यूपी लोक सेवा आयोग की एपीओ भर्ती2025 में आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में यूपी लोक सेवा आयोग ने हलफनामा दाखिल किया. आयोग ने हलफनामे में बताया कि अंतिम ओपन कैटेगरी अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 321 OBC, 131 EWS तथा 43 SC अभ्यर्थी हैं.

आयोग के अनुसार इन अभ्यर्थियों को अंतिम चयन के समय संबंधित विज्ञापन एवं नियमों के अनुसार अनारक्षित श्रेणी में माइग्रेट किया जाएगा. जस्टिस मनीष कुमार निगम की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई. याचिका में रिजर्वेशन नियमों का उल्लंघन का आरोप है और याचिका में प्रीलिम्स रिजल्ट को चुनौती दी गई है.

के 09 जनवरी 2020 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम को भी चैलेंज किया गया है. यूपी एपीओ 2025 की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को दोबारा घोषित करने की मांग की गई है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। कोर्ट में याचिका लंबित रहने के दौरान ही यूपी लोक सेवा आयोग ने 28 से 30 जून के बीच मुख्य परीक्षा कराया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

हाई कोर्ट ने आयोग द्वारा दाखिल हलफनामे को पूर्व में दिए गए निर्देश का पूर्ण अनुपालन नहीं माना. इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मांगा है.

कोर्ट ने आयोग को विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट सूची तैयार करते समय ओपन कैटेगरी में केवल अनारक्षित अभ्यर्थियों को रखा गया था या आरक्षित एवं अनारक्षित दोनों वर्गों के अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर ओपन कैटेगरी की सूची तैयार की गई थी.

कोर्ट ने ये भी पूछा है कि 321 ओबीसी कैंडिडेट्स और 43 एससी कैंडिडेट्स को जनरल कैटेगरी में स्थान दिया गया है कि नहीं. 21 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे मामले की अगली सुनवाई होगी.

ओपन कैटेगरी में माइग्रेशन का मुद्दा उठा

अब आयोग द्वारा दाखिल किए जाने वाले अगले हलफनामे से यह स्पष्ट होने की संभावना है कि APO2025 की प्रारंभिक परीक्षा में ओपन कैटेगरी की मेरिट सूची किस पद्धति से तैयार की गई थी और अधिक अंक प्राप्त करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को किस कैटेगरी में रखा गया है

इस आदेश से APO2025 की चयन प्रक्रिया में मेरिट बनाम कैटेगरी तथा आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के ओपन कैटेगरी में माइग्रेशन का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है. याची पंकज वर्मा और 2 अन्य की ओर से दाखिल है. याचिका पर अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने याचियों का पक्ष रखा, जबकि लोक सेवा आयोग की तरफ से सीनियर एडवोकेट अनूप त्रिवेदी और अवनीश त्रिपाठी ने पक्ष रखा.

इनपुटः मनीष वर्मा