अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी पर विपक्ष की ओर से लगातार तीखा हमला किया जा रहा है. एक ओर, राम मंदिर ट्रस्ट के दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई आरोपों की जांच कर रहे 3 सदस्यीय विशेष जांच दल का कार्यकाल 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है. तो वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि चंदा चोरी का मामला बहुत बड़ा घोटाला है और ये सब करीब 20 हजार करोड़ रुपये का मामला है.

उत्तर प्रदेश की सरकार ने मामले की जांच कर रहे एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन बढ़ा दिया है. चंदा चोरी का मामला सामने आने पर यूपी की योगी सरकार ने आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया था और शुरुआत में उसे 15 दिन का समय दिया गया था.

जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंच रही जांचः राम गोपाल

इस बीच राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद और वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने दावा करते हुए कहा, “इसमें कई बड़े लोग शामिल हैं और यह कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा घोटाला है.” उनका आरोप है कि इस मामले में कई बड़े लोग शामिल हैं, इसलिए जांच वास्तविक जिम्मेदारों तक नहीं पहुंच रही.

#WATCH | Etawah, Utttar Pradesh | On Ram Mandir donations alleged embezzlement, Samajwadi Party’s National General Secretary, Ramgopal Yadav says, “It is a Rs 20,000 crore scam with big names involved in it. People donated crores of Rupees, gold and diamonds, but today no one pic.twitter.com/sgP01KuWSk

— ANI UP/Uttarakhand July 1, 2026

सपा नेता ने यह भी दावा किया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राम मंदिर में सोना, चांदी और हीरे के हार समेत भारी मात्रा में बहुमूल्य चीजें चढ़ाई हैं, लेकिन उनका पूरा हिसाब अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया. उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही यह 20 हजार करोड़ रुपये का घोटाला है. पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि यूपी की जनता भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों से ऊब चुकी है. अगले साल 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएगी.

SIT जांच का कार्यकाल 15 दिनों के लिए बढ़ा

इस बीच, प्रदेश सरकार ने चंदा चोरी मामले की जांच कर रहे 3 सदस्यीय एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया है. 13 जून को जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था और शुरुआत में उसे 15 दिन का समय दिया था. एक अधिकारी ने बताया कि 23 जून को एसआईटी की ओर से शुरुआती रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद 25 जून को मामले में एक एफआईआर दर्ज की गई.

एफआईआर में नामजद 8 आरोपियों अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार कर लिया गया. आरोपियों से पूछताछ जारी है.

एक अधिकारी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच करने और जांच का दायरा बढ़ाने के लिए एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन और बढ़ा दिया गया है. इस टीम में लखनऊ के कमिश्नर आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल है.