भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया है. इससे पहले जुलाई में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹20,200 करोड़ लगाए थे.

विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. इनमें भारत की बेहतर होती आर्थिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता बड़े कारण हैं. इन वजहों से भारतीय शेयर बाजार विदेशी निवेशकों के लिए एक बार फिर आकर्षक बन रहा है.

लगातार चार महीने की बिकवाली के बाद बदला रुख

विदेशी निवेशकों ने जुलाई से पहले लगातार चार महीने भारतीय शेयरों में बिकवाली की थी. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, जून में FPI ने ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़ और अप्रैल में ₹60,847 करोड़ की बिकवाली की थी. मार्च में तो विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी की थी. हालांकि, फरवरी में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. इसके बावजूद 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹2.41 लाख करोड़ निकाल चुके हैं. वहीं, पूरे 2025 में FPI ने करीब ₹1.66 लाख करोड़ की बिकवाली की थी.

क्यों बढ़ी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का आकर्षण बढ़ा है. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक है. भारतीय रिजर्व बैंक के आर्थिक विकास और महंगाई को लेकर बेहतर अनुमानों से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है. हालांकि, भारतीय शेयरों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है. ऐसे में आगे विदेशी निवेश बढ़ने की गुंजाइश बनी हुई है.

ऑटो और हेल्थकेयर पर नजर

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों में बढ़ रही है. FPI सिर्फ शेयर बाजार में ही नहीं, बल्कि डेट और बॉन्ड मार्केट में भी निवेश कर रहे हैं. अगस्त में अब तक विदेशी निवेशकों ने जनरल रूट के तहत बॉन्ड बाजार में करीब ₹622 करोड़ लगाए हैं.