अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया नीतिगत फैसलों के बाद भारतीय शेयर बाजार में आज दबाव देखने को मिला है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने वैश्विक संकेतों को सकारात्मक बनाने का प्रयास किया था, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा फॉरवर्ड गाइडेंस को वापस लेने के निर्णय ने निवेशकों की धारणा पर अधिक प्रभाव डाला। इस कदम का सीधा असर बुधवार को अमेरिकी बाजारों पर हुआ और आज सुबह भारतीय बाजार के खुलते ही घरेलू सूचकांकों में इसकी झलक स्पष्ट दिखाई दी।

गुरुवार के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स में 100 अंक से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 9.22 बजे सेंसेक्स 52.58 अंक या 0.07 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,103.04 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 सूचकांक भी लगभग सपाट स्थिति में ही कारोबार करता नजर आया। गौरतलब है कि पिछले चार सत्रों से लगातार भारतीय शेयर बाजार में तेजी का दौर चल रहा था, जिसे आज के संकेतों ने फिलहाल थाम दिया है। बुधवार को सेंसेक्स 347.14 अंक की तेजी और निफ्टी 96.55 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ था, लेकिन आज की शुरुआत नकारात्मक रही।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी उतारचढ़ाव का रुख बना हुआ है। रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुला। पिछला सत्र रुपया 94.53 के स्तर पर समाप्त हुआ था, जबकि आज सुबह यह 94.66 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करता दिखा। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 10 शेयरों में गिरावट के साथ ट्रेडिंग शुरू हुई। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र में सबसे अधिक बिकवाली का दबाव देखा गया। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टीसीएस और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में शुरुआती गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, ट्रेंट, अडानी पोर्ट्स, बीईएल, एचडीएफसी बैंक और इंडिगो के शेयरों में निवेशकों की रुचि दिखी और इनमें तेजी बनी रही।
व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट में स्थिति कुछ अलग रही, जहां निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांकों में क्रमशः 0.17 प्रतिशत और 0.24 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। सेक्टरों के लिहाज से देखें तो निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स आज बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। एक महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाक्रम के तहत, अमेरिका और ईरान ने एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में 1.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह 78.23 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। फेडरल रिजर्व का नीतिगत निर्णय और कच्चे तेल की कीमतों का घटना, दोनों ही कारक भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


