भारत में हमेशा से ही आर्थिक असमानता की दो अलगअलग तस्वीरें देखने को मिलती रही हैं. प्रॉपर्टी बाजार में भी यह खाई अब बिल्कुल साफ नजर आने लगी है. एक तरफ भारत का वह बड़ा तबका है जो अपने जीवन भर की जमापूंजी लगाकर एक अदद सस्ते और किफायती घर की तलाश में दरदर भटक रहा है. वहीं, दूसरी तरफ एक ऐसा वर्ग भी है, जो अपने रहने के लिए ऐसे घर खरीद रहा है जिनकी कीमत किसी प्राइवेट जेट से भी कहीं ज्यादा है. साल 2025 के बाद से देश के अल्ट्रारिच यानी बेहद अमीर लोगों में महंगे घर खरीदने की जैसे होड़ सी मच गई है. बड़े कारोबारी घराने, मशहूर उद्यमी और नामी कंपनियों के टॉप अधिकारी ऐसे घरों के लिए 100 करोड़ से लेकर 600 करोड़ रुपये तक के चेक बिना किसी झिझक के साइन कर रहे हैं.

बदल रही है लग्जरी घरों की परिभाषा
आजकल सबसे ज्यादा चर्चा उद्यमी मानव सरदाना की हो रही है. उन्होंने हाल ही में 271 करोड़ रुपये की भारीभरकम कीमत चुकाकर एक शानदार पेंटहाउस खरीदा है. इस खबर में सबसे दिलचस्प बात यह नहीं है कि इतनी बड़ी रकम खर्च की गई है, बल्कि यह है कि यह घर समंदर किनारे बसे मुंबई शहर में नहीं है. मानव सरदाना ने ये करोड़ों का घर दिल्ली से सटे गुरुग्राम की गगनचुंबी इमारतों में खरीदा है. उनका यह पेंटहाउस गुरुग्राम के बेहद पॉश प्रोजेक्ट ‘डीएलएफ द डहेलियास’ में है.
इसी प्रोजेक्ट में दिग्गज निवेशक मधुसूदन केला ने भी करीब 121 करोड़ रुपये में एक शानदार अपार्टमेंट खरीदा है. उनके अलावा, बर्कशायर हैथवे के वाइस चेयरमैन अजीत जैन ने भी ‘डीएलएफ द डहेलियास’ में 85 करोड़ रुपये का घर लिया है. अगर साल 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो गुरुग्राम ने 10 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा कीमत वाले घरों की बिक्री में मुंबई को भी पीछे छोड़ दिया था. 2025 में गुरुग्राम में 10 करोड़ से ऊपर के 1,494 घर बिके, जिनकी कुल कीमत 24,120 करोड़ रुपये रही. यह आंकड़ा साल 2023 के 4,004 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग छह गुना ज्यादा है. यहां तक कि दिल्ली के लुटियंस इलाके में भी किराए के मकानों की मांग इतनी ज्यादा है कि वहां के बंगलों का किराया 20 लाख रुपये प्रति महीने तक पहुंच गया है.
मुंबई का दबदबा आज भी कायम है
भले ही गुरुग्राम लक्जरी घरों के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन जब बात 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के सुपरलक्जरी घरों की आती है, तो मुंबई आज भी बेताज बादशाह है. सिर्फ वर्ली इलाके की ही बात करें, तो पिछले 24 महीनों में वहां 40 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले 30 से अधिक घर बिके हैं. इन सौदों की कुल कीमत 5,500 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है.
मुंबई के कुछ बड़े सौदों पर नजर डालें तो आंकड़े हैरान करने वाले हैं. साल 2025 में यूएसवी की चेयरपर्सन लीना गांधी तिवारी ने वर्ली के ‘नमन ज़ाना’ प्रोजेक्ट में दो सीफेसिंग डुप्लेक्स अपार्टमेंट खरीदे, जिनकी कीमत 639 करोड़ रुपये बताई गई. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। मशहूर बैंकर उदय कोटक और उनके परिवार ने मुंबई के शिव सागर में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के कई अपार्टमेंट खरीदे. वहीं, तान्या दुबाश ने साल 2025 में ‘नमन ज़ाना’ में 226 करोड़ रुपये का डुप्लेक्स लिया और 2026 में 294 करोड़ रुपये से ज्यादा के दो और अपार्टमेंट खरीदे.
