
इस साल दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा था. दरअसल नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों ने लगभग 1 महीने तक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा था. इसके बाद देश के अलग-अलग इलकों में खराब शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर विरोध देखने को मिला. वहीं कॉकरोच जनता पार्टी भी अलग-अलग राज्यों में जाकर ऐसे स्कूलों और वहां की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने लगी.
हाल ही में राजस्थान के कई स्कूलों के वीडियो देखने को मिले. कई वीडियो में दावा किया गया कि बच्चे भैंसों के दबेले में पढ़ने को मजबूर है. जिसके बाद अब सीजेपी और कांग्रेस ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आरोपों के बीच मंत्री पर तत्काल इस्तीफा देने का दबाव बढ़ाया जा रहा है.
जयपुर में क्या हुआ विवाद?
विवाद उस समय और बढ़ गया जब जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव स्थित एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची सीजेपी की टीम के साथ मारपीट की घटना सामने आई. सीजेपी के अनुसार, देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम सरकारी स्कूल पहुंची थी. आरोप है कि वहां कुछ लोगों ने टीम के सदस्यों पर पथराव किया, वाहनों की खिड़कियां तोड़ीं और मारपीट की. संगठन का दावा है कि इस घटना में उसके एक सदस्य का हाथ टूट गया. आरोप यह भी है कि घटना के बाद मंत्री मदन दिलावर ने ग्रामीणों की आलोचना करने के बजाय उनके समर्थन में बयान दिया.
क्या था नया विवाद?
सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों द्वारा बिना अनुमति फोटो और वीडियो बनाए जाने को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया. विभाग की ओर से इसके पीछे निजता और सुरक्षा संबंधी कारण बताए गए हैं. हालांकि, सीजेपी का आरोप है कि यह कदम स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास है. सीजेपी का दावा है कि उसके निरीक्षण अभियानों के जरिए सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाई जा रही थी और फोटो-वीडियो पर रोक लगाने से पारदर्शिता प्रभावित होगी.
सरकारी स्कूलों पर क्यों उठा सवाल?
मदन दिलावर के खिलाफ लगाए जा रहे प्रमुख आरोपों में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे की स्थिति भी शामिल है. विरोध करने वाले नेताओं का दावा है कि राजस्थान के कई सरकारी विद्यालयों में भवन और कक्षाएं बेहद खराब स्थिति में हैं. झालावाड़ में एक सरकारी स्कूल की इमारत गिरने की घटना को भी इस बहस के केंद्र में रखा जा रहा है. दावों के अनुसार, इस हादसे में सात छात्रों की मौत हुई थी. बाद में किए गए राज्य स्तरीय ऑडिट का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि राजस्थान के करीब 63,000 सरकारी स्कूलों में 5,600 से अधिक स्कूल भवन और लगभग 87,000 कक्षाएं जर्जर या असुरक्षित स्थिति में हैं.
छात्रों के बीमार पड़ने का क्या था मामला?
कोटा के एक सरकारी स्कूल में दोपहर का भोजन करने के बाद करीब 30 छात्रों के बीमार पड़ने की घटना ने भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए. खास बात यह है कि कोटा को मदन दिलावर का गृह जिला बताया जाता है. विरोधी नेताओं ने इस घटना को छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों से जोड़ते हुए मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. विरोध कर रहे संगठन का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, भोजन की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
सीजेपी के आशुतोष रांका ने मदन दिलावर को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने की बात कही है. उनकी मांगों में जयपुर में हुए हमले में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और स्कूलों में मीडिया तथा निरीक्षण से जुड़े प्रतिबंध हटाना शामिल है. संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा
मदन दिलावर के खिलाफ कांग्रेस भी लगातार हमलावर है. जयपुर में स्कूल निरीक्षण के दौरान हुई कथित झड़प की कांग्रेस ने निंदा की और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस मौके पर मूकदर्शक बनी रही. पार्टी के कुछ नेताओं ने इस हिंसा को “मदन दिलावर के इशारे पर पूर्व नियोजित और अंजाम दी गई” घटना बताया है. राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने मदन दिलावर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
विपक्षी नेताओं ने शिक्षा विभाग में व्यवस्थागत खामियों को लेकर मंत्री के इस्तीफे की मांग की और सदन की कार्यवाही के बहिष्कार का भी रास्ता अपनाया. विपक्ष के नेता टीका राम जुली सहित कांग्रेस नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरा. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी दिलावर पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया.
कांग्रेस के क्या-क्या है आरोप?
1. कांग्रेस ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली होने का मुद्दा भी उठाया है. डोटासरा के अनुसार, राज्य में 12.5 लाख से अधिक शिक्षण पद रिक्त हैं.
2. विपक्ष का आरोप है कि सरकार पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने और स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए जरूरी धन आवंटित करने में विफल रही.
3. कांग्रेस ने उन पर स्कूली पाठ्यपुस्तकों से गांधी-नेहरू परिवार के ऐतिहासिक योगदान से जुड़े अध्याय हटाने का आरोप भी लगाया है.



