अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने वित्त वर्ष 202627 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है. इससे पहले बैंक ने 6.1% की वृद्धि का अनुमान लगाया था. उसका कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत की अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिलेगा फायदा
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट ‘India: Improved Macro Outlook after the USIran Deal’ के मुताबिक, अमेरिकाईरान समझौते के बाद वैश्विक तेल बाजार में दबाव कम हुआ है. पहले इजरायलअमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने का खतरा था, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से देश के 60% से ज्यादा ऊर्जा आयात होते हैं. ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.
महंगाई का अनुमान भी घटाया
रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और यूरिया जैसी कमोडिटी की कीमतें घटने से महंगाई पर भी दबाव कम होगा. इसी वजह से गोल्डमैन सैक्स ने भारत में खुदरा महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है.
बैंक का मानना है कि वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में आई गिरावट से सरकार का खाद सब्सिडी पर खर्च भी कम हो सकता है. इससे सरकार के वित्तीय दबाव में राहत मिलेगी और राजकोषीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी.
मौसम बना रह सकता है चुनौती
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं और भारतीय मौसम विभाग द्वारा जताई गई हीटवेव की आशंका ग्रामीण क्षेत्रों में खपत को प्रभावित कर सकती है. लेकिन तीसरी तिमाही के बाद मांग में सुधार की उम्मीद जताई गई है, क्योंकि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं दिख रही.
ब्याज दरों पर क्या है अनुमान?
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक 2026 में दो चरणों में कुल 50 बेसिस प्वाइंट तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. हालांकि, यदि पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है और इसका असर महंगाई पर सीमित रहता है, तो आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला कुछ समय के लिए टाल भी सकता है. कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से भारत के लिए आर्थिक माहौल पहले के मुकाबले अधिक सकारात्मक नजर आ रहा है.