इसी तरह रवि अग्रवाल के परिवार ने कल्पतरु प्रिव में 227 करोड़ रुपये, श्रीगोपाल काबरा ने ओबेरॉय थ्री सिक्सटी वेस्ट में 198 करोड़ रुपये और राधी नवानी ने नमन ज़ाना में 162.2 करोड़ रुपये के घर खरीदे हैं. इसके अलावा बॉलीवुड की जानीमानी हस्तियां भी पीछे नहीं हैं. एक्ट्रेस कृति सैनन ने ‘सुप्रीम प्राणा’ में 78.2 करोड़ रुपये का डुप्लेक्स पेंटहाउस खरीदा, जबकि मशहूर गायिका श्रेया घोषाल ने वर्ली में 60 करोड़ रुपये में दो अपार्टमेंट लिए हैं.
20 करोड़ से 50 करोड़ वाले घरों की बंपर बिक्री
नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि देश के बड़े शहरों में 20 करोड़ से 50 करोड़ रुपये के घरों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है. साल 2026 की पहली छमाही में ऐसे 371 घर बिके, जो पिछले साल की इसी अवधि में बिके 181 घरों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा हैं. इस श्रेणी में सालाना 105 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन 371 घरों में से 214 घर अकेले मुंबई में बिके, जो कुल बिक्री का 57 फीसदी है.
50 करोड़ रुपये से ज्यादा महंगे घरों की बात करें तो 2026 के शुरुआती छह महीनों में पूरे देश में ऐसे 35 मकान बिके. इनमें से 23 मकान मुंबई में और बाकी 12 दिल्लीएनसीआर में खरीदे गए. अगर 100 करोड़ रुपये के घरों की बात करें, तो अब ये कोई दुर्लभ बात नहीं रह गई है. 2024 में 40 करोड़ से महंगे 59 घर बिके थे, जिनमें से 17 सौदों की कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा थी.
डेवलपर्स भी इस मांग को देखते हुए बड़े दांव खेल रहे हैं. सनटेक रियल्टी ने 100 करोड़ से 500 करोड़ रुपये के बीच की कीमत वाले अल्ट्रालक्जरी प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है, जिनकी कुल विकास कीमत करीब 20,000 करोड़ रुपये आंकी गई है.
किफायती घरों का सपना हो रहा है दूर
इन सबके बीच 20 करोड़ रुपये से कम वाले बाजार में एक अलग ही बदलाव देखने को मिल रहा है. 2026 की पहली छमाही में कुल घरों की बिक्री में 1 करोड़ रुपये से महंगे घरों की हिस्सेदारी 54 फीसदी रही. सबसे ज्यादा बिक्री 1 से 2 करोड़ रुपये वाले सेगमेंट में हुई, जहां 50,488 घर बिके.
लेकिन कहानी का दूसरा पहलू आम आदमी के लिए थोड़ा परेशान करने वाला है. 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले किफायती घरों की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. कुल बिक्री में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी अब मात्र 19 फीसदी रह गई है, जिसमें सिर्फ 32,063 यूनिट ही बिक पाए. 50 लाख से 1 करोड़ रुपये वाले घरों की बिक्री में भी 5 फीसदी की कमी आई है.
नाइट फ्रैंक के अधिकारी गुलाम जिया का मानना है कि महंगे घरों की बढ़ती मांग यह दिखाती है कि अमीर लोगों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है. लेकिन इसके साथ ही यह सच्चाई भी सामने आ रही है कि सालों से प्रॉपर्टी की कीमतों में हो रहे लगातार इजाफे ने सस्ते और किफायती घरों को आम परिवारों की पहुंच से बहुत दूर कर दिया है. आज के समय में भारत का हाउसिंग मार्केट पूरी तरह से दो हिस्सों में बंट चुका है. एक तरफ वो बाजार है जो आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है, और दूसरी तरफ वो बाजार है जहां अमीर लोग सिर्फ एक खास लोकेशन और रुतबे के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार बैठे हैं.



