इमोशन नहीं यह वीएफएक्स वाली ‘रामायण’ है; रावण बनकर छाए यश, कमजोर पड़े रणबीर?

Ramayana Movie Review: बॉलीवुड की मेगा बजट फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ रिलीज हो चुकी है। इसे ‘दंगल’ फेम निर्देशक नितेश तिवारी ने निर्देशित तो किया है पर यह फिल्म पूरी तरह प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा की है। क्यों? इसका जवाब हम इस रिव्यू में देंखे। इसके साथ ही जानिए कि राम के किरदार में रणबीर कपूर, सीता के किरदार में साई पल्लवी और रावण के रोल में यश कैसे लग रहे हैं? तो बिना देर करे पढ़ें यह मूवी रिव्यू…

रामायण पार्ट 1
कलाकार
रणबीर कपूर , यश , साई पल्लवी , रवि दुबे , अरुण गोविल , रकुल प्रीत , लारा दत्ता , विवेक ओबेरॉय और अनुपम खेर (वॉयस ओवर)
लेखक
श्रीधर राघवन, नितेश तिवारी, श्रेयस जैन
निर्देशक
नितेश तिवारी
निर्माता
नमित मल्होत्रा, यश
रिलीज डेट
5 नवंबर 2026

साल 2017 में यह घोषणा हुई थी कि प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा बड़े परदे के लिए ‘रामायण’ बनाने जा रहे हैं। यह एक मेगा बजट फिल्म होगी जिसका उद्देश्य महाकाव्य रामायण और बॉलीवुड की ताकत को दुनिया से रूबरू कराना होगा। बनते-बनते फिल्म से कई नामी और बड़े कलाकार भी जुड़ते गए और फैंस की उम्मीदें भी। फिल्म का बजट 4000 करोड़ हो गया और यह हिंदुस्तान में बनी सबसे महंगी फिल्म भी हो गई। फिल्म से बतौर निर्देशक नितेश तिवारी जुड़े। फिर राम के किरदार में रणबीर कपूर, सीता के किरदार में साई पल्लवी और रावण के किरदार में यश की कास्टिंग हो गई।

फिल्म के ट्रेलर और टीजर को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। एक ओर जहां दर्शक इसकी भव्यता को लेकर उत्साहित वहीं दूसरी ओर मेकर्स इस बात से खुश थे कि उन्हें रामायण पर बनी पिछली भव्य फिल्म ‘आदिपुरुष’ से बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है।

जैसे-जैस रिलीज डेट करीब आती गई एक ओर फिल्म को लेकर क्रेज और उम्मीदें बढ़ती गई तो वहीं दूसरी तरफ कहीं इसे गानों के लिए ट्रोल किया गया तो कहीं जरूरत से ज्यादा वीएफएक्स यूज करने के लिए।

आखिरकार लंबे इंतजार के बाद यह फिल्म रिलीज हुई। इसे देखने के बाद लगा कि शायद यह अपने उस उद्देश्य में तो कामयाब हो जाएगी जहां इसे ग्लोबली पहचान बनानी थी पर दर्शकों के दिल में जगह बनाने में इसे थोड़ी मुश्किल आ सकती है। खैर अब चलिए बिना देर करिए आपको बताते हैं कि नमित मल्होत्रा की इस रामायण के पहले भाग का कौन सा तीर निशाने पर लगा और कौन सा चूक गया।

यह फिल्म शुरू होती अनुपम खेर की आवाज से। अनुपम खेर ने पक्षीराज जटायु को फिल्म में अपनी आवाज दी है। वह बताते हैं कि यह कहानी आज की नहीं सदियों पुरानी है जब देवाें और असुरों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। तब देवराज इंद्र ने असुरों को हराकर लंका का राज कुबेर को सौंप दिया था। इसके बाद लंका में राक्षस कुल धरातल के नीचे दरिद्र जीवन जीने पर विवश हो गया था। तब महारानी कैकसी ने अपने पुत्र दशानन को अपना राज्य वापस पाने के लिए प्रेरित किया।

मां की बात सुनकर दशानन ने ऐसी भीषण तपस्या की कि पृथ्वी उसके ताप से जलने लगी और भगवान ब्रह्मा को प्रकट होना पड़ा। दशानन ने उनसे अमरता का वरदान मांगा पर अहंकार में वह यह मांगना भूल गया कि उसे कोई मनुष्य ना मार सके।

