दीपावली से पहले सोने-चांदी के दाम में भारी गिरावट, जानिए और कितने गिरेंगे दाम

भोपाल: त्योहारी सीजन के बीच सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींचा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2026 को 24 कैरेट यानी 999 शुद्धता वाले सोने का भाव ₹1,41,630 प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव ₹1,94,415 प्रति किलो रहा। सोने की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति, बॉन्ड यील्ड, डॉलर की चाल और निवेशकों की मुनाफावसूली का असर पड़ सकता है। हालांकि, कीमतों में गिरावट के बावजूद गोल्ड ETF में निवेश जारी रहा। Gold Silver Price Today

सोने और चांदी के दाम में कितनी गिरावट आई?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के बताए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.55 लाख प्रति 10 ग्राम थी। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग 1.41 लाख रह गई। इस तरह सोने की कीमत में करीब 14,000 की गिरावट दर्ज की गई। चांदी में गिरावट इससे भी ज्यादा रही। 29 जनवरी 2026 को चांदी की कीमत करीब 3.86 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग 1.94 लाख प्रति किलो रह गई। यानी रिकॉर्ड स्तर से कीमत करीब 1.92 लाख नीचे आ गई।

महंगे कच्चे तेल से ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका
अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market) में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। तेल महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ती है, जिसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं या जरूरत पड़ने पर बढ़ा सकते हैं। इससे सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। सोना नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के दौर में इसकी मांग पर दबाव पड़ सकता है।

डॉलर मजबूत होने से सोने पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत आमतौर पर अमेरिकी डॉलर (American Dollar) में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ सकता है, जिससे मांग प्रभावित होती है। डॉलर की मजबूती भारतीय बाजार पर भी असर डाल सकती है। भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। हालांकि, घरेलू सोने की कीमत केवल डॉलर पर निर्भर नहीं करती; अंतरराष्ट्रीय भाव, रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क और स्थानीय मांग भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग
जब किसी एसेट की कीमत तेजी से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती है, तो कुछ निवेशक मुनाफा निकालने के लिए उसे बेचने लगते हैं। इसे प्रॉफिट बुकिंग कहा जाता है। सोने की कीमतों में पहले आई तेज बढ़ोतरी के बाद निवेशकों की बिकवाली भी गिरावट की एक संभावित वजह हो सकती है। हालांकि, बाजार में हर गिरावट को केवल प्रॉफिट बुकिंग से जोड़ना सही नहीं होगा। निवेशकों की मांग, वैश्विक आर्थिक हालात और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी कीमतों को प्रभावित करती है।

क्या सोने में निवेश की मांग खत्म हो रही है?
कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि सोने की मांग पूरी तरह खत्म हो गई है। सोने को अब भी कई निवेशक पोर्टफोलियो में विविधता लाने और आर्थिक अनिश्चितता के दौरान जोखिम संतुलित करने के विकल्प के रूप में देखते हैं। गोल्ड ETF में निवेश, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी सोने की कीमतों की दिशा तय कर सकती हैं। इसलिए निवेश का फैसला केवल हालिया गिरावट देखकर नहीं, बल्कि अपनी जरूरत, निवेश अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

आगे सोने-चांदी के दाम किस दिशा में जाएंगे?
आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की मौद्रिक नीति, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की मांग का असर पड़ सकता है। ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता की स्थिति कीमतों में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती है।