नीटयूजी परीक्षा को लेकर फैली अनिश्चितता और छात्रों की बढ़ती चिंता के बीच राजस्थान के भीलवाड़ा में एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां एक 19 वर्षीय छात्र को कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए फर्जी प्रश्नपत्र बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर आरोप है कि वह ‘पेपर माफिया’ नामक टेलीग्राम चैनल संचालित कर मेडिकल अभ्यर्थियों को फर्जी रीनीट प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे पैसे वसूल रहा था।

जानकारी के अनुसार, राजस्थान पुलिस ने भीलवाड़ा के पटेल नगर इलाके में देर रात छापेमारी कर आरोपी को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली से प्राप्त इनपुट और साइबर क्राइम इंटेलिजेंस के आधार पर की गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान आकाश चौधरी के रूप में हुई है, जो खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने ‘पेपर माफिया’ नाम से टेलीग्राम चैनल बनाया था, जिसमें लगभग 52 सदस्य जुड़े हुए थे। वह प्रत्येक फर्जी प्रश्नपत्र के बदले अभ्यर्थियों से लगभग 4,000 रुपये वसूल रहा था। भुगतान QR कोड ट्रांजैक्शन के माध्यम से लिया जाता था, जिससे डिजिटल ट्रैकिंग को जटिल बनाने का प्रयास किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अमेरिकी सर्वर आधारित VPN और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल किया था। वह NEET की तैयारी से जुड़ी किताबों के पन्नों को स्कैन कर उन्हें वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र बताकर छात्रों को भ्रमित करता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से मोबाइल फोन, NEET अध्ययन सामग्री और कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के बैंक लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और संभावित नेटवर्क कनेक्शन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह किसी बड़े परीक्षा धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा है। प्रताप नगर थानाधिकारी सुनील टाडा ने बताया कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के एसमेके पोर्टल से प्राप्त संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों की सूचना के आधार पर की गई।
साथ ही, जिला विशेष टीम को भी सूचना मिली थी कि पटेल नगर क्षेत्र में एक युवक ‘रीनीट पेपर’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी कर रहा है। सत्यापन के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के परिवार की जड़ें राजस्थान के चूरू जिले के रावतसर क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और वे पिछले लगभग 25 वर्षों से भीलवाड़ा में रह रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नीटयूजी रीटेस्ट का कोई आधिकारिक प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है और सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जा रहे ऐसे सभी दावे पूरी तरह फर्जी हैं। शिक्षा विभाग ने छात्रों को टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे ‘पेपर लीक’ दावों से सतर्क रहने की सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि मूल नीटयूजी परीक्षा 3 मई को देशभर में आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों के परामर्श के बाद लिया गया था। यह पूरा मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर फैली अफवाहें और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय धोखाधड़ी नेटवर्क किस प्रकार छात्रों को निशाना बना रहे हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।



