एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला इन दिनों विवादों में हैं. वे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा से प्रेरित गाउन पहनकर मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 कार्यक्रम में जज की भूमिका में शामिल हुईं. गुलाबी शहर जयपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल उर्वशी ने कहा कि इस ड्रेस को तैयार करने में उनके डिजायनर को तीन महीने लगे. उन्होंने यह भी कहा कि इसे पहनकर वे बेहतर महसूस कर रही हैं. इसके वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरहतरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

अब सवाल उठता है कि क्या तिरंगे से बनी ड्रेस पहनी जा सकती है? तिरंगे के साथ क्याक्या नहीं कर सकते? आइए, उर्वशी ड्रेस विवाद के बहाने इससे जुड़े नियमकानून जानते हैं.
तिरंगे के लिए है कानून
भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा प्रत्येक नागरिक के लिए संप्रभुता, गौरव, त्याग और राष्ट्रीय एकता का सर्वोच्च प्रतीक है. राष्ट्रीय पर्वों जैसे 15 अगस्त और 26 जनवरी पर देशवासियों में देशभक्ति की प्रबल भावना देखने को मिलती है. कई बार नागरिक अपनी इस भावना को प्रकट करने के लिए तिरंगे के रंगों वाले कपड़े पहनते हैं, चेहरे पर रंग लगाते हैं या तिरंगे के प्रिंट वाले परिधान पहनना पसंद करते हैं. हालांकि, देशभक्ति की इस अभिव्यक्ति के बीच यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि भारतीय कानून और राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुसार क्या वैध है और क्या राष्ट्रध्वज का अपमान माना जाता है? भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग, प्रदर्शन और सम्मान की रक्षा के लिए भारत सरकार ने विशेष कानून और नियमावली बनाई है. इनमें प्रमुख रूप से राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 और भारतीय ध्वज संहिता, 2002 शामिल हैं.
Urvashi Rautela In Tiranga gown at Miss Universe India Finale
It should be allowed? pic.twitter.com/3uw1zTBzF8
— Lala August 24, 2026
क्या तिरंगे से बनी ड्रेस पहनी जा सकती है?
भारतीय ध्वज संहिता और 1971 के अधिनियम के तहत वास्तविक राष्ट्रीय ध्वज या उसके हूबहू रूप को किसी भी प्रकार की पोशाक, वस्त्र, वर्दी या परिधान के रूप में पहनना पूरी तरह से प्रतिबंधित और गैरकानूनी है. कानूनी दृष्टिकोण से इसे निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है.
- कमर के नीचे तिरंगे का उपयोग सख्त वर्जित: कानून के तहत तिरंगे को किसी भी ऐसे वस्त्र के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता जो कमर के नीचे पहना जाता हो. इसमें पैंट, पायजामा, स्कर्ट, लेगिंग्स, शॉर्ट्स, स्विमसूट या अंडरगारमेंट्स शामिल हैं. इसे राष्ट्रीय ध्वज का गंभीर अपमान माना जाता है.
- पूरे परिधान के रूप में तिरंगा: किसी वास्तविक झंडे को काटकर या सिलकर उससे कुर्ती, शर्ट, फ्रॉक, जैकेट या साड़ी बनाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. झंडे को लपेटना या परिधान बनाना राष्ट्रीय गौरव का अपमान है.
- रुमाल, तकिए और कुशन पर प्रतिबंध: तिरंगे को रुमाल, नैपकिन, कुशन कवर, बेडशीट या किसी अन्य घरेलू उपयोग की वस्तु पर प्रिंट करके इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि रुमाल से पसीना पोंछना या उस पर बैठना ध्वज का अपमान है.
- सैनिकों और विशिष्ट व्यक्तियों के लिए नियम: शहीद सैनिकों या राजकीय सम्मान पाने वाले गणमान्य व्यक्तियों के पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज लपेटा जाता है. इस स्थिति में भी शरीर के दहन या दफनाने से पहले ध्वज को पूरे सम्मान के साथ ससम्मान हटा लिया जाता है, उसे कभी भी जलाने या दफनाने नहीं दिया जाता.
भारतीय तिरंगा.
तिरंगे के रंगों का उपयोग
यदि कोई व्यक्ति सामान्य कपड़े पहनता है जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग का संयोजन है और उसमें अशोक चक्र या हूबहू राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप नहीं है, तो उसे पहना जा सकता है. उदाहरण के लिए, सफेद कुर्ते के साथ तिरंगे रंगों वाला दुपट्टा, जिसे सम्मानपूर्वक गले में रखा जाए और जो ज़मीन से न छुए या इन तीन रंगों वाली सामान्य टीशर्ट पहनना प्रतिबंधित नहीं है. लेकिन यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि उस परिधान पर राष्ट्रीय ध्वज का हूबहू रूप न बना हो और उसका किसी भी प्रकार से अनादर न हो.
