moringa

दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाले पेड़ होते है. इसे सांबर में डाला जाता है। वहीँ उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है. सर्दियां जाने के बाद इसके फूलों की भी सब्जी बना कर खाई जाती है. फिर इसकी नर्म फलियों की सब्जी बनाई जाती है। इसके बाद इसके पेड़ों की छटाई कर दी जाती है। आप जान कर हैरान हो जाएंगे की 100 ग्राम सहजन 5 गिलास दूध के बराबर शक्ति रखती है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। हर रोग की औषिधि है सहजन।

आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसकी फली, हरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

इसके फूल उदर रोगों व कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका, गठिया आदि में उपयोगी है।

जड़ दमा, जलोधर, पथरी, प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग शियाटिका, गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयस्कर है।

सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर, वातघ्न, रुचिकारक, वेदनाशक, पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है।

सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात व कफ रोग शांत हो जाते हैं। इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात (लकवा), वायु विकार में लाभ पहुंचता है। शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा प्रभाव दिखाता है।

मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व 72 प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।

इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है।

सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द में राहत मिलती है।

इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ बताया जाता है।

इसके पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालने में सहायक माना जाता है और उल्टी-दस्त में भी उपयोगी बताया जाता है।

इसका रस सुबह-शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ बताया जाता है।

इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है।

इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है।

इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।

इसकी जड़ का काढ़ा सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ बताया जाता है।

इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन में राहत मिलती है।

सिर दर्द में इसके पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाया जाता है या इसके बीज घिसकर सूंघे जाते हैं।