लखनऊ, 26 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी के सृजन, संपत्ति पंजीकरण के समय स्वामित्व संबंधी अभिलेखों के परीक्षण, रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण, अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण तथा साइबर तहसील और राजस्व संहिता की धारा34 से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

यूनिक प्रॉपर्टी आईडी से संपत्तियों की होगी विशिष्ट पहचान Yogi Governemnt
बैठक में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी व्यवस्था के संबंध में बताया गया कि प्रदेश में विभिन्न प्रकार की संपत्तियों की पहचान और अभिलेखों के प्रबंधन के लिए अलगअलग विभागों द्वारा कार्य किया जा रहा है। कृषि भूमि के लिए खसरा संख्या आधारित यूनिक प्रॉपर्टी आईडी उपलब्ध है, जबकि आबादी की भूमि के लिए 13 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी यानी घरौनी भी तैयार की जा रही है। आवास और औद्योगिक विकास विभाग भी अपनेअपने क्षेत्राधिकार में आने वाली संपत्तियों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर रहे हैं।
नगर विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 75 जिला मुख्यालयों के नगर निकायों में ईनगरसेवा पोर्टल पर 34.70 लाख संपत्तियां दर्ज हो चुकी थीं और इनके लिए 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी सृजित की जा रही थी। बैठक में यह भी बताया गया कि ईनगरसेवा पोर्टल पर कुल 71 में से 75 नगर निकायों में आईडी सृजन का कार्य हो चुका है तथा 56.57 लाख संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज हैं।
नक्शा परियोजना से संपत्तियों के स्वामित्व का होगा सत्यापन
नगरीय संपत्तियों के लिए नक्शा परियोजना के अंतर्गत यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की प्रक्रिया भी समीक्षा के केंद्र में रही। इस परियोजना के तहत पायलट के रूप में 10 नगर निकायों का चयन किया गया है। इनमें से पांच निकायों—गोरखपुर नगर निगम, झांसी नगर निगम, नगर पालिका परिषद नवाबगंज , हरदोई और चित्रकूटधाम—में ईनगरसेवा और नक्शा, दोनों व्यवस्थाओं की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी लागू की जानी है। बैठक में स्पष्ट किया गया कि नक्शा परियोजना का उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति के लिए अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करना है, जिससे संपत्ति के वैधानिक स्वामित्व की पुष्टि करने में सहायता मिलेगी।
वहीं, ईनगरसेवा पोर्टल की 17 अंकों की आईडी का उपयोग संपत्ति कर के निर्धारण और वसूली के लिए किया जाता है। दोनों पोर्टलों के बीच समन्वय के लिए राज्य स्तर के ईनगरसेवा डेटाबेस और केंद्र स्तर के नक्शा डेटाबेस के मध्य सीधे एपीआई एकीकरण की व्यवस्था की गई है। इससे अभिलेखों का वास्तविक समय में सत्यापन और संपत्ति के पंजीकरण के बाद स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। नक्शा के चयनित 10 नगर निकायों में कार्य पूरा करने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2026 निर्धारित किया गया है।
संपत्ति की बिक्री के अधिकार के लिए मान्य अभिलेख होंगे चिह्नित
संपत्ति के क्रयविक्रय में स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की अहम भूमिका को देखते हुए बैठक में मान्य अभिलेखों को चिह्नित करने के विषय पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के विक्रय के अधिकार को प्रथम दृष्टया प्रमाणित करने के लिए खतौनी और घरौनी को मान्य अभिलेख के रूप में चिह्नित किया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा औद्योगिक विकास विभाग भी अपनेअपने क्षेत्राधिकार में संपत्तियों के विक्रय अधिकार की पुष्टि के लिए मान्य अभिलेखों की पहचान करें।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने बताया कि भवन मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया स्वामित्व का निर्धारण होने के बाद ही की जाती है। विकास प्राधिकरणों, परिषदों और अन्य संस्थाओं द्वारा आवंटित भूमि या संपत्ति के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उनके अभिलेखों में उपलब्ध हैं। आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड जैसे दस्तावेज इन मामलों में स्वामित्व के मान्य साक्ष्य हैं।
अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण के लिए समिति गठित
राजस्व अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण, अद्यतन और एकीकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए बैठक में समिति और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर जोर दिया गया। निर्णय के अनुसार, अभिलेखों में विवाद होने अथवा संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया भी स्पष्ट की जाएगी।
इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में समिति का गठन 5 अक्टूबर 2026 को किया जा चुका है। समिति में राजस्व परिषद और राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाना है। समिति अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद को प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद राजस्व विभाग आवश्यक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगा। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। अन्य विभागों को भी अपने स्तर पर एसओपी तैयार करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
आवश्यकता के अनुसार स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों का सहयोग लिया जा सकेगा। इससे विभिन्न विभागों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों के सत्यापन और अद्यतन के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया विकसित करने में सहायता मिलेगी।
रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की दिशा में पहल
बैठक का एक प्रमुख विषय संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू करना रहा। इसके लिए विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाली पायलट संस्थाओं का चयन किया जाना है। राजस्व विभाग को कुछ राजस्व गांवों, नगर विकास विभाग को कम से कम एक नगर निकाय तथा औद्योगिक विकास विभाग को यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा किसी अन्य उपयुक्त औद्योगिक विकास प्राधिकरण का चयन करना है।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से लखनऊ विकास प्राधिकरण का चयन किया गया है। चयनित संस्थाओं को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की प्रणाली से एपीआई के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इसके परिणामस्वरूप पंजीकृत दस्तावेजों से संबंधित आवश्यक डेटा और विवरण संबंधित संस्थाओं को स्वतः उपलब्ध हो सकेंगे।
:



