कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा देखने को मिला है. अगर आंकड़ों को देखें तो 28 अगस्त के बाद से खाड़ी देशों के कच्चे तेल ब्रेंट क्रूड में करीब 10 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है और 2 अगस्त को दाम 97 डॉलर के करीब दिखाई दिए. उसके बाद भी पेट्रोलियम कंपनियां इस नुकसान को झेल सकती है. उन्हें सिर्फ डर है कि कहीं क्रूड के दाम एक बार फिर से 100 डॉलर या उससे पार ना चली जाए. अगर ऐसा हुआ तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से इजाफा करना पड़ सकता है. वैसे मौजूदा समय में पेट्रोलियम कंपनियां नेगेटिव मार्जिन पर पेट्रोल और डीजल की सेल कर रही हैं. उसका कारण भी है. मौजूदा समय में देश के लगभग सभी शहरों में पेट्रोल के दाम 100 रुपए के आंकड़ों को पार कर गए हैं. यहां तक की कई शहरों में डीजल की कीमतें 100 रुपए प्रति लीटर को टच कर चुकी हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर किस तरह की रिपोर्ट सामने आई है…

कंपनियां कब तक उठा सकती हैं बोझ?
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां 8590 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में कच्चे तेल की कीमतों का बोझ उठा सकती हैं और इन स्तरों पर लगभग ‘ब्रेकईवन’ की स्थिति में काम कर सकती हैं. इससे पता चलता है कि निकट भविष्य में रिटेल फ्यूल की कीमतों पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अभी कीमतों में बढ़ोतरी पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार 95100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो रिटेल कीमतों पर फिर से विचार करना पड़ सकता है. ऊपर बताए गए सूत्रों में से एक ने कहा कि अभी पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है. अगर कच्चे तेल की कीमतें कई हफ्तों तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है.
कुछ दिनों में 10 फीसदी का इजाफा
2 सितंबर की दोपहर को ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति प्रति बैरल के आसपास था. पिछले दो दिनों में इसमें 5 डॉलर से ज्यादा और 28 अगस्त के बाद से ब्रेंट क्रूड के दाम मतें 10 फीसदी से ज्यादा यानी 8 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल चुका है. इसका कारण भी है. अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमले तेज हो गए हैं. मई में, जब OMCs ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, तब भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 106.23 डॉलर प्रति बैरल थी, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण कीमतें 100 डॉलर से ऊपर चली गई थीं.
डीजल पर 15 रुपए का नुकसान
इंडस्ट्री के एक सूत्र ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत 8590 डॉलर के आसपास होने पर, कीमतों में बढ़ोतरी और एक्साइज ड्यूटी में कटौती को ध्यान में रखने के बाद भी, OMCs ऑटो फ्यूल पर मोटे तौर पर ‘ब्रेकईवन’ की स्थिति में हैं.” ICRA के हिसाबकिताब के अनुसार, अभी पेट्रोल की बिक्री पर OMCs का मार्केटिंग मार्जिन 5 रुपए प्रति लीटर है, जबकि डीजल पर 15 रुपए प्रति लीटर का नेगेटिव मार्केटिंग मार्जिन है. ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कोग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ ने मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि OMCs की अपनी रिफाइनरियों में बनने वाले प्रोडक्ट्स के लिए, वे 8590 डॉलर प्रति बैरल क्रूड लेवल पर ब्रेकईवन हासिल करने में सक्षम होनी चाहिए, जबकि स्टैंडअलोन रिफाइनरीज से डीजल की खरीद पर उन्हें कुछ नुकसान हो सकता है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के डेटा के अनुसार, अगस्त में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 90.19 डॉलर थी.
कब बढ़ सकती है पेट्रोल और डीजल की कीमत?
वशिष्ठ ने कहा कि अभी OMCs को रिफाइनिंग से अच्छा मार्जिन मिल रहा है और वे 8590 डॉलर के क्रूड के असर को झेलने में सक्षम हो सकती हैं. वशिष्ठ ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 95100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो रिटेल फ्यूल की कीमतें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है. OMCs कोई भी फैसला लेने से पहले इंतजार कर सकती हैं और यह देख सकती हैं कि क्या कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं. अगर कीमतें लंबे समय तक ज़्यादा बनी रहती हैं, तो उन्हें आखिरकार रिटेल फ्यूल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, खासकर इसलिए क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ज्यादा रहने से उनका नुकसान काफी बढ़ सकता है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। उन्होंने कहा कि एक समय रोजाना का नुकसान लगभग 1,000 करोड़ रुपये था, जो बाद में घटकर लगभग 500 करोड़ रुपये रह गया.
कंपनियों को सिलेंडर पर 200 रुपए का नुकसान
वशिष्ठ ने कहा कि OMCs को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की बिक्री पर प्रति सिलेंडर 200 रुपए का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि LPG पर नुकसान काफी ज्यादा है. OMCs और सरकार को यह तय करना पड़ सकता है कि इस लागत का कितना हिस्सा ग्राहकों पर डाला जा सकता है. पेट्रोलियम मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा को बताया कि 31 जुलाई तक घरेलू LPG बिक्री पर OMCs को कुल नुकसान 59,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया, जबकि सरकार ने वित्त वर्ष 2027 तक 52,000 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया था. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन बाज़ार भाव से कम कीमत पर कुकिंग गैस बेच रही हैं, जिसके कारण वेस्ट एशिया युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बंद होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने से उन्हें काफ़ी नुकसान हुआ है.



