नई दिल्ली: भारतजापान के आर्थिक रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं और जापानी कंपनियां भविष्य के निवेश व कारोबार विस्तार के लिए भारत को बेहद अहम बाजार मान रही हैं। हालिया आधिकारिक आंकड़ों और सर्वेक्षणों में भारत को जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा विस्तार गंतव्य बताया गया है। इसके बावजूद, दक्षिणपूर्व एशिया में जापानी कंपनियों का बड़ा और पुराना विनिर्माण नेटवर्क अब भी थाईलैंड में मौजूद है।

दरअसल, भारत और जापान ने अगले दशक में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य तय किया है। भारत में करीब 1,500 जापानी कंपनियों की मौजूदगी और स्थानीय कारोबार विस्तार की मजबूत इच्छा भी भारत के बढ़ते आकर्षण को दिखाती है।
थाईलैंड अब भी क्यों है मजबूत?
थाईलैंड में जापानी कंपनियों को पहले से विकसित औद्योगिक क्लस्टर, अनुभवी सप्लायर नेटवर्क और स्थापित उत्पादन श्रृंखला का लाभ मिलता है। खासकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में जापानी उद्योग की मौजूदगी लंबे समय से मजबूत रही है। इसलिए कई कंपनियां भारत में नए निवेश बढ़ाने के साथसाथ थाईलैंड के मौजूदा कारखानों और सप्लाई नेटवर्क को भी बनाए हुए हैं।
भारत की बढ़ती ताकत
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार, तेजी से बढ़ती मांग और भविष्य की विकास संभावनाएं हैं। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। आधिकारिक भारतीय स्रोतों के अनुसार, 2025 के सर्वेक्षण में भारत जापानी कंपनियों के लिए स्थानीय परिचालन विस्तार की इच्छा के मामले में शीर्ष स्थान पर रहा।
रणनीति क्या है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, जापानी कंपनियां अब “एक देश पर निर्भरता कम करने” की रणनीति पर काम कर रही हैं। भारत को बड़े बाजार और भविष्य के उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि थाईलैंड को स्थापित सप्लाई चेन और ASEAN क्षेत्र तक पहुंच के लिए अहम केंद्र बनाए रखा जा रहा है।
भारत के लिए चुनौती अब केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि तेज लॉजिस्टिक्स, बेहतर सप्लायर नेटवर्क, गुणवत्ता मानकों और उत्पादन प्रक्रिया को और मजबूत करना है। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि भारत सिर्फ निवेश की पहली पसंद बना रहता है या जापानी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र भी बन जाता है।



