Karwa Chauth 2026: करवा चौथ के व्रत को महिलाएं पूरे तनमन से रहती हैं. इस दिन महिलाएं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं. हालांकि, उन महिलाओं के लिए यह व्रत और कठिन हो सकता है जो कि प्रेग्नेंट हैं. ऐसे में आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा कहती हैं कि अगर आप निर्जला व्रत कर रही हैं तो आपको अपनी सेहत से ज्यादा अपने बच्चे की सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए. ऐसे में अगर आपको अपने शरीर में कोई भी बदलाव नजर आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि पहले तो प्रेग्नेंट महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से बिल्कुल बचना चाहिए क्योंकि डिहाइड्रेशन की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है. इतना ही नहीं, प्रेग्नेंट महिलाएं में पानी की कमी बेहोशी, बेचैनी और सिर दर्द जैसी समस्याओं के साथ गंभीर रूप धारण कर सकती है जैसे

लो बीपी के कारण बेहोशी महसूस करना

डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि करवाचौथ लगभग 16 से 18 घंटे का व्रत है. उसमें भी अगर आप कुछ खा नहीं रही हैं या पूरी तरह से निर्जला व्रत पर हैं तो आपके शरीर में गंभीर रूप से पानी की कमी हो सकती है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इस कमी से कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है जिससे बच्चे की सेहत पर असर हो सकता है और उस तक भी खून की पहुंच धीमी पड़ सकती है. इसके अलावा प्रेग्नेंट महिलाएं बेहोशी, कमजोरी, लो बीपी और सिरदर्द जैसे लक्षणों को महसूस कर सकती हैं.

बच्चे की मूवमेंट न होना

डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि अगर आपको लग रहा है कि व्रत की वजह से आपके बच्चे की मूवमेंट ठहर गई है और लंबे समय तक महसूस नहीं हो रही तो डॉक्टर के पास जाएं. यह घटना उन महिलाओं के साथ ज्यादा हो सकती है जिनकी प्रेगनेंसी 6 महीने 9 महीने के बीच है. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि लो ब्लड शुगर की वजह से हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति आ सकती है, जिसमें बच्चे तक ग्लूकोज की आपूर्ति हो जाती है जिससे उसका मूवमेंट प्रभावित हो सकता है.

प्लेसेंटा में ब्लड सर्कुलेशन का कम होना

निर्जला व्रत में डिहाइड्रेशन के कारण गर्भाशय की धमनी में ब्लड सर्कुलेशन की गति कम हो सकती है, जिससे प्लेसेंटा के लिए सामान्य मात्रा में तरल पदार्थ का उत्पादन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि तीसरी तिमाही में ऐसा होना पर संभावित रूप से झूठे या समय से पहले संकुचन शुरू होने का कारण बन सकता है. American Journal of Obstetrics & Gynecology में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि गर्भावस्था के तीसरे महीने से आखिरी तिमाही तक पानी की कमी प्लेसेंटा तक ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकती है.

स्पॉटिंग या ब्लीडिंग

डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि निर्जला व्रत के दौरान कई बार महिलाएं पानी की कमी से स्पॉटिंग या ब्लीडिंग महसूस कर सकती हैं. आखिरी तिमाही में पानी की कमी से बच्चेदानी में खिंचाव या सिकुड़न हो सकता है. इससे स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो सकती है. ऐसे में इस स्थिति को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर को दिखाएं.

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में बिल्कुल भी न करें करवाचौथ का व्रत

डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में आपको बिल्कुल भी व्रत करने से बचना चाहिए. खासकर कि अगर आपको गेस्टेशनल डायबिटीज है, प्रीएक्लेम्पसिया, एनीमिया, समय से पहले प्रसव का इतिहास रहा है या जुड़वां बच्चे वाली प्रेगनेंसी है तो करवा चौथ व्रत करने से बचें.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों पर आधारित है और इसका उद्देश्य सिर्फ सामान्य जानकारी प्रदान करना है. टीवी9 हिंदी लेख में शामिल जानकारी की पुष्टि नहीं करता.