तिरंगे के साथ क्याक्या नहीं कर सकते?
भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज के साथ निम्नलिखित कार्य करना पूरी तरह से वर्जित और दंडनीय है.
- ज़मीन या पानी से स्पर्श कराना: राष्ट्रीय ध्वज को कभी भी ज़मीन, फर्श या पानी को छूने नहीं देना चाहिए. इसे हमेशा ऊंचाई और सम्मान की स्थिति में रखा जाना चाहिए.
- उल्टा या विकृत ध्वज फहराना: तिरंगे को कभी भी उल्टा नहीं फहराया जाना चाहिए. फहराते समय हमेशा केसरिया पट्टी सबसे ऊपर और हरी पट्टी सबसे नीचे होनी चाहिए. इसके अलावा, फटा हुआ, मैलाकुचैला या क्षतिग्रस्त झंडा फहराना वर्जित है.
- व्यावसायिक या विज्ञापन उपयोग: तिरंगे का उपयोग किसी भी प्रकार के व्यावसायिक लाभ, व्यापार, ट्रेडमार्क, पेटेंट या विज्ञापन के लिए नहीं किया जा सकता. किसी उत्पाद की पैकेजिंग, रैपिंग या डिलीवरी बैग पर राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग गैरकानूनी है.
- सजावट या पर्दों के रूप में उपयोग: तिरंगे को किसी मंच की मेजपोश, पर्दे, झालर, रिबन या किसी अन्य सजावटी साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. सजावट के लिए केवल तीन रंगों के कागज़ या कपड़े के सामान्य रिबन का उपयोग किया जा सकता है, न कि राष्ट्रीय ध्वज का.
- किसी वस्तु को लपेटने या ढंकने में उपयोग: ध्वज का उपयोग किसी वस्तु, उपहार, प्रतिमा या स्मारक के अनावरण से पहले उसे ढंकने के लिए नहीं किया जा सकता. इसे किसी वाहन की हुड, छत या किनारों पर ढंकने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
- तिरंगे पर कोई अक्षर, नारा, हस्ताक्षर जुर्म: राष्ट्रीय ध्वज के कपड़े पर किसी भी प्रकार का अक्षर, शब्द, नारा, हस्ताक्षर या चित्र बनाना या लिखना सख्त मना है. किसी भी अन्य झंडे या पताका को राष्ट्रीय ध्वज से ऊँचा या उसके बराबर दाईं ओर नहीं लगाया जा सकता. यदि कई झंडे एक साथ लगाए जा रहे हैं, तो तिरंगा सबसे दाईं ओर या सबसे ऊँचे स्थान पर होना चाहिए.
- कागज़ के झंडों का अनुचित निपटान: राष्ट्रीय पर्वों पर बांटे जाने वाले छोटे कागज़ या कपड़े के झंडों को कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ज़मीन पर फेंकना या कचरे के डिब्बे में डालना दंडनीय है. जनता को चाहिए कि वे इन झंडों को संभालकर रखें.
तिरंगे का सम्मानपूर्वक निपटान कैसे करें?
यदि कोई राष्ट्रीय ध्वज क्षतिग्रस्त हो जाता है, फट जाता है या मैला हो जाता है जिसे अब फहराया नहीं जा सकता, तो उसे इधरउधर फेंकने के बजाय ध्वज संहिता के नियमों के अनुसार अत्यंत सम्मानजनक तरीके से नष्ट किया जाना चाहिए. ध्वज को एकांत में साफसुथरी भूमि में गड्ढा खोदकर सम्मानपूर्वक दफनाया जा सकता है. ध्वज की पवित्रता और सम्मान को बनाए रखते हुए उसे एकांत स्थान पर पूरे आदर के साथ अग्नि को समर्पित किया जा सकता है.
दोषी पाए गए तो हो सकती है तीन साल की जेल और जुर्माना
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर या जनता की दृष्टि में राष्ट्रीय ध्वज को जलाता है, विकृत करता है, कुचलता है, अपवित्र करता है या मौखिक या लिखित रूप से उसका अनादर करता है, तो उसे कानूनी दंड का सामना करना पड़ता है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं.
राष्ट्रीय ध्वज केवल तीन रंगों और एक चक्र से बना कपड़ा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के स्वाभिमान, स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और राष्ट्र की संप्रभुता का प्रतीक है. नागरिकों के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम देशभक्ति की अभिव्यक्ति करते समय मर्यादा, नियमों और कानूनों का पूरी तरह पालन करें. तिरंगे के रंगों को अपने मन में और जीवन के आदर्शों में स्थान देना चाहिए, न कि उसे किसी अनुचित पोशाक या वस्तु का रूप देकर अनजाने में उसका अपमान करना चाहिए. जब भी राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग करें, यह सुनिश्चित करें कि उसकी गरिमा, स्थान और स्वरूप सदैव सर्वोच्च बना रहे.



