नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है, क्योंकि कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ गए और वेस्ट एशिया में फिर से तनाव हावी हो चुका है. विदेशी निवेशकों की ताजा निकासी और ग्लोबल मार्केट में गिरावट भी निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है.

मंगलवार के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72% टूटकर 77,054.94 पर क्लोज हुआ. वहीं निफ्टी 158.95 अंक या 0.66% गिरकर 24,052.05 पर बंद हुआ. निफ्टी बैंक में 670 अंकों तक की गिरावट देखने को मिली. बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 6 शेयर ही तेजी पर बंद हुए, बाकी 24 शेयरों में गिरावट रही. HCL टेक 4 फीसदी से ज्यादा और बजाज फिनसर्व के शेयर 2.5 फीसदी टूटकर बंद हुए. इसके अलावा, इंडिगो, एसबीआई, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एल एंड टी के शेयरों में भी 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई.
बाजार में गिरावट के बीच बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी भारी कमी देखने को मिली. बीएसई मार्केट कैप 482.41 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये कम होकर 479.40 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. आइए जानते हैं मार्केट में क्यों बड़ी गिरावट आई है…
क्यों आई भारतीय बजाार में भारी गिरावट?
अमेरिकी सेना ने सोमवार को ईरान के खिलाफ लगातार तीसरी रात हमले किए, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जहाजों पर नाकाबंदी फिर से लागू कर दी और होर्मुज की सुरक्षा के लिए 20 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है. इससे तनाव और भी बढ़ चुका है.
तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.63 प्रतिशत बढ़कर 84.60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो 17 जून को अमेरिका और ईरान द्वारा युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद से इसका उच्चतम स्तर है. तेल की कीमतों में ये बढ़ोतरी चिंता पैदा कर रही है.
एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.71 प्रतिशत गिर गया. जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भी लाल निशान में थे. अमेरिकी बाजार में भी गिरावट के संकेत दिखाई दे रहे हैं.
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 3,062.27 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार निकासी से घरेलू शेयरों पर दबाव पड़ रहा है, क्योंकि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से इंडेक्स पर दबाव पड़ता है और समग्र बाजार भावना कमजोर होती है.
बाजार की अस्थिरता का इंडिकेटर भारत VIX लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 14 के स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ती सतर्कता को दिखाता है.
जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण रुपये समेत अधिकांश एशियाई मुद्राओं पर दबाव पड़ा, जिसके चलते रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे गिरकर 96.16 पर आ गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.95 पर खुला, फिर गिरकर 96.16 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 48 पैसे की गिरावट है.
185 शेयरों में लोअर सर्किट
कुल 4,433 शेयरों में से बीएसई पर 1,502 शेयरों में तेजी रही. 2,735 शेयर गिरावट पर कारोबार करते हुए दिखाई दिए और बाकी 196 शेयर अनचेंज रहे. 180 शेयरों में अपर सर्किट दिख रहा है और 185 शेयर लोअर सर्किट पर बंद हुए.



