तांबे और पीतल में स्टोर करें ‘स्वर्ण जल’: आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से जानिए पानी में सोने का सिक्का उबालकर पीने के फायदे और सही तरीका…

पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। मानव शरीर का लगभग 60 फीसदी हिस्सा पानी से बना होता है। पर्याप्त पानी का सेवन बॉडी को हाइड्रेट रखता है और बॉडी के अंगों को उसके कामकाज करने में मदद करता है। पर्याप्त पानी का सेवन शरीर के तापमान को कंट्रोल रखने, पोषक तत्वों के परिवहन और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में भी अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में पानी पीने के तरीके और उसके बर्तनों को सेहत से सीधे जोड़कर देखा गया है।

योग एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ नित्यानंदम श्री ने बताया अगर पानी का सेवन सोने की धातु को मिक्स करके स्वर्ण जल के रूप में किया जाए तो ये पानी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए अमृत साबित होता है। पानी में सोने का सिक्का डालकर उसे उबालने से तैयार ‘स्वर्ण जल’ शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, जिस धातु के संपर्क में पानी आता है, उसके कुछ गुण पानी में आ सकते हैं। इसी अवधारणा को आयुर्वेद में ‘संस्कार’ से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं कि स्वर्ण जल का सेवन सेहत के लिए क्यों जरूरी है और इसे कैसे तैयार और स्टोर करें। Also ReadClove Water Benefits: पाचन के लिए लौंग के पानी का सेवन कैसे करता है असर, डॉक्टर से जानिए फायदे और तरीका

स्वर्ण जल कैसे सेहत पर करता है असर?

आयुर्वेद में पानी को रखने के लिए अलग-अलग धातुओं के बर्तनों के इस्तेमाल की परंपरा रही है। पारंपरिक रूप से घरों में पानी को मिट्टी, तांबे या दूसरी धातुओं के बर्तनों में रखने की प्रथा रही है। माना जाता है कि बर्तन की धातु पानी के गुणों को प्रभावित कर सकती है। आयुर्वेदिक परंपरा में सोने को महत्वपूर्ण धातु माना गया है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक स्वर्ण जल का सेवन करने से बॉडी को पोषण मिलता है। ये पानी वात,कफ और पित्त दोषों के संतुलन और आंखों तथा मस्तिष्क की सेहत में सुधार करता है। इस पानी का सेवन करने से याददाश्त और मानसिक क्षमता दुरुस्त रहती है। इसका सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर को ताकत मिलती है। स्किन से लेकर आंखों तक की सेहत में सुधार करता है ये पानी। Also Readरोटी पर घी लगाकर खाना सेहत के लिए कितना सही है? क्या डायबिटीज में भी खा सकते हैं चिपड़ी रोटी, डायटीशियन से जानिए

स्वर्ण जल को बलवर्धक क्यों माना जाता है?

आयुर्वेदिक परंपरा में स्वर्ण को शरीर के लिए बलवर्धक माना गया है। नित्यानंदम श्री ने बताया स्वर्ण संस्कारित जल को ओज और तेज बढ़ाने,  शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने वाला माना जाता है। इसी वजह से इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए उपयोगी बताया गया है। स्वर्ण संस्कारित जल को शरीर में सूजन कम करने, किडनी या प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है। ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। आयुर्वेद में इस पानी को शरीर के अंगों की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला और उन्हें रिवाइव करने वाला बताया गया है। आयुर्वेद के मुताबिक किडनी की बीमारी, प्रोस्टेट की समस्या या शरीर में सूजन जैसी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन असरदार साबित होता है।

घर में स्वर्ण जल कैसे तैयार करें?

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया इस पानी को बनाने के लिए आप घर में मौजूद सोने की किसी वस्तु को पानी में डालकर उसे कुछ समय तक उबाल लें।  इसके लिए 24 कैरेट या अधिक शुद्धता वाले सोने का इस्तेमाल करें। इसके लिए आप आभूषण को अच्छी तरह साफ कर लें। करीब 5 लीटर पानी लेकर उसमें सोने का सिक्का या सोने की पतली पट्टी डालकर कुछ मिनट तक उबालें। पानी को उबालने के बाद उसे ठंडा करें और दिनभर इस पानी का सेवन करें।

स्वर्ण जल को कहां करें स्टोर?

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया इस पानी को आप तांबे या पीतल के बर्तन में स्टोर करें। पानी को तांबे या पीतल के बर्तन में रखने और गर्म करने से इन धातुओं के गुण पानी में मिल जाते हैं और पानी हेल्दी हो जाता है। बर्तनों में पानी रखने के दौरान सफाई, धातु की गुणवत्ता और उचित उपयोग का ध्यान रखना जरूरी है।

स्वर्ण जल कैसे हर उम्र के लोगों के लिए है वरदान

आयुर्वेद में  गर्भावस्था में स्वर्ण संस्कारित जल का सेवन अमृत माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान स्वर्ण जल को उपयोगी बताया गया है। ये पानी दिल की सेहत में सुधार करता है। इसका सेवन करने से हर उम्र में याददाश्त मजबूत होती है। स्वर्ण जल का सेवन आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी असरदार साबित होता है। ये पानी स्किन से लेकर चेहरे तक की रंगत में निखार लाता है। उम्र बढ़ने या धूप के कारण त्वचा के फीके पड़ने की समस्या में भी फायदेमंद माना जाता है। स्वर्ण जल तैयार करने के लिए 18 या 14 कैरेट के बजाय अधिक शुद्ध सोने का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।