Featured Image

राजस्थान के पाली जिले में एक 17 वर्षीय पोते ने अपने ही दादा की हत्या कर डाली. इस घटना में पोते के दोस्त ने भी उसका साथ दिया. पुलिस ने जब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा तो बुजुर्ग की बॉडी पर चाकू और स्क्रूड्राइवर के करीब 8 घाव मिले. हत्या के बाद पोते ने एक 50 वर्षीय किसान के साथ मिलकर शव को बोरी में भरकर नदी में फेंक दिया था, किसान उनके परिवार के खेतों की देखरेख करता था. वहीं पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया, जिसके बाद घटना की पूरी जानकारी सामने आई और पता चल पाया कि आखिर क्यों पोते ने अपने दादा की हत्या की?

दादा से क्यों नाराज था पोता?

पुलिस जांच के अनुसार, 17 वर्षीय पोते के मन में अपने दादा के प्रति लंबे समय से नाराजगी थी. आरोप है कि दादा उसकी बहन के अपने मंगेतर के साथ घर से निकलकर शादी करने को लेकर उसे और उसकी मां को लगातार ताने देते थे. पोते ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि करीब दो साल पहले उसकी बहन ने अपने मंगेतर से शादी कर ली थी. दादा इस शादी से नाराज थे और इसे लेकर परिवार के सदस्यों को ताने देते थे.

पुलिस के मुताबिक, नाबालिग ने यह भी बताया कि उसके दादा ने ही उसकी बहन की सगाई तय की थी. हालांकि बाद में उन्होंने कथित तौर पर उसकी मां या बहन से सलाह किए बिना सगाई तोड़ दी. इसके अलावा पोते के पिता की करीब चार साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। पोते का आरोप था कि उस समय भी उसके दादा ने परिवार का साथ नहीं दिया और न ही पिता की मौत पर उचित शोक जताया. इन घटनाओं को लेकर उसके मन में दादा के प्रति नाराजगी बढ़ती गई.

दोस्त और किसान क्यों थे दादा से नाराज?

पुलिस के अनुसार, 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले किशोर ने कथित तौर पर दादा की हत्या का फैसला किया. उसे पता था कि उसका 20 वर्षीय दोस्त और परिवार के खेत में काम करने वाला 50 वर्षीय किसान भी बुजुर्ग से नाराज थे. 20 वर्षीय आरोपी ने पुलिस को बताया कि मृतक का पोता उसका दोस्त था और दोनों अक्सर साथ में शराब पीते थे. जब वह दोस्त के घर जाता था, तब बुजुर्ग कथित तौर पर उसे डांटते और अपमानित करते थे. इसी वजह से उसने अपने दोस्त की हत्या की साजिश में साथ देने की हामी भर दी.

पुलिस पूछताछ में 50 वर्षीय किसान ने बताया कि वह कई वर्षों से बुजुर्ग के खेत में खेती और रखवाली का काम करता था. उसका आरोप था कि जमीन मालिक छोटी-छोटी गलतियों पर भी उसे लाठी से पीटता था. पुलिस के मुताबिक, इसी दुर्व्यवहार के कारण किसान के मन में भी बुजुर्ग के प्रति गहरी नाराजगी थी. हत्या के बाद उसने कथित तौर पर दोनों आरोपियों की शव ठिकाने लगाने में मदद की.

कब और कैसे किया बुजुर्ग पर हमला?

थाना प्रभारी के अनुसार, 10 अगस्त की रात करीब 1 बजे किशोर और उसका दोस्त घर में घुसे. पुलिस का कहना है कि उन्होंने सो रहे बुजुर्ग पर हमला किया. पूछताछ में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, बुजुर्ग ने हमले के दौरान विरोध करने की कोशिश की. एक आरोपी उनकी छाती पर बैठ गया और उनका गला दबाया, जबकि दूसरे ने उनके सिर को तौलिए से ढक दिया और दोनों हाथ बांध दिए.

पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग को काबू में करने के बाद दोनों आरोपियों ने चाकू और स्क्रूड्राइवर से उन पर कई बार हमला किया. पोस्टमार्टम में सीने, गर्दन और कंधे पर आठ गहरे घाव मिलने की बात सामने आई है. पुलिस का कहना है कि गर्दन दबने और चेहरा ढके होने के कारण बुजुर्ग को सांस लेने में परेशानी हुई. हमले के बाद उनकी मौत हो गई.

कब और कहां से मिला शव?

बाली पुलिस कांस्टेबल पारसराम चौधरी के मुताबिक, हत्या के दो दिन बाद 12 अगस्त को बुजुर्ग का शव नदी किनारे से बरामद किया गया. मृतक के चार बेटों में से दो की पहले ही मौत हो चुकी थी. बाकी दो बेटे मुंबई में अपने परिवार के साथ रहते हैं. बुजुर्ग गांव में अपनी दो बहुओं और पोते-पोतियों के साथ रह रहे थे.

घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतक के दोनों बेटे 13 अगस्त को मुंबई से गांव पहुंचे. उन्होंने अपने पिता की हत्या को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. जांच के दौरान पुलिस को मृतक के नाबालिग पोते पर संदेह हुआ. पूछताछ और अन्य जांच के बाद कथित तौर पर पूरा घटनाक्रम सामने आया. नाबालिग पोते, उसके 20 वर्षीय दोस्त और 50 वर्षीय किसान को गिरफ्तार कर लिया. दो बालिग आरोपियों को हिरासत में भेज दिया गया. वहीं नाबालिग आरोपी को किशोर सुधार गृह एवं निगरानी गृह भेजा गया.