अगर आपने 31 जुलाई 2026 की आखिरी तारीख से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल कर दिया है, तो यह अच्छी बात है. समय पर ITR भरने से आप टैक्स नियमों का पालन करने वालों में शामिल हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब आपको इनकम टैक्स विभाग की तरफ से कोई नोटिस नहीं आएगा.

इनकम टैक्स विभाग हर साल कई टैक्सपेयर्स को अलगअलग कारणों से नोटिस भेजता है. इसका सबसे आम कारण ITR में दी गई जानकारी और विभाग के पास मौजूद जानकारी के बीच अंतर होना है. अगर आपके ITR में दी गई जानकारी Form 16, Form 26AS या AIS में मौजूद जानकारी से मेल नहीं खाती है, तो विभाग आपसे जवाब मांग सकता है.
आइए जानते हैं ऐसी 6 वजहें, जिनके कारण समय पर ITR भरने के बाद भी आपको इनकम टैक्स नोटिस मिल सकता है.
1. ITR और Form 16 में आय का अंतर
इनकम टैक्स नोटिस आने की सबसे आम वजह आय की जानकारी में अंतर हो सकता है. उदाहरण के लिए, अगर आपने ITR में अपनी सैलरी कुछ और बताई है, जबकि आपके Form 16 या नियोक्ता की TDS रिपोर्ट में सैलरी की रकम अलग है, तो विभाग आपसे इसका कारण पूछ सकता है. इसी तरह AIS में दिखाई गई आय और ITR में बताई गई आय अलग होने पर भी नोटिस आ सकता है.
2. बैंक खाते की ब्याज आय छूट जाना
कई लोग सैलरी या बिजनेस की आय तो ITR में दिखा देते हैं, लेकिन बैंक से मिलने वाली ब्याज की रकम बताना भूल जाते हैं.
सेविंग अकाउंट, FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट और RD यानी रिकरिंग डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज भी आय का हिस्सा है. बैंक और वित्तीय संस्थान इस जानकारी को इनकम टैक्स विभाग के साथ साझा करते हैं और यह जानकारी AIS में दिखाई दे सकती है. अगर AIS में ब्याज की आय दिखाई दे रही है, लेकिन आपने ITR में इसे नहीं बताया है या कम रकम बताई है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है.
3. TDS या TCS में गड़बड़ी
अगर आपने ITR में जितने TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स या TCS यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स का क्रेडिट लिया है, वह Form 26AS या AIS में दिखाई देने वाली रकम से ज्यादा है, तो भी नोटिस आ सकता है. इसलिए ITR जमा करने से पहले Form 26AS और AIS में मौजूद TDS/TCS की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए.
4. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन
बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाएं बड़ी रकम वाले कई लेनदेन की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को देती हैं. ऐसी जानकारी AIS में भी दिखाई दे सकती है. अगर आपके बैंक खाते में बड़ी रकम का कैश जमा हुआ है या कोई बड़ा वित्तीय लेनदेन हुआ है, लेकिन आपकी घोषित आय उसे सही तरीके से सपोर्ट नहीं करती, तो विभाग आपसे इसके बारे में जानकारी मांग सकता है. इसलिए बड़े लेनदेन का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है.
5. शेयर या प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन नहीं बताया
अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या कोई अन्य पूंजीगत संपत्ति बेची है, तो उससे होने वाले मुनाफे की जानकारी ITR में देना जरूरी हो सकता है. इन लेनदेन की जानकारी ब्रोकर, रजिस्ट्रार या अन्य संस्थानों के जरिए इनकम टैक्स विभाग तक पहुंच सकती है. अगर आपने लेनदेन तो बताया लेकिन कैपिटल गेन की गणना गलत कर दी या टैक्स योग्य मुनाफा ITR में नहीं दिखाया, तो नोटिस आ सकता है.
6. विभाग के डेटा से ITR की जानकारी मैच न होना
कई बार टैक्सपेयर को लगता है कि उसने सभी जरूरी जानकारी ITR में भर दी है, लेकिन विभाग के पास मौजूद अलगअलग स्रोतों के डेटा से उसका रिटर्न मैच नहीं करता. AIS, Form 26AS, बैंक, नियोक्ता, ब्रोकर और अन्य रिपोर्टिंग संस्थानों से मिली जानकारी को विभाग जांच सकता है. अगर इनमें से किसी स्रोत की जानकारी और आपके ITR में अंतर मिलता है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है.



