अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला साल उनके निजी कारोबार के लिए बेहद मुनाफे वाला साबित हुआ है. हाल ही में जारी हुए संघीय वित्तीय खुलासे से पता चलता है कि टैरिफ नीति, ईरान युद्ध और वैश्विक कूटनीति के बीच ट्रंप और उनके परिवार से जुड़े कारोबार को अरबों डॉलर की कमाई हुई है. क्रिप्टोकरेंसी से लेकर रियल एस्टेट और अब बेल्जियम से मिले हीरे जड़ित तोहफे तक हर मोर्चे पर पैसा बरसा है. ट्रंप पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि वह जंग में कूदकर और अपनी टैरिफ नीतियों से पूरी दुनिया के बाजार को उलझाए रखा और बीचबीच में कमाई करते रहे.

अमेरिकी सरकारी नैतिकता कार्यालय की ओर से जारी 927 पन्नों के डिस्क्लोजर के मुताबिक, ट्रंप से जुड़े कारोबार ने राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद पहले साल में कम से कम 2.2 अरब डॉलर यानी 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की, जो 2024 में सत्ता में आने से पहले की न्यूनतम 62.2 करोड़ डॉलर की कमाई से करीब तीन गुना ज्यादा है. यह खुलासा पिछले साल के मुकाबले करीब 700 पन्ने ज्यादा लंबा है, जो ट्रंप के कारोबारी साम्राज्य के तेज़ी से फैलने का संकेत देता है.
क्रिप्टो बना सबसे बड़ा कमाई का जरिया
रियल एस्टेट से करियर शुरू करने वाले ट्रंप की सबसे बड़ी कमाई अब क्रिप्टोकरेंसी से आ रही है. डिस्क्लोजर के मुताबिक, ट्रंप और उनके बेटों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टो कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से उन्हें लगभग 1.2 से 1.4 अरब डॉलर की आमदनी हुई, जो 2024 के मुकाबले कई गुना ज्यादा है. इसके अलावा उनके मीमकॉइन कारोबार से जुड़ी कंपनी सीआईसी डिजिटल को “सेलिब्रेशन कॉइन्स” लाइसेंसिंग समझौते से 63.5 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रॉयल्टी मिली. डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसे राष्ट्रपति पद के दुरुपयोग और हितों के टकराव का मामला बताया है, हालांकि ट्रंप प्रशासन इससे इनकार करता रहा है.
मारअलागो और वैश्विक प्रॉपर्टी विस्तार
घरेलू स्तर पर फ्लोरिडा स्थित उनके मारअलागो रिजॉर्ट की कमाई में भी जबरदस्त उछाल आया है. यह रिजॉर्ट, जहां दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, राजनयिक और कारोबारी जुटते रहे हैं, पिछले साल 7.74 करोड़ डॉलर की कमाई कर चुका है, जो 2024 में मिले 5.01 करोड़ डॉलर से करीब 50 प्रतिशत ज्यादा है. इसके साथ ही ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने पिछली एक सदी में सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रॉपर्टी विस्तार भी किया है. कई देशों के साथ जब अमेरिका टैरिफ और सैन्य सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत कर रहा था, उसी दौरान इन्हीं देशों में ट्रंप ब्रांड से जुड़ी लाइसेंसिंग और मैनेजमेंट डील्स से करोड़ों डॉलर आए. संयुक्त अरब अमीरात की एक प्रॉपर्टी से 1.04 करोड़ डॉलर, सऊदी अरब की एक परियोजना से 90 लाख डॉलर, जबकि कतर और रोमानिया की परियोजनाओं से 5050 लाख डॉलर की कमाई हुई.
तोहफे में मिला हीरे जड़ित शाही अंगूठी
टैरिफ कूटनीति से ट्रंप को सिर्फ कारोबारी फायदा ही नहीं, तोहफे भी मिले हैं. बेल्जियम के एंटवर्प शहर के हीरा व्यापारियों के संगठन एडब्ल्यूडीसी ने ट्रंप को एक सोने की अंगूठी भेंट की है, जिसमें 321 हीरे, 56 नीलम, 13 पन्ने और छह माणिक जड़े हैं. इसकी कीमत करीब 21 लाख रुपये है. यह अंगूठी अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर ब्रुसेल्स में आयोजित एक कार्यक्रम में बेल्जियम में अमेरिकी राजदूत बिल व्हाइट के जरिए ट्रंप को भेजी गई. यह तोहफा उस फैसले के कुछ महीनों बाद आया जब ट्रंप प्रशासन ने बेल्जियम के हीरा उद्योग पर लगे अमेरिकी आयात टैरिफ को पूरी तरह हटा दिया था. एडब्ल्यूडीसी ने खुद स्वीकार किया कि इससे एंटवर्प के सालाना दो अरब डॉलर से ज्यादा के पॉलिश हीरा निर्यात को फायदा हुआ.
As our nation celebrates 250 years of independence, we are honored with the Antwerp World Diamond Centres gift of this beautiful ring that reflects the unbreakable bond between our countries. Our countries have stood the test of time together. This gift celebrates the enduring pic.twitter.com/SmUw4duAKY
— U.S. Ambassador to Belgium Bill White July 3, 2026
ईरान युद्ध के दौरान विवादित शेयर सौदे
इस बीच ट्रंप के नाम पर चल रहे ब्रोकरेज खातों को लेकर भी विवाद गहराया है. संघीय खुलासों के मुताबिक, ईरान युद्ध के दौरान इन खातों से हजारों शेयर सौदे किए गए. युद्ध शुरू होने के दिन से ही खाते ने सोना, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और नकदी जैसे सुरक्षित निवेशों की खरीद शुरू कर दी थी, जबकि सार्वजनिक तौर पर ट्रंप युद्ध जल्द खत्म होने का दावा करते रहे. जिस दिन ट्रंप ने युद्ध में नरमी के संकेत दिए और तेल व ऊर्जा शेयरों में गिरावट आई, उसी दिन उनके खाते ने फिलिप्स 66, एक्सॉनमोबिल, शेवरॉन जैसी तेल कंपनियों के साथसाथ लॉकहीड मार्टिन और जनरल डायनेमिक्स जैसी रक्षा कंपनियों के शेयर खरीदे यानी वे कंपनियां जिन्हें युद्ध लंबा खिंचने से फायदा होता.
इसके अलावा यह भी सामने आया कि 8 अप्रैल 2025 को, यानी ट्रंप द्वारा अपने बड़े टैरिफ ऐलान पर 90 दिन की रोक लगाने से ठीक एक दिन पहले, उनके निवेश खातों ने ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, अमेजन और अल्फाबेट सहित कुल 327 शेयरों की खरीद की जिसका खुलासा 14 महीने बाद जाकर हुआ. अगले दिन टैरिफ में राहत की घोषणा होते ही शेयर बाजार में जोरदार उछाल आया और ये सभी कंपनियां तेजी से उबरीं.
इस पर व्हाइट हाउस दोनों का कहना है कि इन खातों का प्रबंधन स्वतंत्र वित्तीय संस्थाएं करती हैं और राष्ट्रपति या उनके परिवार का इसमें कोई हितों का टकराव नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के नाम पर इतने सक्रिय रूप से शेयर बाजार में कारोबार होते देखा गया है, जबकि पिछले सभी राष्ट्रपति ब्लाइंड ट्रस्ट या इंडेक्स फंड जैसे तरीके अपनाकर हितों के टकराव से बचते रहे हैं.



