Chenab River dam: भारत ने सिंधु जल समझौते को लेकर अपने पुराने रुख में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव का असर अब जम्मूकश्मीर के विकास कार्यों पर दिखने लगा है. लंबे समय से अटके पड़े प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू किया जा रहा है. इसी सिलसिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित 1850 मेगावाट के सावलकॉट जलविद्युत प्रोजेक्ट को लेकर भारत ने एक बेहद अहम कदम उठाया है. बीते 40 साल से ये महत्वाकांक्षी परियोजना सिर्फ कागजों पर ही झूल रही थी. अब इसके जमीन पर उतरने की उम्मीदें काफी पुख्ता हो गई हैं. भारत सरकार पश्चिमी नदियों के पानी का पूरा इस्तेमाल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इसी कड़ी में सावलकॉट डैम के टेंडर की प्रक्रिया को गति दी गई है.

चार दशक का इंतजार हुआ खत्म
सावलकॉट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पिछले करीब चार दशकों से कई तरह के पचड़ों में फंसा हुआ था. इसका सबसे बड़ा कारण भारतपाकिस्तान के बीच हुआ सिंधु जल समझौता था. इस समझौते की आड़ में पाकिस्तान लगातार इस प्रोजेक्ट को लेकर अड़ंगे लगाता रहा. वह किसी भी सूरत में इसे हरी झंडी नहीं दे रहा था. अब भारत ने पाकिस्तान की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए परियोजना के निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति की है. लगभग 31 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला ये प्रोजेक्ट चिनाब बेसिन में भारत की बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल होने जा रहा है.
शुरुआती टेंडर के लिए बड़ी रेस
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए शुरुआती काम का पहला टेंडर निकाल दिया गया है. शुरुआती चरण के काम की अनुमानित लागत 5129 करोड़ रुपये तय की गई है. इस टेंडर को हासिल करने के लिए देश की पांच जानीमानी कंपनियों ने अपनी बोली लगा दी है. इन बोली लगाने वाली कंपनियों में अडानी समूह, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी , पटेल इंजीनियरिंग, लार्सन एंड टुब्रो के साथ ऋत्विक प्रोजेक्ट्स शामिल हैं. पांच बड़ी कंपनियों की इस दिलचस्पी को इस दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
पश्चिमी नदियों का होगा पूरा इस्तेमाल
सिंधु जल संधि के बाद से ही चिनाब नदी पर डैम बनाने का महत्व काफी बढ़ गया है. चिनाब उन पश्चिमी नदियों में शामिल है, जिनके पानी के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। भारत अब इस नदी पर अपनी जलविद्युत क्षमता के पूर्ण उपयोग को लेकर पूरी तरह से तैयार है. सावलकॉट परियोजना इसी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है. अगर परियोजना निर्माण के अगले चरण में पहुंचती है, तो ये जम्मूकश्मीर के साथ चिनाब बेसिन में भारत की स्थिति को काफी मजबूत कर देगी.
रोजगार के साथ बढ़ेगा बिजली उत्पादन
सावलकॉट परियोजना ऐसे समय में रफ्तार पकड़ रही है, जब चिनाब बेसिन में पहले से ही कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम चल रहा है. मौजूदा समय में किरू, क्वार के अलावा रतले जैसी परियोजनाएं भी इसी क्षेत्र में विकसित की जा रही हैं. 1850 मेगावाट के सावलकॉट प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जम्मूकश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. इससे क्षेत्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी. बिजली की पर्याप्त सप्लाई होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. वहीं, डैम के निर्माण से इलाके में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.



