
Pune Doctor Murder Case: पुणे (महाराष्ट्र) के एक आर्थोपेडिक सर्जन की फिरौती के लिए हत्या करने और उसके शरीर को टुकड़े-टुकड़े करने के 20 साल बाद चिकित्सा की पूर्व छात्रा दीप्ति देवस्थली यरवदा केंद्रीय जेल में महिला जेल से बाहर आने के लिए तैयार है. उसे अपनी वकील मां लीना के साथ उस व्यक्ति के अपहरण के लिए दोषी ठहराया गया था.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार (अक्टूबर, 2026) को राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दीप्ति को समय से पहले रिहाई के लिए 30 साल जेल की सजा काटने के लिए आवश्यक आजीवन दोषियों में वर्गीकृत किया गया था. अदालत ने कहा कि दीप्ति 30 सितंबर को 20 साल जेल में काट चुकी थी. उसे तो हत्या के लिए दोषी भी नहीं ठहराया गया था और इसलिए लंबे समय तक कारावास की आवश्यकता वाली उसकी श्रेणी सही नहीं थी.
जस्टिस एमएस कार्णिक और संदेश पाटिल ने उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी और उन्हें तीन महीने में एक बार पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने को कहा है, क्योंकि मामले में याचिकाएं अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.
2007 में मां-बेटी को मौत की सज़ा सुनाई गई
यह अपराध जुलाई 2006 का है जब देवस्थली मां-बेटी पर फिरौती के लिए महाजन का अपहरण करने, उसकी हत्या करने, उसके शरीर को टुकड़ों में काटने और कटराज के पास फेंकने का आरोप लगाया गया था. दिसंबर 2007 में पुणे की एक सत्र अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था और मौत की सज़ा सुनाई थी. हालांकि 2009 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी मौत की सजा को रद्द कर दिया, उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन उन्हें फिरौती के लिए अपहरण, आपराधिक साजिश, छद्मवेश द्वारा धोखाधड़ी और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के लिए दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
इसके बाद दोनों ने अपनी दोषसिद्धि को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जबकि राज्य सरकार ने भी हत्या के आरोप से उन्हें बरी करने के फैसले को चुनौती दी. याचिकाएं शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित हैं
लीना को 14 साल की सज़ा के बाद रिहा कर दिया गया
अदालत ने कहा कि लीना देवस्थली को 14 साल की कैद पूरी करने और 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद मई 2025 में जेल से रिहा कर दिया गया था. 22 सितंबर, 2025 को राज्य सरकार ने क्रमशः 1992 और 2010 के दो सरकारी प्रस्तावों पर भरोसा करते हुए दीप्ति को आजीवन कारावास की सजा की श्रेणी में रखा, जिसके तहत उन्हें छूट के साथ 30 साल जेल में बिताने पड़े.
दीप्ति ने बिताए 26 साल जेल में
जेल के कैदियों को अच्छे व्यवहार या संस्थागत कार्यों में भागीदारी के लिए जेल अधिकारियों द्वारा छूट दी जाती है, जो जेल में बिताए गए उनके दिनों की संख्या में जुड़ जाती है, जिससे वे शीघ्र रिहाई के लिए पात्र हो जाते हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। अदालत को बताया गया कि दीप्ति ने 20 साल जेल में बिताए थे, छूट के साथ यह राशि 26 साल हो गई.
अदालत ने एक अनुभवी वकील को एमिकस क्यूरी (अदालत का मित्र) नियुक्त किया था, जिन्होंने कहा था कि दीप्ति को 30 साल की कैद की आवश्यकता वाली श्रेणी में नहीं रखा जा सकता था, क्योंकि उसे हत्या का दोषी नहीं ठहराया गया था. हालांकि, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जेल कैदियों के रूप में, दीप्ति और लीना दोनों झगड़ालू थीं और जेल नियमों का उल्लंघन करने के लिए कुख्यात थीं. जेल से रिहा होने के तुरंत बाद लीना ने न केवल जेल अधिकारियों के खिलाफ, बल्कि न्यायपालिका के खिलाफ भी असंख्य तुच्छ, घिनौने और निराधार आरोप लगाते हुए आवेदन दायर किए थे.



