‘वोट बचाओ, देश बचाओ’; अब एक नए आंदोलन की तैयारी में कांग्रेस; क्या-क्या प्लान?

नई दिल्ली; देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सोमवार (05 अक्तूबर) को प्रदेश प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों और अग्रिम संगठनों के प्रमुखों के साथ बैठक कर ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तय की है। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की, जबकि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नारे के साथ वोट चोरी के खिलाफ आक्रामक और देशव्यापी अभियान चलाने का निर्देश दिया हैं। इस अभियान के तहत 10 अक्टूबर से पूरे देश में एक महीने तक कांग्रेस पार्टी आंदोलन चलाएगी।

वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन एक दो दिन का नहीं होगा, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनावी व्यवस्था में सुधार होने तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे ‘चीटिंग कमीशन ऑफ इंडिया’ करार दिया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसद सुबह 10:30 बजे संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। इसके बाद भी कांग्रेस देशभर में आंदोलन जारी रखेगी।

बैठक के बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मंगलवार सुबह INDIA गठबंधन के सभी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से चुनाव आयोग (EC) के दफ्तर तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक विपक्षी गठबंधन की पार्टियां “वोट चोरी” के खिलाफ जिला स्तर पर बैठकें और मार्च करेंगी और कुमार को हटाने की मांग उठाएंगी। 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक, खासकर कांग्रेस इस अभियान के तहत ये मार्च और बैठकें करेगी। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। रमेश ने कहा कि 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक राज्य और जिला स्तर पर “वोट बचाओ, देश बचाओ, CEC हटाओ” रैलियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही, गांव के स्तर पर चौपालें भी आयोजित की जाएंगी। रमेश ने कहा कि इस दौरान उन लोगों तक पहुंचने का अभियान भी चलाया जाएगा जिनके नाम हर बूथ पर वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, और उनके नाम दोबारा जुड़वाने की कोशिश की जाएगी।

AAP-DMK-BJD से अपील
बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में लगातार कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इंडिया गठबंधन के नेता पहले ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। अब कल विपक्षी सांसदों का संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक इस मार्च में इंडिया गठबंधन से नाराज चल रहे राजनीतिक दलों को भी शामिल होने का न्योता दिया गया है, जिसमें आम आदमी पार्टी, डीएमके और बीजेडी शामिल है लेकिन वे इसमें शामिल होंगे या नहीं, इस पर संशय जारी है।

सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ी उम्मीद
कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान के साथ ”विश्वासघात” किया और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में ”अवैध और एकतरफा” बदलाव भी किया।मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के प्रति जनता का विश्वास बहाल करने का सुप्रीम कोर्ट के पास यह ”महत्वपूर्ण अवसर” है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि जो भी फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, उसे रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने अंतिम फैसला आने तक सीईसी ज्ञानेश कुमार को कोई भी फैसला लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।

फॉर्म-6 में ”अवैध और एकतरफा” तरीके से बदलाव
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में ”अवैध और एकतरफा” तरीके से बदलाव किए और यह भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का ”एक और सबूत” है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करना तथा मतपत्र के जरिए चुनाव कराना, ये तीन ऐसी प्रमुख मांगें हैं जिनसे उनकी पार्टी समझौता नहीं करेगी। खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगी दल इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीईसी ने न केवल ”झूठ बोला” बल्कि कानून का उल्लंघन किया और प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर ”संविधान के साथ विश्वासघात” किया। उन्होंने फॉर्म-6 में कथित बदलाव को पूरी तरह बचाव योग्य न होने वाला आचरण करार दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। जबकि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट में कहा था कि फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया है।