नई दिल्ली । फीफा में इन दिनों अंदरूनी खींचतान बढ़ती नजर आ रही है। संगठन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर केविन लैमौर ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो की एक बड़ी व्यावसायिक योजना की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी। इसके कुछ ही हफ्तों बाद 17 अगस्त 2026 को फीफा और लैमौर के बीच कामकाजी रिश्ता खत्म हो गया। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। फीफा ने इसे ‘parting ways’ बताया, जबकि कई रिपोर्टों में इसे बर्खास्तगी बताया गया है।

आखिर विवाद क्या था?
इन्फेंटिनो की योजना फीफा के वर्ल्ड कप और अन्य टूर्नामेंटों से जुड़े कमर्शियल अधिकारों के लिए करीब 20 अरब डॉलर की एक नई इकाई बनाने और उसमें लगभग 20 फीसदी हिस्सेदारी निजी निवेशकों को बेचकर करीब 4.2 अरब डॉलर जुटाने की थी। इस प्रस्ताव को फीफा के भीतर और बाहर काफी विरोध का सामना करना पड़ा।
लैमौर ने 31 जुलाई को इस योजना के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि फीफा के कर्मचारियों को योजना को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और वे खुद को “deceived” यानी गुमराह महसूस कर रहे थे। उन्होंने इसे एक व्यक्ति की परियोजना बताते हुए संगठन के हितों और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
नौकरी जाने का अंदेशा पहले ही था
लैमौर को अंदाजा था कि इन्फेंटिनो की आलोचना करने का उनके पद पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर अपनी बात रखने की वजह से नौकरी जाती है, तो वह उस फैसले को स्वीकार करेंगे।
कुछ ही समय बाद फीफा ने पुष्टि की कि 17 अगस्त को लैमौर के साथ कामकाजी संबंध समाप्त हो गए। संगठन ने उनके दो साल के योगदान के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन उनके जाने की विस्तृत वजह नहीं बताई।
इन्फेंटिनो की योजना भी हुई वापस
लैमौर अकेले वरिष्ठ अधिकारी नहीं थे जिन्होंने प्रस्ताव का विरोध किया। इन्फेंटिनो के वरिष्ठ सलाहकार कार्लोस कॉर्डेइरो ने भी योजना को लेकर इस्तीफा दे दिया था। बढ़ते विरोध के बीच इन्फेंटिनो ने प्रस्ताव वापस ले लिया।
लैमौर के जाने से इन्फेंटिनो के नेतृत्व और फीफा के अंदर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर 2027 में होने वाले फीफा अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले यह घटनाक्रम उनके लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा सकता है।



