SIP Investment: म्यूचुअल फंड में लंबे समय तक पैसा लगाकर बड़ा फंड बनाना सिर्फ हर महीने किश्त चुकाने तक सीमित नहीं है. सही फंड चुनना, समयसमय पर अपने निवेश की समीक्षा करना, बाजार के हिसाब से सही जगह पैसा बांटना भी उतना ही जरूरी है. हाल ही में एक निवेशक ने हर महीने 26,000 रुपये की SIP के साथ अपना पोर्टफोलियो शेयर किया. उनका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ी पूंजी बनाना था. आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अर्जुन गुहा ठाकुरता ने जब इस पोर्टफोलियो का बारीकी से विश्लेषण किया, तो एक बेहद काम की सलाह दी. उन्होंने बताया कि अगर इस मौजूदा निवेश में हर साल सिर्फ 10 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए, तो यह रकम आसानी से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.

1 करोड़ का टारगेट ऐसे होगा पूरा

मौजूदा समय में यह निवेशक लार्जकैप, मिडकैप, हाइब्रिड, थीमैटिक जैसे कई फंड्स में 26,000 रुपये महीने डाल रही हैं. एक्सपर्ट के कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर 10 साल तक 13 फीसदी का सालाना रिटर्न मिलता है, तो मौजूदा निवेश से करीब 71 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है. लेकिन असली जादू 10 फीसदी स्टेपअप फॉर्मूले में छिपा है. अगर निवेशक अपनी SIP की रकम को हर साल सिर्फ 10 फीसदी बढ़ा दें, तो समान रिटर्न के साथ यह फंड बढ़कर सीधे 1 करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाएगा. इसका सीधा सा मतलब है कि आपकी आमदनी जैसेजैसे बढ़ती है, निवेश को भी उसी अनुपात में बढ़ाना करोड़पति बनने की सबसे मजबूत चाबी है.

पोर्टफोलियो में फालतू स्कीम्स का जमावड़ा न करें

पोर्टफोलियो की जांच में एक बड़ी खामी यह सामने आई कि निवेशक ने जरूरत से ज्यादा स्कीम्स में पैसा लगा रखा था. इससे उनके निवेश में दोहराव हो रहा था. एक्सपर्ट के मुताबिक, एक आदर्श पोर्टफोलियो में 55% लार्जकैप, 23% मिडकैप, 22% स्मॉलकैप का हिस्सा होना चाहिए. जबकि निवेशक का पैसा लार्जकैप में 7% ज्यादा, मिडकैप में 8% ज्यादा लगा था. वहीं, स्मॉलकैप में 14% की भारी कमी थी. इसके अलावा, मल्टीएसेट, हाइब्रिड, थीमैटिक फंड्स से बचने की स्पष्ट सलाह दी गई है. इनका रिटर्न बाजार के उतारचढ़ाव पर बहुत अधिक निर्भर करता है. टैक्स सेविंग के लिए ELSS फंड्स तभी सही हैं जब आप पुरानी टैक्स व्यवस्था के दायरे में आते हों. नई टैक्स व्यवस्था चुनने वालों को इन स्कीम्स की कोई आवश्यकता नहीं है.

सही बैलेंस के लिए इन फंड्स से निकलें बाहर

विशेषज्ञों की सलाह है कि पोर्टफोलियो को हल्का, स्पष्ट, असरदार बनाया जाए. निवेशक को लगभग सात फंड्स से बाहर निकलने की सलाह दी गई है. इनमें आदित्य बिड़ला सन लाइफ डिजिटल इंडिया फंड, एचडीएफसी हाइब्रिड इक्विटी फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंडिया अपॉर्चुनिटीज फंड, मिराए एसेट ग्रेट कंज्यूमर फंड, मिराए एसेट लार्ज एंड मिडकैप फंड, निप्पॉन इंडिया अग्रेसिव हाइब्रिड फंड, क्वांट मल्टी एसेट एलोकेशन फंड शामिल हैं. हालांकि इन फंड्स ने पिछले तीन से पांच सालों में 20 से 24 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. इसके बावजूद सेक्टोरल, हाइब्रिड फंड्स लंबे समय के लिए एसेट एलोकेशन को उलझा सकते हैं.

शानदार रिटर्न के लिए इन फंड्स में लगाएं पैसा

जिन फंड्स में निवेश जारी रखने की सलाह दी गई है, उनमें क्वांट ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड , क्वांट मिड कैप फंड, मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड, मिराए एसेट लार्ज कैप फंड, डीएसपी लार्ज एंड मिड कैप फंड मुख्य रूप से शामिल हैं. इन स्कीम्स ने पिछले कुछ सालों में 18 से 20 फीसदी तक का शानदार मुनाफा दिया है. इसके साथ ही, स्मॉलकैप की कमी पूरी करने के लिए एचडीएफसी स्मॉल कैप फंड, इन्वेस्को इंडिया स्मॉलकैप फंड में नया निवेश किया जा सकता है. बाजार में व्यापक पकड़ के लिए कोटक मल्टीकैप फंड, स्थिर इक्विटी के लिए आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल डिविडेंड यील्ड इक्विटी फंड को भी अपनी निवेश सूची में शामिल किया जा सकता है.

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