दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चल रही भारी उठापटक के बीच ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्प ने बड़ी राहत की खबर दी है. कंपनी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया है कि ONGC कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बड़े बदलावों का आसानी से सामना कर सकती है. उनके मुताबिक तेल के दाम 60 से लेकर 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने पर भी कंपनी के कामकाज या मुनाफे पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. ग्रुप लेवल पर कंपनी कम या ज्यादा, दोनों तरह की गैस कीमतों के लिए पूरी तरह से तैयार है. ये मजबूती रातोंरात नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कंपनी का एक सधा हुआ बिजनेस मॉडल काम कर रहा है.

ऐसे मेंटेन हो रहा है कंपनी का मुनाफा
ONGC केवल कच्चे तेल के उत्पादन तक सीमित नहीं है. अपस्ट्रीम के साथसाथ डाउनस्ट्रीम बिजनेस में भी कंपनी की मजबूत पकड़ है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों से होने वाले नुकसान की भरपाई दूसरी जगह से हो जाती है. आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का करीब 60 प्रतिशत मुनाफा एक्सप्लोरेशन एवं प्रोडक्शन से आता है. बाकी का मुनाफा अन्य बिजनेस सेग्मेंट्स से पूरा होता है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम से लेकर मैंगलोर रिफाइनरी जैसी कंपनियों में ONGC की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है. यही नेटवर्क कंपनी को बाजार के झटकों से बचाता है.
रणनीति बदलने की कोई जरूरत नहीं
मौजूदा ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बावजूद ONGC अपनी मिडटर्म रणनीति में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है. चेयरमैन सिंह का मानना है कि उन्हें अपनी मौजूदा रणनीति से हटकर कुछ अलग करने की कोई जरूरत महसूस नहीं हो रही है. एनर्जी इक्विवेलेंस के आधार पर आज भी तेल व गैस सबसे सस्ते विकल्प हैं. उन्होंने ये भी बताया कि अगर इस समय दुनिया में भूराजनीतिक तनाव या अमेरिकाईरान का युद्ध न होता, तो कच्चे तेल की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास होती. कीमतों में गिरावट की आशंका को देखते हुए कंपनी ने पिछले साल कॉस्टरिडक्शन प्लान लागू किया था. इससे ऑपरेटिंग कॉस्ट में 6 से 7 प्रतिशत की कमी भी आई, लेकिन जीएसटी दरें बढ़ने से ये बचत लगभग खत्म हो गई.
ग्रीन एनर्जी पर खास फोकस
आने वाले 7 से 10 सालों में ONGC अपने एनर्जी पोर्टफोलियो में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाने वाली है. कंपनी का लक्ष्य इसे कुल पोर्टफोलियो का 30 प्रतिशत तक ले जाना है. फिलहाल ONGC की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता करीब 2.5 GW है. कंपनी ने 2030 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 10 GW तक ले जाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है.
डीपवाटर प्रोजेक्ट्स का मेगा प्लान
ONGC अब गहरे पानी में तेल व गैस की खोज पर बड़ा दांव लगा रही है. चालू वित्त वर्ष में कंपनी 8 डीपवाटर या अल्ट्राडीपवाटर कुएं खोदने की तैयारी में है. अगले वित्त वर्ष में ऐसे 10 नए कुएं खोदे जाएंगे. कंपनी का सबसे बड़ा लक्ष्य 203031 तक कुल 87 डीपवाटर कुएं खोदने का है. इस विशाल प्रोजेक्ट के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये के भारी निवेश की जरूरत पड़ेगी. इसके साथ ही, कंपनी इस साल के अंत तक एक ग्लोबल ऑयल ट्रेडिंग जॉइंट वेंचर शुरू करने जा रही है. इसके लिए पार्टनर की तलाश आखिरी दौर में है. ये नया वेंचर दुबई या सिंगापुर में आधारित होगा.



