फूड रेगुलेटर ने पैकेट से “एनर्जी ड्रिंक्स” लेबल हटाने के लिए 90 दिन की डेडलाइन तय की है. इससे देश भर के डिस्ट्रीब्यूटर्स में घबराहट फैल गई है और उन्होंने कंपनियों से एनर्जी ड्रिंक्स का मौजूदा स्टॉक लेने से इनकार कर दिया है. रिटेल दुकानों पर रेडबुल, पेप्सिको की स्टिंग, मॉन्स्टर, हेल, कैम्पा एनर्जी और कोकाकोला की थम्स अप चार्ज्ड जैसे दर्जनों ब्रांड्स की कमी हो गई है. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार एग्जीक्यूटिव्स का कहना है कि यह मामला FSSAI और कंपनियों के बीच टकराव का कारण बन गया है. रेगुलेटर ने प्रोडक्ट के नाम और लेबलिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है और कहा है कि वह ऐसी किसी कैटेगरी को मान्यता नहीं देता है.

स्टॉक हो जाएगा बेकार

एक बड़ी एनर्जी ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनी के एग्जीक्यूटिव ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि​ इस कैटेगरी का भविष्य अधर में लटका है. कई डिस्ट्रीब्यूटर्स कंपनियों से मौजूदा स्टॉक नहीं उठा रहे हैं. साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट में भी “एनर्जी ड्रिंक्स” लेबल वाले हजारों कैन फंसे हुए हैं. वास्तव में ज्यादातर कैन पश्चिम एशिया से इंपोर्ट किए जाते हैं, वो सब बेकार हो जाएंगे. रेगुलेटर के लेबल हटाने के आदेश के बीच कई लोगों ने कंपनियों से मौजूदा स्टॉक लेने से इनकार कर दिया है. हालांकि कंपनियों ने 90 दिन की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन देश के फूड रेगुलेटर ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ ने जिसने 2 जुलाई को यह निर्देश जारी किया था इसे मानने से इनकार कर दिया है.

13 हजार करोड़ का सालाना मार्केट

भारत का एनर्जी ड्रिंक्स मार्केट, जिसकी सालाना बिक्री का अनुमान 13,000 करोड़ रुपए है, तेजी से बढ़ रहा है. खासकर युवा कस्टमर्स के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ने से इसकी सेल्स में 2025 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है. दो अन्य एग्जीक्यूटिव्स ने बताया कि अलगअलग राज्यों के FDA अधिकारियों ने डिस्ट्रीब्यूटर के गोदामों से स्टॉक जब्त करना शुरू कर दिया है, हालांकि निर्देश अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है. वैसे रेडबुल, पेप्सिको, रिलायंस और कोकाकोला की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. वहीं मॉन्स्टर और हेल एनर्जी ड्रिंक्स के एग्जीक्यूटिव्स भी शांत बैठे हुए हैं.

आईबीए ने FSSAI को लिखा लेटर

FSSAI के CEO रजित पुन्हानी को लिखे हालिया पत्र में इंडियन बेवरेज एसोसिएशन की सेक्रेटरी जनरल गुनवीना चड्ढा ने रेगुलेटर से आग्रह किया कि नए निर्देश को लागू करने से पहले ‘इंडस्ट्री से बातचीत और अपना पक्ष रखने का मौका’ दिया जाए. चड्ढा के पत्र में यह भी कहा गया है कि “ये स्टैंडर्ड्स कई सालों के विचारविमर्श के बाद पब्लिश किए गए थे, जिसमें रिस्क असेसमेंट, कई स्टेकहोल्डर्स से बातचीत और एक एक्सपर्ट ग्रुप की सिफारिशें शामिल थीं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। जुलाई में, FSSAI ने कंपनियों को ऐसे प्रोडक्ट्स पर “एनर्जी ड्रिंक” शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया. FSSAI ने कहा कि भारत में “एनर्जी ड्रिंक” कैटेगरी के लिए कोई तय स्टैंडर्ड नहीं है और लेबल पर “शरीर और दिमाग में नई जान डालना” या “एनर्जी बढ़ाना” जैसे दावे ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं.