एक समय दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातकों में शामिल भारत अब ऐसे दौर में प्रवेश करता दिख रहा है, जहां आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक चीनी निर्यात बाजार में उसकी मौजूदगी लगभग समाप्त हो सकती है। मौसम संबंधी चुनौतियों और ऊर्जा नीतियों के संयुक्त प्रभाव ने देश के चीनी उद्योग के सामने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसने न केवल घरेलू आपूर्ति बल्कि वैश्विक चीनी व्यापार की दिशा को भी प्रभावित करने की आशंका बढ़ा दी है।

उद्योग जगत के अधिकारियों, व्यापारिक सूत्रों, किसानों और सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों के अनुसार भारत कम से कम अगले तीन चीनी सीजन तक बड़े पैमाने पर चीनी निर्यात करने की स्थिति में नहीं रहेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह संभावित मजबूत एल नीनो प्रभाव और एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के बढ़ते उपयोग को माना जा रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों ने वर्ष 2026 के दूसरे हिस्से में मजबूत एल नीनो विकसित होने की आशंका जताई है। भारत में एल नीनो का सीधा संबंध कमजोर मानसून से माना जाता है। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कम वर्षा के कारण गन्ने की बुवाई में देरी, फसल की उत्पादकता में गिरावट और कुल उपलब्धता में कमी आने की संभावना है, जिसका असर सीधे चीनी उत्पादन पर पड़ेगा।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति भी चीनी उद्योग के लिए नई चुनौती बनकर उभरी है। भारत कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इसके चलते बड़ी मात्रा में गन्ना और चीनी सिरप एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है। परिणामस्वरूप चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कच्चे माल में लगातार कमी आ रही है।

व्यापारिक अनुमानों के अनुसार वर्ष 202627 में भारत का कुल चीनी उत्पादन लगभग 2.79 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 2.85 करोड़ टन तक पहुंच सकती है। इसका अर्थ है कि देश जितनी चीनी पैदा करेगा, उससे अधिक की खपत करेगा। इस स्थिति से चीनी का भंडार लगातार घट सकता है और बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत की निर्यात क्षमता में आई गिरावट पहले से ही दिखाई देने लगी है। वर्ष 202223 तक के पांच सीजन में भारत औसतन 68 लाख टन चीनी का वार्षिक निर्यात करता था, जो वैश्विक चीनी निर्यात का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा था। लेकिन मौजूदा सीजन में यह आंकड़ा घटकर केवल 8 लाख टन के आसपास रह गया है। घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने और स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने मई 2026 में चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जो 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की परिस्थितियां प्रतिकूल बनी रहती हैं और एथेनॉल की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो भारत को वर्ष 202728 तक चीनी आयात करने की नौबत भी आ सकती है। ऐसा हुआ तो लगभग एक दशक बाद भारत फिर से चीनी आयातक देश बन जाएगा, जो वैश्विक बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव होगा।

भारत की अनुपस्थिति वैश्विक चीनी बाजार पर भी व्यापक असर डाल सकती है। दुनिया के प्रमुख चीनी निर्यातकों में शामिल ब्राजील और थाईलैंड को इससे निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि इन देशों के सामने भी चुनौतियां कम नहीं हैं। ब्राजील भी अपने गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में लगा रहा है, जबकि थाईलैंड की फसल भी एल नीनो के कारण प्रभावित हो सकती है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति और अधिक सीमित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आने की आशंका है।

मुंबई स्थित कमोडिटी ट्रेडिंग फर्म एमईआईआर कमोडिटीज इंडिया के प्रबंध निदेशक राहिल शेख के अनुसार, भारत में पहले से ही चीनी की उपलब्धता दबाव में है और अब एल नीनो एक बड़े जोखिम के रूप में उभर रहा है। उनका कहना है कि यदि अनुमान के अनुरूप बारिश नहीं हुई तो गन्ने की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे, जिसके चलते भारत कम से कम तीन वर्षों तक वैश्विक चीनी निर्यात बाजार से बाहर रह सकता है।

भारत में चीनी केवल एक कृषि उत्पाद नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील वस्तु है। देश में मिठाइयों की व्यापक खपत होती है और बड़ी आबादी के लिए चीनी कैलोरी का एक सस्ता स्रोत भी है। ऐसे में घरेलू आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित रखना सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी।

कुल मिलाकर भारत का चीनी उद्योग इस समय दोहरे दबाव का सामना कर रहा है। एक तरफ जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसी मौसमीय चुनौतियां हैं, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा सुरक्षा के लिए बढ़ती एथेनॉल मांग है। यदि ये परिस्थितियां जारी रहती हैं तो भारत का वैश्विक चीनी व्यापार में योगदान आने वाले वर्षों में काफी सीमित हो सकता है, जिससे न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के चीनी बाजार की दिशा बदल सकती है।