राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर चौंकाने वाले राज सामने आ रहे हैं. हर नए खुलासे से ये पता चल रहा है कि कैसे भगवान राम के नाम पर करोड़ों लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ हो रहा था. भक्तों की ओर से चढ़ाए गए पैसे की चोरी हो रही थी. ये सिर्फ एक खबर नहीं है बल्कि ये विश्वास के साथ सबसे बड़ा धोखा और फ्रॉड है. जैसेजैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, चढ़ावा चोरी की नईनई थ्योरी और स्टोरी सामने आ रही है. तमाम जांच के बाद यही कहा जा रहा है कि चुपकेचुपके तिजोरी भरी जा रही थी. ये सबसे बड़ी चढावा चोरी की इनसाइड स्टोरी है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े नए अपडेट महाकुंभ से जुड़े हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, महाकुंभ के दौरान ज्यादा चढ़ावा दिया गया था. इसलिए इस दौरान ज्यादा चोरी हुई थी. ये जानकारी अयोध्या पुलिस की ओर से दी गई है. एक अनुमान के अनुसार, 13 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक लगभग 2.5 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या गए थे. सोचिए ये आस्था के साथ कितना बड़ा धोखा है.
कैसे महाकुंभ के दौरान सबसे बड़ी चोरी की गई?
आपको बताते हैं गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के आधार पर पुलिस की ओर से क्या दावा किया गया है? कैसे महाकुंभ के दौरान सबसे बड़ी चोरी की गई? पुलिस की जांच के दौरान मिली बड़ी जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त महाकुंभ से पहले छोटीमोटी चोरी करते थे. प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चढ़ावे और दान में भारी वृद्धि हुई. इसका फायदा उठाते हुए अभियुक्तों ने बड़ी चोरी की.
लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा चोरी की. ये दोनों न्यायिक हिरासत में हैं. पुलिस का दावा है गिरफ्तार 8 अभियुक्तों ने चोरी की साजिश रची थी. इसके साथ ही अयोध्या चढ़ावा चोरी से संबंधित एक और राज चौंकाने वाला है. इसका कोड वर्ड है योग सेंटर और QR कोड. इसे आप चढ़ावा चोरी केंद्र का QR कोड भी कह सकते हैं. कैसे यहां चोरी की जाती थी आपको बताते हैं.
5 जून की रात योग साधना केंद्र में छापा पड़ा था. इस दौरान श्याम साधनालय योग केंद्र से एक बक्सा मिला था. बक्से पर ‘रामराज्य कोष’ का QR कोड था. नोट करने वाली बात ये है कि रेड के दौरान योग केंद्र से रकम भी मिली. बड़ी बात ये है कि बक्से से सबसे ज्यादा पैसे बरामद किए गए. बक्से में काले थैले में पैसा रखा गया था.
अपने भाई के साथ योग केंद्र में रहता था अविनाश
पुलिस का दावा है अभियुक्त अविनाश इसी योग केंद्र में रहता था. अपने भाई के साथ अविनाश योग केंद्र में रहता था. यहीं से चढ़ावा चोरी करता था. पांच जून को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इशारे पर छापामारी हुई थी. ये 2025 वर्ष पुरानी योग संस्था है. ये भी बताया गया है कि चोरी में नाम आते ही योग केंद्र से अविनाश और अभिषेक को भगाया गया था. हालांकि, इसका सीधे अविनाश से कोई कनेक्शन नहीं मिला है.
योगाचार्य सीमा तिवारी का कहना है कि ये एक आदमी के बस का काम नहीं है. ऊपर के लोग भी मिले होंगे. हमारे केंद्र की बदनामी हुई है. अविनाश की नौकरी मार्च में लगी थी. 5 तारीख को पुलिस आई थी. कमरे की तलाशी हुई थी और अविनाश को लेकर चले गए थे. राम मंदिर के बारे में उस वक्त तक कुछ नहीं पता चला था. योगा के प्रति तो कभी जागरुक नहीं दिख. योग के लिए तो कभीकभार ही आता था.
अयोध्या में श्री राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में काशी का कनेक्शन अब सामने आया है. काशी के सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज़ द्वारा एसबीआई अयोध्या को 22 स्टॉफ रिक्रूट कर के भेजे थे उनमें से छह लोगों को चंदा चोरी मामले में एसआईटी ने गिरफ्तार किया है. सैनिक सिक्योरिटी के ओनर गौरव सिंह ने बताया कि हमारी कंपनी ने जिन 22 लोगों को रिक्रूट किया था वो हाउस कीपिंग के लिए था.
बैंक क्या काम करा था, इसकी जानकारी नहीं
बैंक उनसे क्या काम करा रहा था उसकी जानकारी इनको नहीं थी. जो 22 लोग कंपनी ने रिक्रूट किए थे वो एसबीआई अयोध्या के चीफ मैनेजर के कहने पर किया गया था. 22 लोगों के नाम की लिस्ट और उनका बायोडाटा अयोध्या के एसबीआई ब्रांच के चीफ मैनेजर ने भेजा था. वो सारे लोग पहले किसी और एजेंसी के लिए काम करते थे. 26 साल पुराने सैनिक सर्विसेज एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड देश भर के आठ राज्यों में हाउस कीपिंग, सिक्योरिटी और कैश लॉजिस्टिक के क्षेत्र में काम करती है. इनके दो हज़ार से ज़्यादा कर्मचारी देश भर में काम कर रहे हैं.
उधर, SIT को 15 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं. दूसरी बात ये है कि SIT जमीन खरीद में घोटाला, कर्मचारियों की नियुक्ति की जांच भी करेगी. गिरफ़्तार अभियुक्तों की आय का स्रोत भी SIT खंगालेगी. एकएक पैसे का पता लगाएगी. इसके अलावा मनी ट्रेल की जांच के लिए अयोध्या पुलिस ED को एक पत्र लिखेगी.
बड़ी बात ये भी है कि मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से पूछताछ होगी. इनसे दानराशि के प्रबंधन, वित्तीय निगरानी को लेकर सवालजवाब हो सकते हैं. एक और बड़ी जानकारी ये है कि सभी गिरफ्तार अभियुक्तों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है. एक सवाल आपके मन में ये भी उठ सकता है कि SIT की जांच की समय सीमा तो बढ़ गई है लेकिन आगे और क्या होगा? कैसे पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी?



