IT stocks selloff Indian market : भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद निराशाजनक और बिकवाली के भारी दबाव वाला साबित हुआ, जिसने निवेशकों की धारणा को झकझोर कर रख दिया है। वैश्विक आईटी दिग्गज कंपनी एक्सेंचर के कमजोर बिक्री अनुमान और निराशाजनक आउटलुक के कारण आईटी सेक्टर में अचानक शुरू हुई आक्रामक बिकवाली ने घरेलू बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। इस वैश्विक झटके का असर भारतीय बाजारों पर इतना गहरा पड़ा कि कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 608 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 76,802.90 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी बिकवाली के इस तूफान से खुद को बचा नहीं पाया और 155 अंक यानी 0.64 प्रतिशत टूटकर 24,013.10 के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार में आई इस गिरावट के तकनीकी और परिचालन से जुड़े आंकड़ों का बारीक विश्लेषण करें तो साफ होता है कि यह मंदी पूरी तरह से दिग्गज टेक कंपनियों द्वारा संचालित थी। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही मंचों पर सबसे ज्यादा मार आईटी इंडेक्स पर पड़ी, जहां इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिर पड़े। इसके अलावा गैरआईटी क्षेत्र से महिंद्रा एंड महिंद्रा और बैंकिंग दिग्गज एचडीएफसी बैंक में दर्ज की गई गिरावट ने बाजार के मनोबल को और ज्यादा कमजोर करने का काम किया। हालांकि, इस चौतरफा मंदी के बीच व्यापक बाजार ने कुछ हद तक अपनी स्थिति को संभाले रखा, जिसके परिणामस्वरूप निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.42 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जिससे छोटे निवेशकों को थोड़ी राहत जरूर मिली।
यदि विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों और सेक्टोरल प्रदर्शन की आधिकारिक स्थिति देखें तो बाजार में गिरावट का रुख काफी व्यापक था। सेक्टोरल आधार पर जहां निफ्टी आईटी सबसे बड़े नुकसान में रहा, वहीं रियल्टी, ऑटो और ऑयल एंड गैस जैसे प्रमुख सेक्टर्स भी पूरे कारोबारी सत्र के दौरान भारी दबाव में नजर आए। इसके विपरीत, स्वास्थ्य और रक्षात्मक निवेश के रूप में देखे जाने वाले निफ्टी फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जिसने बाजार को और गहरे गर्त में जाने से रोकने में एक रक्षक की भूमिका निभाई। तकनीकी विश्लेषकों और बाजार के आधिकारिक जानकारों के अनुसार, निफ्टी के लिए वर्तमान में 24,100 से 24,200 का स्तर सबसे बड़ा रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध बना हुआ है। यदि आने वाले दिनों में इंडेक्स इस स्तर के पार मजबूती से कदम बढ़ाता है, तभी बाजार में एक नई तेजी की उम्मीद की जा सकती है, जो सूचकांक को 24,400 के स्तर तक ले जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के विधिक और तकनीकी दायरे को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अब निवेशकों की नजरें बाजार के सबसे अहम सपोर्ट लेवल्स पर टिकी हैं। गिरावट के मौजूदा परिदृश्य में 23,900 का स्तर निफ्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक सपोर्ट माना जा रहा है। आने वाले सत्रों में बाजार की रिकवरी और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इंडेक्स का इस स्तर से ऊपर बने रहना बेहद अनिवार्य होगा। कुल मिलाकर, वैश्विक आईटी बाजार से मिले इन कमजोर संकेतों ने घरेलू तकनीकी उद्योग के सामने एक अल्पकालिक बजटीय चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले सप्ताह में दलाल स्ट्रीट की दिशा पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय आईटी कंपनियां इस वैश्विक मंदी का सामना किस तरह करती हैं, जो भारतीय शेयर बाजार की भविष्य की चाल और निवेशकों के भरोसे को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।



