अगर आप रिटायरमेंट के लिए हर महीने निवेश कर रहे हैं, तो आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि नेशनल पेंशन सिस्टम बेहतर है या म्यूचुअल फंड SIP. दोनों ही लंबे समय में बड़ा फंड बनाने का मौका देते हैं, लेकिन दोनों के नियम, टैक्स लाभ और निकासी की व्यवस्था अलगअलग है. ऐसे में सही विकल्प आपकी जरूरत और निवेश के लक्ष्य पर निर्भर करता है.

एक अनुमान के मुताबिक, यदि कोई निवेशक हर महीने ₹15,000 निवेश करता है और हर साल निवेश राशि में 5% की बढ़ोतरी करता है, तो 20 साल में कुल निवेश करीब ₹59.52 लाख हो जाएगा.

किसमें बन सकता है ज्यादा फंड?

इस अनुमान के अनुसार, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में 20 साल बाद करीब ₹2.81 करोड़ का फंड तैयार हो सकता है. वहीं, NPS के एक्टिव चॉइस विकल्प में यही राशि बढ़कर लगभग ₹2.02 करोड़ तक पहुंच सकती है. हालांकि, म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगने के बाद निवेशक के हाथ में करीब ₹2.53 करोड़ बचते हैं.

म्यूचुअल फंड में ज्यादा फंड बनने की मुख्य वजह यह है कि इस तुलना में पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा इक्विटी में निवेशित माना गया है, जिससे संभावित रिटर्न भी ज्यादा रहता है. लेकिन इसके साथ जोखिम भी अधिक होता है.

NPS में टैक्स का बड़ा फायदा

NPS का सबसे बड़ा फायदा इसकी टैक्स व्यवस्था है. मैच्योरिटी पर जमा राशि का 60% हिस्सा पूरी तरह टैक्सफ्री निकाला जा सकता है. बाकी 40% में से कम से कम 20% राशि से एन्युटी खरीदना जरूरी होता है. एन्युटी खरीदने पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन उससे मिलने वाली पेंशन आपकी आय में जुड़ती है और उस पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है.

अगर किसी कंपनी में नौकरी करने वाले कर्मचारी के NPS खाते में नियोक्ता धारा 80CCD के तहत योगदान देता है, तो उसे अतिरिक्त टैक्स छूट का भी लाभ मिलता है. यही वजह है कि टैक्स बचत चाहने वाले निवेशकों के लिए NPS एक आकर्षक विकल्प माना जाता है.

म्यूचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा

म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर निवेशक का पूरा नियंत्रण रहता है. NPS की तरह यहां किसी हिस्से से एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता. निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से पूरी राशि निकाल सकता है या दोबारा निवेश कर सकता है. साथ ही, लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं, हालांकि इनमें बाजार का जोखिम भी बना रहता है.

किसे चुनना चाहिए?

अगर आपका लक्ष्य अधिक रिटर्न, लिक्विडिटी और निवेश पर पूरा नियंत्रण है, तो म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर आप टैक्स बचत, कम लागत और अनुशासित रिटायरमेंट प्लानिंग चाहते हैं, तो NPS आपके लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए NPS और म्यूचुअल फंड, दोनों में संतुलित निवेश करना सबसे समझदारी भरा फैसला हो सकता है.