भारतीय शेयर बाजार में स्मॉलकैप इंडेक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. बाहर से देखने पर ये रैली बेहद आकर्षक लग रही है, लेकिन इसके भीतर एक गंभीर चेतावनी छिपी है. ऐसा लग रहा है कि इंडेक्स तो तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन उसमें शामिल ज्यादातर शेयर इस रफ्तार का साथ नहीं दे पा रहे हैं. यस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में निफ्टी स्मॉलकैप 250 के केवल 37.2 फीसदी शेयरों ने ही अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है.

ये पिछले आठ सालों का सबसे निचला स्तर है. इसका सीधा मतलब ये है कि इंडेक्स का शानदार रिटर्न कुछ गिनेचुने शेयरों की बदौलत आ रहा है. इस साल 24 फीसदी स्मॉलकैप शेयरों ने 25 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है, लेकिन ज्यादातर शेयर इंडेक्स को भी बीट नहीं कर पाए हैं. ऐसे में जो निवेशक पुरानी परफॉर्मेंस देखकर स्मॉलकैप में पैसा लगा रहे हैं, उनके लिए जोखिम काफी बढ़ गया है.
लार्जकैप में दिख रहा अलग ट्रेंड
स्मॉलकैप के ठीक उलट लार्जकैप में तस्वीर बिल्कुल अलग है. निफ्टी 100 के करीब 65 फीसदी शेयर अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. ये आंकड़ा 2025 के 46.5 फीसदी से काफी ऊपर है और पिछले आठ सालों में सबसे ज्यादा है. दिलचस्प बात ये है कि निफ्टी 100 का प्रदर्शन भले ही व्यापक बाजार से कमजोर रहा हो, लेकिन इसके ज्यादातर शेयर अच्छा कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि लार्जकैप की कमजोरी सिर्फ कुछ गिनेचुने शेयरों तक ही सीमित है. पूरे एनएसई 500 में भी बाजार की भागीदारी बेहतर हुई है.
केनरा रोबेको एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी श्रीदत्त भांडवलदार का कहना है कि निवेशक अक्सर पिछले रिटर्न को देखकर निवेश करते हैं. पिछले तीन सालों में स्मॉल और मिडकैप ने लार्जकैप को काफी पीछे छोड़ दिया है, इसलिए वहां ज्यादा पैसा आ रहा है. म्यूचुअल फंड के आंकड़ों में भी ये साफ दिखता है. जुलाई महीने में स्मॉलकैप फंड्स में 7,770 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया, जबकि लार्जकैप फंड्स से 1,320 करोड़ रुपये बाहर निकल गए.
अर्निंग्स का मिल रहा सपोर्ट
हालांकि स्मॉलकैप की ये रैली पूरी तरह से बुनियादी बातों से अलग नहीं है. मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में स्मॉलकैप कंपनियों की अर्निंग्स में सालाना आधार पर 31 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है, जो अनुमानों से काफी बेहतर है. इसमें फाइनेंशियल, ऑयल, गैस, एनबीएफसी और केमिकल सेक्टर का बड़ा योगदान रहा. एचएसबीसी म्यूचुअल फंड के सीआईओ वेणुगोपाल मंगत के अनुसार, भविष्य की अर्निंग्स का अनुमान भी छोटी कंपनियों के पक्ष में है. वित्त वर्ष 2027 के लिए निफ्टी 100 की प्रॉफिट ग्रोथ 16 फीसदी, मिडकैप की 20 फीसदी और स्मॉलकैप की 34 फीसदी रहने का अनुमान है.
वैल्युएशन पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय
मजबूत अर्निंग्स के बावजूद स्मॉलकैप की हाई वैल्युएशन चिंता का विषय है. इक्विट्री कैपिटल एडवाइजर्स के सहसंस्थापक पवन भरडिया का मानना है कि अब मार्केट कैप के आधार पर निवेश करने का फायदा कम हो गया है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। उनका कहना है कि मिडकैप में वैल्युएशन काफी ऊपर जा चुका है. हालांकि, वो 1,000 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली चुनिंदा कंपनियों में अब भी मौके देख रहे हैं.
कोटक लाइफ इंश्योरेंस के हेड ऑफ इक्विटी हेमंत कानावाला का कहना है कि लार्जकैप में खास तौर पर बैंक और आईटी सेक्टर में वैल्युएशन का कंफर्ट है. कुल मिलाकर स्मॉलकैप की रैली पूरी तरह से कोई ट्रैप नहीं है, क्योंकि अर्निंग्स की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. लेकिन 8 साल के निचले स्तर की भागीदारी और प्रीमियम वैल्युएशन को देखते हुए बिना सोचेसमझे निवेश करना अब एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है.



