Fatehpur News: उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के असोथर क्षेत्र में इन दिनों आस्था और तपस्या का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. यमुना नदी के किनारे एक नागा संत पिछले कई दिनों से कठिन साधना में लीन हैं. ऐझी मजरे कोटवा गांव में जोगनी माता मंदिर के पास उदासी पंथ से जुड़े संत कंगाल दास बाबा ने चार माह तक लगातार खड़े रहकर तपस्या करने का संकल्प लिया है. संत ने 3 अगस्त से दोनों पैरों पर खड़े होकर अपनी साधना शुरू की है.

यमुना तट पर संत कंगाल दास बाबा की यह कठिन तपस्या श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है. दूरदूर से ग्रामीण यमुना किनारे पहुंच रहे हैं और संत के दर्शन कर उनका आशीर्वाद ले रहे हैं. संत के मुताबिक यह तपस्या किसी व्यक्तिगत इच्छा के लिए नहीं, बल्कि जनकल्याण की भावना से की जा रही है.

एक पैर पर खड़े होकर कर रहे कठिन साधना

संत बताते हैं कि तपस्या के दौरान वह दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं और अधिकांश समय भगवान के भजन और साधना में लीन रहते हैं. उनकी दिनचर्या भी बेहद कठिन है. भोजन करने से लेकर दैनिक क्रियाएं तक वह खड़ेखड़े ही पूरी करते हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। लगातार कई दिनों तक खड़े रहने के कारण उनके पैरों में सूजन भी आ गई है, लेकिन आस्था और संकल्प के आगे उन्होंने कठिनाइयों को स्वीकार कर लिया है.

संत कंगाल दास बाबा मूल रूप से हमीरपुर जिले के मौदहा के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी. वर्ष 1992 में वह पुलिस भर्ती में भी शामिल हुए, लेकिन इसके बाद उनका मन सांसारिक जीवन से हट गया और वर्ष 1995 में उन्होंने संत जीवन अपना लिया.

चार महीने तक करेंगे तपस्या

संत के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस तरह की कठिन साधना की है. इससे पहले वह महोबा जिले के कटरा और बांदा जिले के सिंधन पैलानी में भी यमुना नदी किनारे चारचार माह तक खड़े रहकर तपस्या कर चुके हैं. अब उनकी साधना का अगला पड़ाव प्रयागराज होगा. चार माह की तपस्या पूरी करने के बाद संत यमुना नदी के किनारेकिनारे भ्रमण करते हुए प्रयागराज पहुंचेंगे और त्रिवेणी संगम पर अपनी तपस्या का समापन करेंगे.

यमुना की शांत धारा के किनारे खड़े संत की यह कठिन साधना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. कोई इसे भक्ति और आस्था की शक्ति मान रहा है तो कोई इसे संत के दृढ़ संकल्प और त्याग की मिसाल बता रहा है. फिलहाल यमुना तट पर संत कंगाल दास बाबा की तपस्या श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का केंद्र बनी हुई है.