मंगलवार को लंदन की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बैंक ऑफ़ इंडिया को 10.7 मिलियन डॉलर चुकाने का आदेश दिया. अदालत ने उन्हें उन लोन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जिनके लिए वह गारंटर थे. यह मामला उन लोन से जुड़ा है जो बैंक ऑफ़ इंडिया ने जुलाई 2012 में दुबई में ‘डायमंड FZE’ को दिए थे. यह कंपनी नीरव मोदी की थी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर यूके कोर्ट की ओर से नीरव मोदी के खिलाफ कौन सा आदेश दिया है.

नीरव मोदी बनाम बैंक ऑफ इंडिया
नीरव मोदी, जिन्होंने अगस्त 2013 में लोन के लिए पर्सनल गारंटी दी थी, ने लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में तर्क दिया कि यह गारंटी लागू करने योग्य नहीं थी और उन्हें बैंक से कभी भी कोई वैध मांग नहीं मिली थी. सुनवाई के दौरान, नीरव मोदी ने यह भी तर्क दिया कि लोन को खत्म करने के लिए कोई ठोस प्रतिकूल कारण नहीं था.
मंगलवार को जज साइमन टिंकलर ने कहा कि बैंक ऑफ इंडिया का दावा वैध और लागू करने योग्य है. जज ने कहा कि मिस्टर मोदी बैंक को 4.1 मिलियन डॉलर की बकाया मूल राशि के लिए पर्सनल गारंटी के तहत ज़िम्मेदार हैं. इसमें बैंक द्वारा तय आधार पर गणना किया गया ब्याज भी जोड़ा जाएगा. मिस्टर मोदी ने ऐसा कोई बचाव पेश नहीं किया जिससे यह पता चले कि बैंक उस राशि का हकदार क्यों नहीं था.
नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण
नीरव मोदी, जिन्हें 19 मार्च 2019 को गिरफ्तार किया गया था, अभी लंदन की जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. अप्रैल में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए प्रतिबद्ध है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, “हम प्रत्यर्पण अनुरोध को लेकर UK के अधिकारियों के संपर्क में हैं. हम समझते हैं कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही चल रही है. लेकिन मैं आपको बता दूं कि भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि भगोड़ों को वापस भारत लाया जाए और वे देश के कानून का सामना करें.
मार्च में, UK हाई कोर्ट ने भारतीय सरकार द्वारा दिए गए “आश्वासनों की गुणवत्ता” के आधार पर भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ़ अपने मामले को फिर से खोलने की याचिका खारिज कर दी थी. नीरव मोदी की अपील को फिर से शुरू करने की अर्ज़ी, डिफेंस कंसल्टेंट संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले में फरवरी 2025 के एक फैसले पर आधारित थी. उस फैसले में हाई कोर्ट ने भारतीय एजेंसियों द्वारा कबूलनामा हासिल करने के लिए टॉर्चर के इस्तेमाल को “आम और व्यापक” बताया था. अप्रैल में, फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने उनके मामले को सार्वजनिक जांच से हटाकर उन्हें गुमनामी दी थी.
पंजाब नेशनल बैंक घोटाला
55 वर्षीय ज्वैलर, जिसे भारत में भगोड़ा घोषित किया गया है, पर अपने चाचा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप है. CBI के अनुसार, अकेले नीरव मोदी ने कुल गबन की गई रकम में से 6,498.20 करोड़ रुपए का गबन किया था. उनके प्रत्यर्पण का आदेश शुरू में 2021 में UK के गृह सचिव ने दिया था, लेकिन तब से यह मामला अधर में लटका हुआ है.