वरदान पाकर दशानन से सबसे पहले कुबेर से अपनी लंका वापस छीनी और फिर तीनों लोकों का स्वामी बन गया। उसके बढ़ते अत्याचारों को देखकर भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया और फिर वही सब हुआ जो बचपन से लेकर अब तक ‘रामायण’ पर बने टीवी शोज और फिल्मों में देखते आए हैं।

किरदार हैं पर इमोशंस गायब
फिल्म के शुरुआती 40 मिनट में रावण, उसके बदले और उसकी ताकत दिखाई जाती है। यह सब कुछ बतौर दर्शक आपके लिए काफी नया है और इसे जिस तरीके से पेश किया गया है वह देखने में बहुत मजा आता है। जिन चीजों की आपने आज तक कल्पना की हो उनको विजुअली इतना खूबसूरत देखने पर आप चकित रह जाएंगे। देवराज इंद्र का उड़ता हुआ ऐरावत, समंदर की गहराई में भगवान विष्णु के दर्शन, रावण की तपस्या के ताप से जलती हुई पृथ्वी… यह सब विजुअली आपको मोह लेगे। पर एक ओर जहां विजुअली इतनी मेहनत की गई वहीं दूसरी ओर रावण का देवों के साथ हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट, असुरों की सेना में वीएफएक्स से बने राक्षस और कुछ दृश्यों में रावण का एट्टीट्यूड खटकता है।
रावण के लंकापति बन जाने के बाद कहानी अयोध्या रुख करती है और फिर प्रभु श्रीराम के जन्म से लेकर उनके वनवास जाने तक के प्रसंग अगले एक घंटे में पेश किए जाते हैं। यहां भी जाे काम वीएफएक्स से किया गया है वह खूबसूरत दिखता है। आयोध्या की खूबसूरती, वन में राक्षसों से युद्ध, सीता स्वयंवर से लेकर वनवास प्रस्थान तक हर जगह जहां बाहर की दुनिया पेश की गई है वो कमाल है। पर जैसे ही किसी सीन में सारा दारोमदार अभिनय पर आता है, फिल्म लड़खड़ाती है। राम के जन्म से लेकर उनके वनवास जाने तक के प्रसंग इतनी तेजी में दिखाए गए हैं कि आप ना तो राम के किरदार से जुड़ाव महसूस कर पाते हैं ना सीता के। ऐसे में राम और सीता के बीच संवाद वाले दृश्य बनावटी लगते हैं।

इसी तरह रावण की लंका में भव्यता तो है पर किरदार कहीं नहीं। पूरी फिल्म में मंदोदरी बनीं काजल अग्र

वाल का सिर्फ एक डायलॉग है। पूरी लंका में सिर्फ रावण, शूर्पणखा और उसके पति विद्युतजिह्वा तीन ही किरदारों को अभिनय दिखाने का मौका मिला है। बाकी सब काम तो वीएफएक्स ने कर दिया।

अभिनय में यश और अरुण गोविल अव्वल
फिल्म के सबसे अहम पहलू अभिनय की बात करें तो इसमें यश सबसे आगे रहेंगे। यकीनन फिल्म उनके इर्द-गिर्द ज्यादा बुनी गई है। वहीं, अयोध्या नरेश राजा दशरथ के किरदार में जाे इमोशंस अरुण गोविल ने पेश किए हैं वह पूरी फिल्म में कोई और नहीं कर पाया। उन्होंने यह साबित किया कि वीएफएक्स के जमाने में भी अभिनय कितना अहम है।

यश: रावण का किरदार समझना आसान नहीं पर यश ने यहां भी जी-तोड़ मेहनत की है। रावण का अहंकार उनके अभिनय में झलकता है पर जहां बात एक्शन की आती है तो रावण को हैंड टू हैंड कॉम्बैट करते देखकर ऐसा लगत है जैसे यश की कोई एक्शन फिल्म देख रहे हों। बाकी सबसे अच्छी बात यह रही कि मेकर्स ने उनकी आवाज को ‘बाहुबली’ को आवाज देने वाले कलाकार शरद केलकर से डब करवाया। शरद ने यहां यश का आधे से ज्यादा की जिम्मेदारी अच्छे से संभाल ली।

