दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलॉन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स ने अमेरिकी शेयर बाजार में कदम रखते ही इतिहास रच दिया है. अपने आईपीओ के बाद शुरुआती तीन कारोबारी दिनों में ही कंपनी का शेयर करीब 60.3% तक उछल गया है. इस तूफानी तेजी के कारण स्पेसएक्स का मार्केट कैप 2.94 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जिसने दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न को भी पीछे छोड़ दिया है. भारतीय निवेशकों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें इस महंगे शेयर में पैसा लगाने के लिए पूरे एक शेयर की कीमत चुकाने की जरूरत नहीं है, वे मात्र 5,000 रुपये जैसी छोटी रकम से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं.

तीन दिन में $135 से $216 तक पहुंचा भाव

स्पेसएक्स के शेयरों की लिस्टिंग 12 जून को हुई थी. कंपनी ने अपना आईपीओ प्राइस 135 डॉलर तय किया था, लेकिन बाजार में इसकी शुरुआत 150 डॉलर पर हुई. निवेशकों की भारी मांग के चलते पहले ही दिन यह 19% की बढ़त के साथ 161 डॉलर पर बंद हुआ.

तेजी यहीं नहीं रुकी, सोमवार 15 जून को दूसरे कारोबारी दिन शेयर 19.6% की छलांग लगाकर 192.50 डॉलर पर पहुंच गया. इसके बाद मंगलवार 16 जून को भी शेयर में 12.40% की और तेजी आई, जिससे इसका भाव 216.38 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर बंद हुआ. इस तरह महज तीन दिनों में आईपीओ के मुकाबले शेयर में 60.3% और लिस्टिंग प्राइस के मुकाबले 44.3% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है.

माइक्रोसॉफ्टअमेज़न को पछाड़ा, अमेरिकी बाजार में बना नया रिकॉर्ड

मंगलवार को आई इस ऐतिहासिक तेजी के दम पर स्पेसएक्स अमेरिका की चौथी सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी बन गई. कारोबार के दौरान एक समय स्पेसएक्स का कुल बाजार मूल्यांकन 2.94 ट्रिलियन डॉलर हो गया था. इस आंकड़े के साथ मस्क की कंपनी ने दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट और ईकॉमर्स किंग अमेज़न को पीछे छोड़ दिया. अब वैश्विक स्तर पर स्पेसएक्स से आगे सिर्फ एप्पल , एनवीडिया और सऊदी अरामको ही रह गए हैं.

कम पैसों में निवेश का मौका, फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग से आसान हुआ रास्ता

मौजूदा भाव के हिसाब से देखें तो भारतीय मुद्रा में स्पेसएक्स का एक पूरा शेयर खरीदने के लिए लगभग 19,000 रुपये की जरूरत होगी. छोटे निवेशकों के लिए एक बार में इतनी बड़ी रकम लगाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अमेरिकी बाजार की ‘फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग’ की सुविधा ने इस रास्ते को आसान बना दिया है.

क्या होती है फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग?

इसके तहत निवेशकों को किसी कंपनी का पूरा शेयर खरीदने की बाध्यता नहीं होती. आप शेयर का एक छोटा सा टुकड़ा या हिस्सा भी खरीद सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आप स्पेसएक्स में सिर्फ 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो आपको उस शेयर का करीब 25% हिस्सा मिल जाएगा.

यह पूरी प्रक्रिया भारत में की जाने वाली म्यूचुअल फंड एसआईपी की तरह ही काम करती है, जिसे वैश्विक बाजार में ‘डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग’ कहा जाता है. इसमें हर महीने एक निश्चित रकम लगाने पर शेयर महंगा होने पर कम हिस्सा और सस्ता होने पर ज्यादा हिस्सा मिलता है, जिससे लंबे समय में निवेश की औसत लागत संतुलित रहती है. इस सुविधा से भारतीय निवेशक टेस्ला, एनवीडिया, अमेज़न और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों का भी हिस्सा बन सकते हैं.

मुनाफे के बीच जोखिम, ऑप्शंस ट्रेडिंग से बढ़ सकती है हलचल

शेयर बाजार में जहां बंपर रिटर्न की संभावना होती है, वहां जोखिम भी हमेशा बना रहता है. स्पेसएक्स के शेयरों में आ रही इस एकतरफा तेजी के बीच निवेशकों को कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं. 17 जून से इस शेयर में ऑप्शंस ट्रेडिंग की शुरुआत होने जा रही है, जिससे बाजार में इसकी कीमतों में उतारचढ़ाव काफी बढ़ सकता है.

इसके अलावा, आने वाले समय में जैसे ही शुरुआती और बड़े संस्थागत निवेशकों का लॉकइन पीरियड समाप्त होगा, बाजार में मुनाफावसूली के लिए बड़ी बिकवाली देखने को मिल सकती है. इसलिए, सिर्फ शुरुआती तेजी को देखकर जल्दबाजी में बड़ा पैसा लगाने के बजाय कंपनी के वैल्यूएशन और अपने जोखिम उठाने की क्षमता को समझकर ही कदम बढ़ाना समझदारी होगी.

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