Mathura News: उत्तर प्रदेश में मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर लगे नाम बोर्ड में उर्दू भाषा में स्टेशन का नाम लिखे होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्टेशन परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति उर्दू में लिखे स्टेशन के नाम पर आपत्ति जताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसे हटवाने की मांग करता नजर आ रहा है. वीडियो में उसके साथ मौजूद लोग धार्मिक नारे लगाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं.

वायरल वीडियो में व्यक्ति मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहता है कि मथुरा जंक्शन के बोर्ड पर उर्दू भाषा में स्टेशन का नाम लिखा गया है. उसका दावा है कि उर्दू देश की भाषा नहीं है, इसलिए रेलवे और उत्तर प्रदेश सरकार को स्टेशन के बोर्ड से दूसरी भाषा में लिखे, नाम को तत्काल हटाना चाहिए. वह यह भी कहता दिखाई देता है कि जब वह अगली बार मथुरा आए तो स्टेशन पर यह नाम नहीं होना चाहिए.
स्टेशन पर की नारेबाजी
इसी दौरान उसके साथ मौजूद लोगों द्वारा स्टेशन परिसर में अयोध्या तो झांकी है, काशीमथुरा बाकी है और कृष्ण लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे जैसे नारे लगाए गए. वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरहतरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान गौतम रावरिया के रूप में बताई जा रही है. उन्हें विश्व हिंदू परिषदबजरंग दल से जुड़ा महाराष्ट्र का हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता बताया जा रहा है. सोशल मीडिया पर उपलब्ध दावों में उन्हें धार्मिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहने वाला व्यक्ति बताया गया है. हालांकि, उनके संगठनात्मक पद और उनके संबंध में किए जा रहे विभिन्न दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
वायरल वीडियो में उर्दू भाषा को लेकर किए गए दावे के बीच यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि भारत में किसी भी भाषा को संविधान ने राष्ट्रीय भाषा का दर्जा नहीं दिया है. हिंदी संघ की राजभाषा है, जबकि उर्दू संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। रेलवे स्टेशनों पर क्षेत्र और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार कई भाषाओं में स्टेशन के नाम प्रदर्शित किए जाते हैं.
स्टेशन का नाम उर्दू में लिखने पर विवाद
मथुरा धार्मिक दृष्टि से देशदुनिया में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. ऐसे में स्टेशन के नाम बोर्ड को लेकर सामने आया यह वीडियो धार्मिक पहचान और भाषा के मुद्दे को लेकर बहस का विषय बन गया है. वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि, समाचार लिखे जाने तक रेलवे, जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से वायरल वीडियो और उसमें लगाए गए नारों को लेकर कोई आधिकारिक बयान अथवा कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है. अब देखना होगा कि रेलवे और प्रशासन इस मामले को लेकर क्या रुख अपनाता है.
रिपोर्ट गुलशन/गुरुग्राम