रणबीर कपूर: पूरी फिल्म में रणबीर यह कोशिश करते दिखे कि वह शालीन लगें। राम की तरह धीमे बात करें पर इस पूरी कोशिश में वह स्क्रीन पर घबराये से नजर आए। कहीं दृश्यों में नोटिस करेंगे तो वह वाकई कांपते दिखे। हरे परदे पर फिल्माए गए एक्शन सीन में वह अच्छे हैं। जटायु के साथ संवाद वाले सीन में उनके इमोशंस निखकर आए पर बाकी जगहों पर ना तो उनको बड़े संवाद दिए गए और ना ही उनके किरदार को उतना ग्लोरिफाई किया गया, जितना रावण को किया गया। दूसरी तरफ परशुराम के किरदार में उन्होंने अपनी आवाज तो बदल ली पर वो वजन नहीं ला पाए।

साई पल्लवी: ट्रेलर में कुछ सीन देखकर लगा था कि फिल्म में सीता के भी बचपन की कहानी या उनकी युवावस्था से जुड़े प्रसंग दिखाए जाएंगे पर फिल्म में ऐसा कुछ नहीं। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। फिल्म में सीता और राम बने साई और रणबीर के आपसी संवाद के बमुश्किल तीन दृश्य हैं। ऐसे में आप ही बताएं कि कैसे कोई दोनों की केमिस्ट्री जज कर पाएगा? बहरहाल, साई फिल्म में एक्शन करती भी नजर आईं और उन्होंने इस किरदार को ठीक-ठाक निभा लिया।

रवि दुबे: फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी लगे। अपने तीरों से ज्यादा तेज गति से इन्होंने अपने डायलॉग बोले हैं। रवि को देखकर कहीं से महसूस नहीं हो रहा था कि वह त्रेता युग का किरदार निभा रहे हैं। इस मामले में रवि से ज्यादा उनके डायलॉग लिखने वाले को दोषी मानता हूं। उन्होंने लक्ष्मण के किरदार के लिए बड़े ही हल्के डायलॉग लिखे। माना कि लक्ष्मण जल्दी क्रोधित हो जाते थे पर वह शालीन थे, बद्तमीज नहीं। अगर रवि रामानंद सागर की ‘रामायण’ से सुनील लहरी का काम थोड़ा भी देख लेते तो वह समझ जाते कि उनके किरदार में कहां दिक्कत आ रही है।

अरुण गोविल: चूंकि अरुण गोविल अपने जीवन का एक अहम भाग पहले ही रामायण के दो चुके हैं, ऐसे में दशरथ के किरदार में उनकी कास्टिंग सबसे बेहतरीन लगी। इसका श्रेय मुकेश छाबड़ा को भी जाना चाहिए।
अरुण पूरी फिल्म में सबसे बेहतरीन तरीके से डायलॉग बोलते नजर आए। परदे पर हर तरह इमोशन भी उनका ही नजर आया और उनके ही किरदार से आप जुड़ाव भी महसूस कर पाते हैं।

रकुल प्रीत: शूर्पणखा के किरदार में रकुल को लंबे समय के बाद अपना अभिनय दिखाने का मौका मिला। उन्होंने इसे बखूबी निभाया भी। अन्य कलाकारों में कैकेयी बनीं लारा दत्ता, विद्युतजिह्वा बने विवेक ओबेरॉय, इंद्र के किरदार में कुणाल कपूर और मंथरा बनीं शीबा चड्ढा का काम बढ़िया है। जटायु की मात्र आवाज देकर ही अनुपम खेर ने उनका एक दृश्य कमाल बना दिया।

कहां चूके निर्देशक?
चूंकि फिल्म का 80% प्रतिशत भाग वीएफएक्स पर निर्भर करता है तो सोचने में वक्त लगा कि यहां निर्देशक नितेश तिवारी के हाथों में क्या होगा? नितेश यहां फिल्म के कई दृश्यों को काटकर इसका इमोशनल स्पेस बढ़ा सकते थे। लक्ष्मण के किरदार को बेहतर बना सकते थे। लोग इस फिल्म का काफी वक्त से इंतजार कर रहे थे, एडिटिंग टेबल पर इसे और बेहतर किया जा सकता था। अगर कुछ अच्छे दृश्य और होते तो इसकी लंबाई थोड़ी बढ़ाई भी जा सकती थी। हालांकि, नितेश की तारीफ करनी होगी कि एक-दाे सीन छोड़कर उन्होंने फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं दिखाया।

