Toll Calculation New Rules: राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित रूप से सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है. यदि आपके रास्ते में लंबेलंबे पुल, सुरंगें , फ्लाईओवर या एलिवेटेड स्ट्रक्चर आते हैं, तो अब आपको पहले के मुकाबले काफी कम टोल टैक्स चुकाना होगा.

दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में बड़ा संशोधन किया है. इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नई दरों के अनुसार टोल की समीक्षा करने और संशोधन प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं.
ये है नया टोल फॉर्मूला
संशोधित राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम के तहत टोल दरों को तय करने के लिए सरकार ने दो अलगअलग फॉर्मूले तैयार किए हैं, जिनके आधार पर NHAI को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जिस फॉर्मूले से कुल लागत कम आएगी, उसी के हिसाब से जनता से शुल्क वसूला जाएगा. पहले फॉर्मूले के तहत, किसी भी विशेष स्ट्रक्चर जैसे पुल या सुरंग की लंबाई को 10 से गुणा किया जाता है और फिर उसमें राजमार्ग के बाकी बचे सामान्य हिस्से की लंबाई जोड़ दी जाती है. वहीं, दूसरे फॉर्मूले में, पूरे हाईवे सेक्शन यानी पुल और सामान्य सड़क दोनों की कुल लंबाई को सीधे 5 गुना कर दिया जाता है. इसके अलावा, जिन पुलों की लंबाई 60 मीटर या उससे कम होगी, उन्हें अतिरिक्त गणना से राहत मिलेगी. इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ड्राइवरों और आम जनता पर टोल का आर्थिक बोझ कम करना और पारदर्शी तरीके से शुल्क तय करना है.
क्यों खर्चीला था पुराना नियम?
आमतौर पर किसी भी हाईवे पर पुल, टनल या एलिवेटेड रोड का निर्माण और रखरखाव करना सामान्य सड़क की तुलना में बेहद खर्चीला होता है. यही वजह थी कि पुराने नियमों के तहत ऐसे स्ट्रक्चर्स की वास्तविक लंबाई को 10 गुना मानकर टोल टैक्स की गणना की जाती थी. अगर किसी हाईवे पर केवल 5 किलोमीटर लंबी टनल या एलिवेटेड रोड होती थी, तो टोल वसूलते समय उसे 50 किलोमीटर लंबी सामान्य सड़क के बराबर मान लिया जाता था. वहीं, एक्सप्रेसवे और बड़े शहरी एक्सप्रेसवे पर जहां कई किलोमीटर लंबे ब्रिज बने हैं, वहां इस नियम के कारण यात्रियों की जेब पर काफी भारी बोझ पड़ता था. इसी समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने टोल संशोधन नियम जारी किए हैं.
उदाहरण से ऐसे समझें बचत
संशोधित नियमों के असर को समझने के लिए इसे दो अलगअलग तरीकों से देखा जा सकता है. पहले मामले में, अगर 40 किलोमीटर लंबे हाईवे पर 30 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड है और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है, तो पुराने तरीके से कुल 310 किलोमीटर का भारीभरकम टोल लगता था, लेकिन नए 5गुना नियम के तहत कुल लंबाई केवल 200 किलोमीटर बनती है, जिससे सीधे तौर पर जनता को 310 किलोमीटर के बजाय सिर्फ 200 किलोमीटर की दूरी का ही शुल्क देना होगा.
दूसरे मामले में, जहां कम एलिवेटेड हिस्सा हो जैसे 40 किलोमीटर के हाईवे में 10 किलोमीटर पुल और 30 किलोमीटर सामान्य सड़क है. वहां पहले फॉर्मूले से 130 किलोमीटर यानी और दूसरे फॉर्मूले से 200 किलोमीटर की दूरी आती है. चूंकि नियम के अनुसार सबसे कम लागत वाला फॉर्मूला चुनना है, इसलिए वाहन चालकों से केवल 130 किलोमीटर का ही टोल वसूला जाएगा. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इस तरह दोनों ही स्थितियों में कम दूरी वाला विकल्प चुनकर वाहन चालकों को सीधी आर्थिक राहत दी जा रही है. इन दोनों फॉर्मूलों के तुलनात्मक रूप से देखें, तो कुल दूरी में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आ रही है, जिससे टोल रेट्स में भी 40% तक की बड़ी राहत मिलेगी.



