IndiaSaudi Arabia Relation: पिछले साल सितंबर में सऊदी अरब और पाकिस्‍तान के बीच रक्षा समझौता हुआ था. इस करार के तहत एक देश पर हमला दूसरे पर भी अटैक माना जाएगा. यह एक बात हुई. अब दूसरी बात यह है कि पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के दौरान ईरान ने सऊदी अरब को निशाना बनाकर कई अटैक किए हैं.

अब करार के तहत पाकिस्‍तान को सामने आकर सऊदी का न केवल बचाव करना चाहिए, बल्कि तेहरान को मुंहतोड़ जवाब भी देना चाहिए था, पर हुआ क्‍या? पाकिस्‍तान ने ईरान की ओर से सऊदी पर किए गए हमले पर बस जुबानी जमा खर्च ही किया. जमीन पर किसी तरह का एक्‍शन नहीं लिया. स्‍वाभाविक है कि पाकिस्‍तान का यह रवैया रियाद को नागवार गुजरा. साथ ही कथित इस्‍लामिक NATO की भी पोल खुल गई. इन सबके बीच अब भारत की एंट्री हुई है. ईरान जंग के बीच भारत और सऊदी अरब के संबंध मजबूत होते जा रहे हैं.

मईजून के मुकाबले जुलाई में कच्‍चे तेल का आयात बढ़ने की पूरी संभावना है. इन सबके बीच अब राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रियाद में सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से मुलाकात की है. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा की. इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर भी विचारविमर्श हुआ.

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया X पर जारी बयान में कहा कि बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की तथा रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के उपायों पर चर्चा की. इसके अलावा पश्चिम एशिया के ताजा क्षेत्रीय घटनाक्रम, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों पर भी विस्तार से बातचीत हुई. बैठक में सऊदी विदेश मंत्रालय के राजनीतिक मामलों के उपमंत्री और राजदूत डॉ. सऊद अलसती भी मौजूद रहे.

पाकिस्‍तान से मिला धोखा, तो भारत ने थामा हाथ
अजीत डोभाल और फैसल बिन फरहान के बीच यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में सिक्‍योरिटी और एनर्जी सप्‍लाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बनी हुई हैं. ऐसे में भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक डायलॉग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दरअसल, ईरान ने जब सऊदी पर अटैक किया तो उसके बचाव में पाकिस्‍तान सामने नहीं आया. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इस्‍लामाबाद ने डिफेंस पैक्‍ट के तहत वादा किया था कि बाहरी हमले की स्थिति में वह बचाव के लिए सामने आएगा, जबकि ईरानी अटैक के दौरान पाकिस्‍तान ने ऐसा कुछ नहीं किया. ऐसे में भारत और सऊदी अरब द्वारा स्‍ट्रैटजिक रिलेशन को मजबूत करने का वादा करना अपने आप में महत्‍वपूर्ण है. बदले माहौल में सऊदी अरब के लिए पाकिस्‍तान पर भरोस करना अब संभव नहीं रह गया है.

भारत और सऊदी अरब के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं. दिसंबर 2025 में भारत के सऊदी अरब में राजदूत सुहेल एजाज खान और सऊदी विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल मामलों के उपमंत्री अब्दुलमजीद बिन राशिद अलसमारी ने द्विपक्षीय वीजा छूट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते का उद्देश्य भारतसऊदी रणनीतिक साझेदारी परिषद के तहत दोनों देशों के बीच आधिकारिक आवाजाही को और सुगम बनाना है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापार और निवेश के क्षेत्र में मजबूत सहयोग है. सऊदी अरब भारत के लिए कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है. इसके अलावा रक्षा उद्योग, क्षमता निर्माण और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार विस्तार पा रही है.

सऊदी अरब में लगभग 27 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिन्हें दोनों देशों के बीच संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है. भारतीय समुदाय ने सऊदी अरब के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वहां उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है. ऐसे में एनएसए डोभाल की यह यात्रा भारतसऊदी संबंधों को और अधिक गहराई देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.