सरकार ने 1 सितंबर से पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स को शून्य से बढ़ाकर 1.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया है. साथ ही, डीजल के एक्सपोर्ट पर लेवी बढ़ाई गई है और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर ड्यूटी में थोड़ी कटौती की गई है. डीजल के एक्सपोर्ट पर लेवी को पिछली पाक्षिक समीक्षा में तय 24 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 25 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 19.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 19 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है. पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 1.5 रुपए प्रति लीटर की लेवी पूरी तरह से स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी के तौर पर ली जाएगी. डीजल के मामले में, SAED 24 रुपए प्रति लीटर होगा और बाकी 1 रुपया रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के तौर पर लिया जाएगा. ATF के एक्सपोर्ट पर 19 रुपए प्रति लीटर की लेवी पूरी तरह से SAED के तौर पर ली जाएगी.

15 अगस्त को जीरों किया गया था टैक्स
ये बदलाव पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट लेवी में नवीनतम पाक्षिक समीक्षा के तहत किए गए हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। इन लेवी को 27 मार्च, 2026 से लागू किया गया था ताकि पश्चिम एशिया संकट के बीच एक्सपोर्ट को हतोत्साहित करके घरेलू स्तर पर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके. इन लेवी में पिछली बार 15 अगस्त को बदलाव किया गया था, जब सरकार ने पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को शून्य कर दिया था, डीजल पर लेवी 24 रुपए प्रति लीटर तय की थी और ATF पर ड्यूटी 19.5 रुपए प्रति लीटर तय की थी. पिछली समीक्षा के बाद की अवधि में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े दरों में बदलाव किया जाता है.
हर 15 दिन में होता है बदलाव
नई समीक्षा में पिछले पखवाड़े पेट्रोल एक्सपोर्टर्स को दी गई राहत को वापस ले लिया गया है और डीजल एक्सपोर्ट पर लेवी 1 रुपया प्रति लीटर बढ़ा दी गई है, जबकि ATF एक्सपोर्ट पर 50 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई है. सरकार ने कहा कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसलिए, बदली हुई दरें केवल एक्सपोर्ट पर लागू होंगी और घरेलू बाजार में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा. पाक्षिक समीक्षा व्यवस्था सरकार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव के अनुसार एक्सपोर्ट लेवी को समायोजित करने की अनुमति देती है, साथ ही जब घरेलू ईंधन की उपलब्धता चिंता का विषय हो तो एक्सपोर्ट को हतोत्साहित करने की क्षमता भी बनाए रखती है.



