
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के ललौली थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक मदरसे की 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर लंबे समय तक यौन शोषण करने और उसे बहला-फुसलाकर भगाने के आरोप में स्थानीय पुलिस ने एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। आरोपी मौलवी की पहचान अब्दुल समद के रूप में हुई है, जो मूल रूप से फर्रूखाबाद जिले के जहानगंज थाना क्षेत्र के बंथल शाहपुर गांव का निवासी है।वह ललौली थाना क्षेत्र के एक गांव में स्थित जामा मस्जिद और स्थानीय मदरसे से जुड़ा हुआ था और वहाँ बच्चों को तालीम (शिक्षा) देता था।
पुलिस से मिली जानकारी और दर्ज शिकायत के अनुसार, नाबालिग छात्रा नियमित रूप से मदरसे में तालीम हासिल करने के लिए जाती थी। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। आरोप है कि शिक्षक के रूप में कार्यरत अब्दुल समद ने छात्रा को शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसाया और पिछले करीब एक साल से उसके साथ दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दे रहा था। घटना का खुलासा तब हुआ जब बीती 16 अगस्त की रात आरोपी मौलवी छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ फर्रुखाबाद भगाने की फिराक में था। छात्रा के अचानक घर से गायब होने पर चिंतित परिजनों ने जब उसकी तलाश शुरू की, तो रास्ते में दोनों को संदिग्ध हालत में पकड़ लिया और तत्काल ललौली थाना पुलिस को सौंप दिया।
ललौली थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराए गए बयानों में दुष्कर्म की पुष्टि होने और आरोपों की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी अब्दुल समद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म सहित विभिन्न सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया पुलिस द्वारा आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा, विशेषकर शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों पर कार्यरत शिक्षकों व स्टाफ की पृष्ठभूमि की जांच और सत्यापन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए ताकि अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित महसूस करा सकें। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आश्वस्त किया है कि इस तरह के गंभीर और संवेदनशील मामलों में त्वरित और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।



