नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई, दुनिया भर में अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए विदेशों में रहने वाले भारतीयों का इस्तेमाल करना चाहती है. इसका मकसद यूपीआई को देशों के बीच ट्रांजेक्शन का पसंदीदा जरिया बनाना है. NPCI के CEO दिलीप असबे ने कहा कि क्या अगले 10 सालों में 1520 बाजारों में पहुंचना मुमकिन है? मुझे लगता है कि यह बाजार में उतरने का एक बहुत अच्छा तरीका है. NPCI ने ही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस बनाया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत घरेलू पेमेंट के मामले में आत्मनिर्भर है, उसी तरह हम क्रॉसबॉर्डर पेमेंट के मामले में भी आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं.

असबे ने बताया कि NPCI जापान, मलेशिया और बहरीन जैसे देशों के साथ बातचीत कर रही है. उन्होंने कहा कि जियोपॉलिटिकल और रेगुलेटरी वजहों से अंतिम फ़ैसला वहां की सरकारों और सेंट्रल बैंकों का होगा. असबे ने यह भी बताया कि NPCI, OpenAI के ChatGPT और Alphabet Inc. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। के Gemini जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पेमेंट करने के लिए ‘एजेंटिक AI’ पर भी काम कर रही है.
यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा आरटीपीएस
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के मुताबिक, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियलटाइम पेमेंट सिस्टम है. इसने भारत में रोजमर्रा के पेमेंट के तरीके को बदल दिया है. यूजर्स मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके बैंक अकाउंट के बीच तुरंत पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं और कई ट्रांजैक्शन के लिए उन्हें कार्ड नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती. NPCI अब UPI को विदेशी पेमेंट सिस्टम से जोड़कर विदेशों में भी वैसी ही कामयाबी हासिल करना चाहती है. शुरुआत में उन देशों पर ध्यान दिया जाएगा जहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और जहां से दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस आता है. भारत में Google Pay और PhonePe जैसे ऐप्स पेमेंट प्रोसेस करने के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, जबकि Apple Pay अभी घरेलू पेमेंट के लिए लॉन्च नहीं हुआ है.
3.5 करोड़ भारतीयों पर फोकस
NPCI की रणनीति का मकसद विदेशों में रहने वाले 3.5 करोड़ भारतीयों तक पहुंचना है. मार्च में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में इन्होंने 155 अरब डॉलर से ज्यादा रेमिटेंस भेजा, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. बाजार में मुश्किल समय के दौरान, विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने खास डिपॉजिट स्कीम के जरिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में भी मदद की है. असबे ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ेगी, यात्रा बढ़ेगी और व्यापार भी बढ़ेगा.
विदेशों में कारोबार बढ़ाने की यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब देश में UPI का बिजनेस मॉडल बदल रहा है. गुरुवार को भारत की संसद के निचले सदन ने एक कानून को मंजूरी दी, जिससे बैंक और दूसरे पेमेंट प्रोवाइडर UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगा सकेंगे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X पर एक पोस्ट में कहा कि NPCI ने अभी तक किसी भी चार्ज के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है. NPCI के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
इन देशों पर एनसीपीआई का फोकस
अस्बे ने कहा कि यह विस्तार सिंगापुर, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात सहित 9 देशों में UPI की मौजूदगी को और बढ़ाएगा. UPI अभी सिंगापुर और नेपाल के लिए पर्सनटूपर्सन रेमिटेंस की सुविधा देता है, जबकि ग्रीस से इनवर्ड रेमिटेंस की सुविधा उपलब्ध है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और बैंकों द्वारा स्थापित NPCI देश के रिटेल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाता है. UPI के अलावा, यह RuPay कार्ड नेटवर्क भी चलाता है, जो Visa Inc. और Mastercard Inc. का घरेलू विकल्प है.
NPCI विकासशील देशों जैसे नामीबिया, पेरू और त्रिनिदाद और टोबैगो को भी यह टेक्नोलॉजी एक ‘पब्लिक गुड’ के तौर पर दे रहा है, ताकि वे ऐसा ही सिस्टम बना सकें और चला सकें. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब देश अपने पेमेंट सिस्टम पर ज़्यादा कंट्रोल चाहते हैं, क्योंकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों ने रूस को SWIFT फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम से अलग कर दिया है और उसके विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा फ्रीज कर दिया है. अस्बे ने कहा कि कोई भी सरकार पेमेंट सिस्टम जैसे अहम कामों के लिए बहुत ज़्यादा निर्भरता नहीं चाहेगी. पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया गया है.



