
परीक्षा के दौरान हर तरह के स्टूडेंट देखने को मिलते हैं। कुछ छात्र पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने पहुंचते हैं और पूछे गए सवाल का सटीक जवाब लिखते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनकी तैयारी बिल्कुल नहीं होती। ऐसे में जब उन्हें किसी सवाल का जवाब नहीं आता तो वे अपनी आंसरशीट में कुछ ऐसा लिख देते हैं, जिसे पढ़कर शिक्षक भी हैरान रह जाते हैं।
कई बार स्टूडेंट्स सवाल का जवाब देने के बजाय शिक्षक से भावनात्मक अपील करने लगते हैं। उदाहरण के तौर पर कोई छात्र लिख सकता है- ‘सर प्लीज मुझे पास कर दीजिए, मेरी शादी होने वाली है।’ यानी पढ़ाई से ज्यादा उसे अपनी शादी की चिंता होती है।
कुछ छात्र तो आंसरशीट को परीक्षा की कॉपी कम और रचनात्मक लेखन की कॉपी ज्यादा बना देते हैं। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। सवाल का जवाब नहीं आने पर कोई गाना लिख देता है, कोई शायरी या गजल लिखने लगता है तो कोई पूरी कहानी ही शुरू कर देता है। कुछ छात्र तो सवाल से बिल्कुल अलग विषय पर अपने मन की बातें लिखकर शिक्षक को भावुक करने की कोशिश करते हैं।
सवाल का जवाब नहीं आया तो शुरू हो जाती है कहानी
कल्पना कीजिए कि परीक्षा में केमिस्ट्री का कोई कठिन सवाल आ गया और छात्र को उसका उत्तर नहीं आता। ऐसे में वह कई बार खाली कॉपी छोड़ने के बजाय अपनी तरफ से कुछ भी लिखना शुरू कर देता है। कभी वह शिक्षक से पास करने की गुजारिश करता है तो कभी अपनी मजबूरी बताने लगता है।
किसी आंसरशीट में लिखा मिल सकता है- ‘सर, इस बार पास कर दीजिए, अगली बार पूरी तैयारी करके आऊंगा।’ वहीं कोई छात्र लिख सकता है कि घरवालों को उससे बहुत उम्मीदें हैं, इसलिए उसे कुछ नंबर दे दिए जाएं।
गाने और शायरी भी बन जाते हैं सहारा
जिन छात्रों को सवाल का उत्तर नहीं पता होता, उनमें कुछ अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करने लगते हैं। कोई लोकप्रिय गाने की लाइनें लिख देता है, तो कोई शायरी शुरू कर देता है। कुछ छात्र तो उत्तर की जगह ऐसी कहानी लिख देते हैं जिसका परीक्षा में पूछे गए सवाल से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता।
ऐसे जवाब भले ही नंबर दिलाने में काम न आएं, लेकिन शिक्षक के लिए इन्हें पढ़ना जरूर दिलचस्प अनुभव बन सकता है।
‘सर बस पास कर दीजिए’ वाली अपील
परीक्षा में कम तैयारी वाले छात्रों की सबसे आम कोशिश होती है कि वे शिक्षक से भावनात्मक अपील करके कुछ नंबर हासिल कर लें। कोई अपनी शादी का हवाला देता है, कोई परिवार की उम्मीदों का, तो कोई अगली कक्षा में जाने की मजबूरी बताता है।
हालांकि, केवल ऐसी बातें लिख देने से परीक्षा में नंबर मिलना तय नहीं होता। शिक्षक को उत्तर की गुणवत्ता और सही जानकारी के आधार पर ही अंक देने होते हैं।
इसलिए परीक्षा में मजेदार बातें लिखने के बजाय सवालों की अच्छी तैयारी करना ही सबसे बेहतर तरीका है। क्योंकि आंसरशीट में कहानी, गाना या भावनात्मक अपील लिखने से कॉपी पढ़ने वाले शिक्षक मुस्कुरा जरूर सकते हैं, लेकिन नंबर मिलना जरूरी नहीं है।
क्या आपने भी कभी परीक्षा में सवाल का जवाब न आने पर कुछ मजेदार लिखा है? अपना अनुभव कमेंट में जरूर बताइए।



