जुलाई और अगस्त में कॉर्पोरेट इंडिया ने मेनबोर्ड IPO, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट और ऑफर फॉर सेल के जरिए 1.11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए. घरेलू लिक्विडिटी और निवेशकों के बेहतर होते सेंटीमेंट ने कोर इक्विटी इंडेक्स में सीमित उतारचढ़ाव के बावजूद कैपिटल मार्केट को एक्टिव रखा. दो महीने में फंड जुटाने का यह आंकड़ा अक्टूबरनवंबर 2024 के बाद सबसे ज्यादा है, जब इन तरीकों से 1.14 लाख करोड़ से ज्यादा जुटाए गए थे. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इंडिया इंक ने किस तरीके से कितना पैसा जुटाया है.

आईपीओ और ओएफएस से जुटाया इतना पैसा
IPO एक्टिविटी खास तौर पर मजबूत रही और कुल जुटाए गए फंड का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इसी से आया. इस महीने अब तक 20 कंपनियों ने 20,850 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए हैं, जो जुलाई में 12 कंपनियों द्वारा जुटाए गए 28,650 करोड़ रुपए के अलावा है. लिस्टेड कंपनियों ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट भी बढ़ाए हैं. अगस्त में अब तक चार कंपनियों ने 3,250 करोड़ रुपए जुटाए हैं, जबकि जुलाई में आठ कंपनियों ने 25,114 करोड़ रुपए जुटाए थे. ऑफर फॉर सेल सेगमेंट में, जहां मौजूदा निवेशक आंशिक रूप से अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसा निकालते हैं, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने अगस्त में लगभग 31,447 करोड़ रुपए जुटाए ताकि देश के सबसे बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर में पब्लिक फ्लोट को बढ़ाया जा सके.
उतारचढ़ाव का असर ट्रांजैक्शन पर
एक और बड़ी पब्लिकसेक्टर कंपनी, कोचीन शिपयार्ड ने जुलाई में लगभग 1,705 करोड़ रुपए जुटाए. इक्विरस कैपिटल में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के कोहेड मुनीश अग्रवाल ने कहा कि प्राइमरी मार्केट के लिए इंडेक्स का तेजी से बढ़ना जरूरी नहीं है. इसके लिए लिक्विडिटी, उचित उतारचढ़ाव और अलगअलग कंपनियों में भरोसा जरूरी है. वेस्ट एशिया में युद्ध के तुरंत बाद आए भारी उतारचढ़ाव के दौरान कंपनियों और शेयरधारकों ने ट्रांज़ैक्शन टाल दिए थे. जानकारों का कहना है कि अब वे बेहतर मार्केट का फायदा उठाकर ग्रोथ कैपिटल जुटा रहे हैं, कर्ज कम कर रहे हैं, अधिग्रहण के लिए फंड जुटा रहे हैं, रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं और प्रमोटर्स व प्राइवेटइक्विटी निवेशकों को एग्जिट का मौका दे रहे हैं.
सीमित दायरे में सेंसेक्स और निफ्टी
कैपिटल मार्केट में यह तेजी तब आई है जब बेंचमार्क इंडेक्स सीमित दायरे में ही रहे हैं. जुलाई में सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 2.1 फीसदी और 2.2 फीसदी की बढ़त हुई, लेकिन अगस्त में तेल की कीमतों में इजाफा होने से इनमें क्रमशः 0.5 फीसदी और 0.7 फीसदी की गिरावट आई है. जुलाई में निफ्टी मिडकैप 150 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में क्रमशः 1.6 फीसदी और 1.1 फीसदी की बढ़त हुई और अगस्त में अब तक इनमें क्रमशः 1.2 फीसदी और 2.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अग्रवाल ने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद इक्विटी मार्केट एक दायरे में बने रहे हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इन चुनौतियों में लंबे समय से चल रहा पश्चिम एशिया का संघर्ष, कच्चे तेल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती कॉस्ट, और AI के दौर में IT कंपनियों की कमाई के टिकाऊपन को लेकर चिंताएं शामिल हैं.
एसआईपी निवेश करीब 31,961 करोड़ रुपए
घरेलू संस्थागत और रिटेल निवेश ने विदेशी निवेशकों की उतारचढ़ाव वाली खरीदारी को संतुलित किया है, जिससे बेंचमार्क को सहारा मिला है और कंपनियों को कैपिटल मार्केट से फंड जुटाने का जरूरी भरोसा मिला है. जुलाई में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए रिटेल निवेश लगभग 31,961 करोड़ रुपए रहा, जबकि एक्टिव इक्विटी फंड्स को लगभग 24,700 करोड़ रुपए मिले, जिससे घरेलू संस्थाओं को निवेश के लिए काफी पूंजी मिली. 2026 के व्यापक आंकड़े फंड जुटाने के साइकिल की मजबूती को दर्शाते हैं.



