हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनको विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। माना जाता है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा करता है, उसको सुखसमृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और धन का देवता भी माना जाता है। वैसे को भगवान गणेश को खुश करने के तमाम उपायों के बारे में जानकारी मिलती है। लेकिन मंत्र जाप और स्त्रोतम का पाठ करने से गणपति बप्पा जल्दी प्रसन्न होते हैं।
गणेश स्त्रोतम एक शक्तिशाली पाठ है, जो भक्तों को सुख और सुरक्षा प्रदान करता है। गणेश स्त्रोतम का हर श्लोक उनके गुणों का गुणगान करता है। जैसे कि उनकी करुणा, ज्ञान, शक्ति और विघ्नहर्ता के रूप में अहम भूमिका हो। जो भी भक्त इस स्त्रोतम का भक्तिपूर्वक पाठ करता है, उसका शरीर, मन और आत्मा तीनों संतुलित हो जाते हैं।

गणेश स्तोत्रम
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम्।
भक्तवासं स्मेर् नित्यमयः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुदं च एकदंत द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिघत्क्षं गजवत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं पीड़ितमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंज्ञन्यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
शिष्यं लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी पुत्रं विनायकम् !
भक्तवसं स्मरेत्रित्यमायुः काम अर्थ सिद्धये..!!
प्रथमं वक्रतुंडं च, एकदंतं द्वितीयकम् !
तृतीयं कृष्ण पिंगक्षम, गजवक्त्रम चतुर्थकम्..!!
लम्बोदरं पंचमं च, षष्ठं विकटमेव च !
सप्तमं विज्ञानराजं च, धूम्रवर्णं तथाष्टमम्..!!
नवमं भालचन्द्रं च, दशमं तु विनायकम् ! ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है।
एकादशम गणपतिम्, द्वादशम तु गजानन..!!
द्वादसैथानि नामानि, त्रिसंध्यम् यः पथेनरा !
न च विघ्न भयं तस्य, सर्वसिद्धि करं परम..!!
विधार्थी लभते विद्ध्यम्, दानार्थी लभते धनम् !
पुत्रार्थी लभते पुत्रन्, मोक्षार्थी लभते गतेम्..!!
जपेत गणपति स्तोत्रं, षडभिर्मसै फलं लभेत्!
संवत्सरेण सिद्धिं च, लभते नात्र संशयः..!!
अष्टाभ्यो ब्रह्मोयश्र लिखित्वा यः समर्पयेत् !
तस्य विद्या भवेत्सर्व गणेशस्य प्रसादतः..!!
!!..इति श्री नारद पुराणे संकट नाशनम् गणेश स्तोत्रम् सम्पूर्णम्..!!
पूजाविधि
धार्मिक शास्त्रों में बुधवाक का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इसलिए बुधवार को शांत जगह ढूंढे, पूर्व दिशा की ओर मुंह करके फर्श पर बैठें और मंत्रों का जाप शुरू करें।
बप्पा के मंत्रों का उच्चारण करने से पहले एक वेदी की स्थापना करें। उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखकर देसी घी का दीपक जलाएं।
भक्त भगवान गणेश को उनकी प्रिय दूर्वा घास की 21 पत्तियां जरूर अर्पित करें।
अपनी सुविधा के मुताबिक आप 1, 3, 5, 7, 11 या 21 बार गणेश स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं।
लाभ
गणेश स्त्रोतम का पाठ करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
अगर आप बुधवार को पूरी श्रद्धा के साथ गणेश स्त्रोतम का पाठ करते हैं, तो नौकरी मिलने में सहायता मिलती है।
जिन भी लोगों को अपने पेशेवर जीवन में किसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनको इसका पाठ जरूर करना चाहिए।
पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स अपने प्रदर्शन में सुधार की इच्छा रखते हैं, तो बुधवार के दिन कम से कम एक बार इसका पाठ जरूर करना चाहिए।