वीएफएक्स ने कर दिखाया अपना काम
रामायण की रिलीज से पहले ही मेकर्स ने यह साफ कर दिया था कि व ह इस फिल्म काे दुनियाभर के दर्शकों के लिए बना रहे हैं। यह काम फिल्म के वीएफएक्स ने तो कर दिखाया।
लंका, अयोध्या, वन और वॉर सीक्वेंस के कई सीन भव्य हैं। जटायु और रावण के बीच युद्ध का दृश्य बेमिसाल है। देवताओं और असुरों के बीच हुए युद्ध को भी बड़ी ही खूबसूरती से पेश किया गया है। इनमें कहीं कोई कमी नहीं है। बहरहाल, अपनी कंपनी के वीएफएक्स के जरिए प्रोड्यूस नमित मल्होत्रा ने विदेशी ऑडियंस के लिए फिल्म का स्केल तो लार्ज बना दिया पर अपनी ऑडियंस के लिए इमोशनल कनेक्ट जोड़ना वह भूल गए।

कहां गया रहमान और हैंस जिमर का जादू?
फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक बहुत खास नहीं। रहमान और हैंस जिमर जैसे कलाकारों से जो उम्मीद थी, उसके मुताबिक तो कतई नहीं। सिर्फ एक ही थीम है जो थोड़ी ठीक लगती है। गाना भी दाे हैं जो याद नहीं रहते।

क्या कमाल?
जटायु और रावण के बीच जो एक्शन सीन है, वह इस फिल्म का सबसे बेहतरीन सीन है। इससे दूसरे भाग में और बेहतर एक्शन देखने की उम्मीद जागती है।
फिल्म के एक एक्शन सीन में सीत को भी युद्ध करते दिखाया है। यह भी देखने लायक है।
एक दृश्य में दशानन अपने दस सिर से वार्तालाप करते नजर आया। इसे विजुअली बेहद दमदार बनाया गया है। इसमें यश ने कमाल का अभिनय किया है।
जटायु के निधन के बाद जब उनका राम से संवाद वाला दृश्य है। यह भी बेहद मार्मिक है। इस सीन में अनुपम खेर ने सिर्फ अपने वॉयस ओवर से ही जान फूंक दी है।

फिल्म के एक सीन में लक्ष्मण अपने पिता के सामने माता कैकेयी को मारने के लिए तलवार निकाल लेते हैं। यह सुनने में कम और देखने में आपको ज्यादा अजीब लगेगा।
रणबीर अपने कई दृश्यों में कांपते नजर आए। वह एक सीन में परशुराम बने हैं, यह प्रयास अच्छा है पर कुछ अटपटा सा लगता है।
रावण को छोड़कर किसी अन्य किरदार को डेवलप होने और दर्शकों के साथ उसके इमोशंस जुड़ने का वक्त ही नहीं मिला।
रणबीर कपूर और साई पल्लवी के बीच कोई केमिस्ट्री नहीं दिखती।

देखें या नहीं?
अगर वीएफएक्स वाली भव्य रामायण देखना चाहते हैं तो जरूर जाएं। फिल्म में काफी कुछ नया है। यह आपको बोर तो नहीं करेगी पर कमियां इसमें भी हैं। एक्शन और वीएफएक्स से बनी एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं तो थिएटर जा सकते हैं। वहीं अगर इमोशंस वाली रामायण देखना हो तो रामानंद सागर का टीवी शो देख सकते हैं।
बाकी तो रामायण की कहानी लगभग हर किसी ने कभी न कभी देखी या सुनी है फिर भी इसे दोबारा देखने का मन करता है। इसकी वजह है लोगों का इससे जुड़ाव। राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण जैसे किरदार लोगों के मन में बसे हुए हैं। हर कोई इन्हें एक बार फिर नए अंदाज में देखना चाहता है। कुछ लोग बचपन की यादें ताजा करने जाएंगे तो कुछ अपने परिवार के साथ इस कहानी को बड़े पर्दे पर देखना चाहेंगे। यही ‘रामायण’ की खासियत है कि कहानी सबको पता है, लेकिन फिर भी इसे देखने की दिलचस्पी बनी रहती है।