने यह जमीन रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिये खरीदी है और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज है.
‘जमीन से बेदखल करने का प्रयास कर रही राज्य सरकार’
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार अयोध्या में संग्रहालय निर्माण के लिए बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए जमीन से बेदखल करने का प्रयास कर रही है, जबकि राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित भूमि नजूल भूमि के रूप में दर्ज है, इसलिए यह सरकारी भूमि है और सरकार को कब्जा हटाने का अधिकार है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 16 जून 2014 के जिस आदेश से भूमि को नजूल घोषित किया गया था, उसे उन्होंने राजस्व परिषद में चुनौती दी है.
सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश
याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि 3 जून 2026 को राजस्व परिषद ने 16 जून 2014 के आदेश के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक नजूल घोषित करने वाले आदेश पर रोक है, तब तक कानूनी प्रक्रिया के बिना याचिकाकर्ताओं को बेदखल नहीं किया जा सकता. अदालत को यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही बेदखली का कोई आदेश पारित किया गया. इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है.
11 सितंबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ताओं को दो हफ्ते के भीतर प्रीजॉइंडर एफिडेविट दाखिल करने की अनुमति दी गई है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी.



