भारतीय किचन में खाना पैक करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल मौजूद न हो ऐसा हो नहीं सकता. इससे हेल्थ को नुकसान के बारे में जानने के बावजूद लोग रोटी को पैक करने के लिए फॉयल का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन आजकल फॉयल में चीजों को पकाकर खाना भारत में ट्रेंड कर रहा है. क्या आप जानते हैं कि कुछ चीजों को इसमें पकाने से एल्युमिनियम भी उनमें मिल सकता है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इलेक्ट्रोकेमिकल साइंस में छपी एक रिसर्च में ये रिजल्ट सामने आया. इसके मुताबिक जब एल्युमिनियम फॉयल खाने के कॉन्टेक्ट में आता है तो इससे एल्युमिनियम छूट सकता है.

चौंकाने वाली बात है कि अगर फूड में टमाटर, सिरका, नींबू या साइट्रिक एसिड और ज्यादा मसालों का इस्तेमाल हो तो इसके घुलने की मात्रा और बढ़ जाती है. आजकल लोग एल्युमिनियम फॉयल में आलू को बेक करते हैं जिसमें कई मसाले मिलाए जाते हैं. इस तरह शरीर में जाने अनजाने में एल्युमिनियम भी जाता है. जानें इस रिसर्च में क्याक्या सामने आया है.

कैसे की गई रिसर्च?

इस रिसर्च को Risk Assessment of Using Aluminum Foil in Food Preparation नाम दिया गया. इसमें यूएई और मिस्र के केमिकल इंजीनियर शामिल थे. इसमें ये जानने की कोशिश की गई कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले फॉयल से खाने में कितना एल्युमिनियम पहुंचता है. रिसर्चर्स ने साइट्रिक एसिड, टोमेटो, सिरका और कई मसालों को मिलाकर मीट सॉस रेडी की. सॉस जब उबल रही थी तो इसके संपर्क में फॉयल को लाया गया.

बाद में फॉयल का वजन चेक किया गया और ये देखा गया कि उसमें धातु कितनी कम हुई. इसके अलावा ये भी जांचा गया कि खाने में कितना एल्युमिनियम पहुंचा. वैसे ये एक लैब बेस्ड रिसर्च थी और अभी इसका क्लिनिकल ट्रायल नहीं हुआ.

रिसर्च में क्या सामने आया

रिसर्च में ये सामने आया कि हर टेस्ट में फॉयल का वजन कम हो रहा था. इसका मतलब खट्टी चीजों से हो रहे रिएक्शन की वजह से एल्युमिनियम कम होकर खाने में पहुंच रहा था. आंकड़ों को देखा जाए तो हल्के टमाटर और साइट्रिक एसिड वाली सॉस के जरिए प्रति व्यक्ति 22.8 से 75.4 मिलिग्राम एल्युमिनियम पहुंचा. वहीं जब साइट्रिक एसिड की मात्रा को बढ़ाया तो ये आंकड़ा बढ़कर 40 से 132 मिलीग्राम प्रति व्यक्ति पहुंच गया.

रिसर्च ये बताती है कि जब खाने में खट्टी चीजों के रस को मिलाया जाता है तो एल्युमिनियम खाने में जरूर पहुंचता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक टमाटर का रस मिलाने से खाने का पीएच 6.9 से 4.9 हो गया. वहीं साइट्रिक एसिड की जगह विनेगर के यूज से एल्युमिनियम का रिसाव और बढ़ गया. सिरके वाली सॉस में करीब 465 मिलीग्राम प्रति व्यक्ति एल्युमिनियम खाने में पहु्ंचा. ये साइट्रिक एसिड से तीन गुना ज्यादा था. अम्लीय सामग्री, नमक और अधिक तापमान एल्युमिनियम फॉयल से धातु के रिसाव को बढ़ा देते हैं.

ओवन में पकाने से भी खतरा

जब ओवन में इन्हीं सॉस के खाने को फॉयल में चपेटकर पकाया गया तो ये लेवल करीब 361 मिलीग्राम प्रति व्यक्ति एल्युमिनियम खाने में पहुंचा. ओवन में खाना पकाने की टाइमिंग करीब 90 मिनट रखी गई. इसके अलावा कई मसालों की वजह से खाने में एल्युमिनियम मिल जाता है.

एल्युमिनियम का कितना इंटेक है सेफ?

कहा जाता है कि एक वयस्क इंसान प्रति सप्ताह प्रति किलोग्राम वजन पर 2 मिलीग्राम एल्युमिनियम इंटेक कर सकता है. अगर किसी का वजन 68 किलोग्राम है तो उसके लिए पूरे वीक की लिमिट 136 मिलीग्राम है. इसलिए सिरका या दूसरी खट्टी चीजों में खाने को पकाने से बड़ी मात्रा एल्युमिनियम शरीर में पहुंचता है. वैसे हमारा शरीर एक्स्ट्रा एल्युमिनियम को बाहर निकाल देता है लेकिन अगर लंबे समय तक ऐसा हो तो चीजें बिगड़ सकती हैं.

ये लोग बरतें ज्यादा सावधानी

  1. जिन लोगों को क्रॉनिक किडनी डिजीज है उन्हें ऐसी चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए.
  2. अगर कोई डायलिसिस ले रहा है तो उसे भी एल्युमिनियम का इंटेक सोचसमझकर करना चाहिए.
  3. छोटे बच्चे और शिशु भी कम वजन के कारण एल्युमिनियम के असर के प्रति ज्यादा सेंसिटिव माने जाते हैं.
  4. ध्यान रखें ये चीजें
  5. एल्युमिनियम फॉयल के यूज को बंद कर देना सॉल्यूशन नहीं है. अगर आप इसमें फूड को पकाना चाहते हैं तो इसमें बटर पेपर लगा दें.
  6. सैंडविच को फॉयल में लपेटना चाहते हैं तो इसमें भी पेपर का यूज बेस्ट है.
  7. चपाती बनाते ही इसे एल्युमिनियम फॉयल में पैक करने से बचें. थोड़ा ठंडा होने पर इसके फॉयल में आप पैक कर सकते हैं.
  8. खट्टी चीजों में खाने को फॉयल पेपर में पकाना चाहते हैं तो रेगुलर ऐसा करने से बचें.