आज यानी 29 जून, सोमवार को वट पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। हिदू धर्म में वट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व है। जैसा कि ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत किया जाता है और दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर देश के कई हिस्सों में व्रत करने का विधान होता है।
इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास लगने से महिलाओं को इस व्रत का काफी इंतजार करना पड़ा। खासकर इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है और व्रत दौरान महिलाओं को महत्वपूर्ण नियमों का पलान जरुर करना चाहिए। आइए आपको बताते हैं वट पूर्णिमा व्रत पूजा की विधि और नियम।
वट पूर्णिमा व्रत 2026 पूजा विधि
इस दिन जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद नए लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
  वट पूर्णिमा व्रत पर महिलाओं को 16 श्रृंगार जरुर करना चाहिए।  
  वही, इस व्रत के लिए बांस की टोकरी में सात अलगअलग प्रकार के अनाज रखें और उसे किसी साफ वस्त्र से ढक दें।
  वट पूर्णिमा पर वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा की जाती है। माना जाता है कि पूजन सामग्री को वट वृक्ष के पास ले जाना चाहिए।
  वट वृक्ष के नीचे, देवी सावित्री और सत्यवान की पूजा विधिविधान से करें।
  इसके बाद वट वृक्ष पर जल चढ़ाए और आखिर में कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। अब फूल, फल, रोली, दीपक सभी सामग्री के साथ विधिवत रुप से पूजा करें। इसके साथ ही कच्चा सूत लपेटते हुए वट वृक्ष की परिक्रमा करें।
  सुहागिन महिलाओं को वट सावित्री व्रत की कथा जरुर सुने और फिर दान और दक्षिणा करें।
  भोग में आप चना और गुड़ चढ़ाएं और साथ ही वट वृक्ष पर सुहाग सामान अर्पित करें। इसके बाद पति के पैर स्पर्श करें और उन्हें प्रसाद देना चाहिए। इसके साथ ही बांस के पंखे से हवा करने का भी खास महत्व होता है।
वट पूर्णिमा व्रत में क्या करें?
  इस दिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार जरुर करना चाहिए। इसके साथ ही सुहाग की सामग्री को पूजा के दौरान जरुर अर्पित करें।
  वहीं, इस व्रत का पारण महिलाओं को चने खाकर ही करना चाहिए। इसलिए पहले ही चने को पानी में भिगोकर रख सकते हैं।
  ध्यान रखें कि पूजा में चढ़ाई गई सुहाग की सामग्री अपने परिवार की महिला को ही देनी चाहिए। इसे आप अपनी ननद, सास या किसी सुहागिन महिला को भेंट करें।
  वट वृक्ष की पूजा के दौरान कच्चे सूत के साथ 5, 7, 11, 21 या 51 बार परिक्रमा जरुर करें। अगर संभव हो तो आप 108 बार वृक्ष की परिक्रमा कर सकते हैं।
क्या नहीं करना वट पूर्णिमा व्रत में?
  इस व्रत में महिलाओं के मन में किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचान नहीं आने चाहिए। इसके साथ ही, बहस और विवादों से दूर रहे हैं।
  व्रत के समय अपने पति के साथ बहस न करें और न ही क्रोध की भावना मन में नहीं लानी चाहिए।
  इस दिन सुहागिन महिलाएं को नीले, काले और सफेद रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए।
  अगर आप वट सावित्री व्रत की कथा सुन रहे हैं, तो भूलकर भी बीच में उठकर नहीं जाना चाहिए। अपने स्थान पर बैठें रहे और पूरी कथा सुनें और बाद में ही वहां से उठें।